अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- तज़्किरा (تذكرة): नसीहत, याद दिलाने वाली चीज़, वह चीज़ जो इंसान को अल्लाह की याद दिलाए और उसे सही रास्ते पर लाए।
- मुत्तक़ीन (للمتقين): वे लोग जो अल्लाह के अज़ाब से डरते हैं और उसकी नाराज़गी से बचने के लिए उसके हुक्मों पर अमल करते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से दूर रहते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
इस आयत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह क़ुरआन उन लोगों के लिए एक बड़ी नसीहत और याद दहानी है जो अल्लाह से डरते हैं। यानी जो लोग अपने रब के अज़ाब से बचने के लिए उसके हुक्मों को मानते हैं और उसकी मना की हुई चीज़ों से परहेज़ करते हैं, उनके लिए यह क़ुरआन एक ऐसा ज़रिया है जो उन्हें हर भले काम की तरफ़ राह दिखाता है और हर बुरे काम से रोकता है।
यह क़ुरआन कोई आम किताब नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ़ से नाज़िल की गई ऐसी रहनुमाई है जो दिलों को ज़िंदा करती है, दिमाग़ को रौशन करती है और इंसान को दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाती है। जो लोग इसकी तालीमात पर अमल करते हैं, उनके लिए यह नूर और हिदायत बन जाता है, और जो लोग इससे ग़ाफ़िल रहते हैं, वही असली नुक़सान उठाने वाले हैं।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें बताती है कि क़ुरआन सिर्फ़ पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि उस पर अमल करने के लिए है। जो लोग अल्लाह से डरते हैं, वे क़ुरआन को अपना रहनुमा बनाते हैं और उसकी रोशनी में अपनी ज़िंदगी गुज़ारते हैं। अगर हम चाहते हैं कि हमारी ज़िंदगी में बरकत हो, हमारे दिलों को सुकून मिले और हम आख़िरत में कामयाब हों, तो हमें क़ुरआन को पढ़ना चाहिए, समझना चाहिए और उस पर अमल करना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ़ ले जाता है और अल्लाह की रहमत का ज़रिया बनता है। अल्लाह हम सबको क़ुरआन पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 46-50 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 48
सूरा अल-हाक़्का आयत 48 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत हैसूरा आयत 48/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 46–50. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








