अल-हाक़्का · 49/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ ۝٤٩
Wa inna lana`lamu anna minkum mukazzibeen
📖 हिंदी अर्थ
और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग (इसके) झुठलाने वाले हैं

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَإِنَّا لَنَعْلَمُ: और हम निश्चित रूप से जानते हैं।
  • مِنكُم: तुममें से (हे लोगों)।
  • مُكَذِّبِينَ: झुठलाने वाले (जो इस क़ुरआन को झुठलाते हैं)।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में अपने पैग़म्बर ﷺ और सभी लोगों को बता रहे हैं कि हमें पूर्ण रूप से यह ज्ञान है कि तुममें से कुछ लोग ऐसे हैं जो इस क़ुरआन को झुठलाएँगे, इसकी आयतों के स्पष्ट और प्रत्यक्ष होते हुए भी इसे नहीं मानेंगे। यह कोई छिपी हुई बात नहीं है, बल्कि अल्लाह को हर उस चीज़ का इल्म है जो लोगों के दिलों में है और जो वे अपनी ज़ुबान से कहते हैं।

यह झुठलाना अपने आप में बड़ी नादानी और घाटे की चीज़ है, क्योंकि जब क़यामत का दिन आएगा और ये लोग अपनी आँखों से अपना अंजाम देखेंगे — जहाँ एक ओर ईमान लाने वालों को जन्नत की नेमतें मिलेंगी और दूसरी ओर इनकार करने वालों को अज़ाब का सामना करना पड़ेगा — तो उस वक़्त उन्हें अपने इस इनकार पर बहुत पछतावा होगा, लेकिन पछतावा उस वक़्त किसी काम न आएगा।

यह क़ुरआन हक़ है, सच्चाई है और इसमें कोई शक नहीं। यह अल्लाह की तरफ़ से उतारा गया है और इसकी हर आयत सच्ची है। इसलिए हे लोगों! इस क़ुरआन को मानो, इस पर अमल करो और अपने रब की तारीफ़ और पाकी बयान करो — उसे हर उस चीज़ से पाक समझो जो उसके लिए उचित नहीं है, और उसके महान नाम का ज़िक्र करते रहो।

याद रखो, अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत उनके लिए है जो ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं। जो लोग झुठलाते हैं, उनका अंजाम बहुत बुरा है। अल्लाह हर चीज़ का हिसाब रखने वाला है और वह किसी के साथ ज़ुल्म नहीं करता। इसलिए अपनी ज़िन्दगी को इस क़ुरआन की रोशनी में ढालो, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हो सको।



📜 आयत 47-51 — सूरा अल-हाक़्का

47فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ
तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)
48وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है
49وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग (इसके) झुठलाने वाले हैं
50وَإِنَّهُ لَحَسْرَةٌ عَلَى الْكَافِرِينَ
और इसमें शक़ नहीं कि ये काफ़िरों की हसरत का बाएस है
51وَإِنَّهُ لَحَقُّ الْيَقِينِ
और इसमें शक़ नहीं कि ये यक़ीनन बरहक़ है
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
49आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 49

सूरा अल-हाक़्का आयत 49 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ…

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Wednesday, September 30, 2026

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