अल-हाक़्का · 47/52
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हाक़्का
فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ ۝٤٧
Famaa minkum min ahadin`anhu haajizeen
📖 हिंदी अर्थ
तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَاجِزِينَ: रोकने वाले, बचाने वाले, आड़ बनने वाले।

तफ़सीर:

यह आयत उस महान सत्य को बयान करती है कि अल्लाह तआला अपने रसूल ﷺ की हिफ़ाज़त का ज़िम्मा ख़ुद लिए हुए है। अगर नबी ﷺ अल्लाह पर कोई झूठी बात गढ़कर कहते, तो अल्लाह उनसे सख्त बदला लेता — उनका दाहिना हाथ पकड़ता और उनकी गर्दन की रग काट देता। लेकिन चूँकि वे सच्चे और अमानतदार थे, अल्लाह ने उन्हें हर आफ़त से महफ़ूज़ रखा।

इस आयत का मतलब यह है कि अगर अल्लाह अपने नबी ﷺ को सज़ा देना चाहे, तो पूरी दुनिया की ताकतें मिलकर भी उन्हें नहीं बचा सकतीं। न कोई इंसान, न कोई जिन्न, न कोई फरिश्ता — कोई भी अल्लाह के फैसले के आगे आड़ नहीं बन सकता। यह बात क़ुरैश के उन लोगों के लिए चेतावनी है जो नबी ﷺ को रोकना या नुकसान पहुँचाना चाहते थे।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त सबसे बड़ी हिफ़ाज़त है। जिसे अल्लाह बचाए, उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता। नबी ﷺ की सच्चाई का सबूत यह है कि दुश्मनों की हर साज़िश के बावजूद अल्लाह ने उन्हें हर मुश्किल से बचाया। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में इस्लाम फैला और क़ुरैश के मुखालिफ़िन का नामो-निशान मिट गया।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम सच्चाई पर हों और अल्लाह की राह में हों, तो अल्लाह खुद हमारी हिफ़ाज़त करता है। कोई ताकत हमें नुकसान नहीं पहुँचा सकती जब तक अल्लाह की मर्ज़ी न हो। यह ईमान की ताकत है जो मुसलमान को बहादुर और निडर बनाती है।

यह क़ुरआन उन लोगों के लिए नसीहत है जो अल्लाह से डरते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं। जो अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं, उनके लिए इस किताब में हिदायत और रहमत है।



📜 आयत 45-49 — सूरा अल-हाक़्का

45لَأَخَذْنَا مِنْهُ بِالْيَمِينِ
तो हम उनका दाहिना हाथ पकड़ लेते
46ثُمَّ لَقَطَعْنَا مِنْهُ الْوَتِينَ
फिर हम ज़रूर उनकी गर्दन उड़ा देते
47فَمَا مِنكُم مِّنْ أَحَدٍ عَنْهُ حَاجِزِينَ
तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)
48وَإِنَّهُ لَتَذْكِرَةٌ لِّلْمُتَّقِينَ
ये तो परहेज़गारों के लिए नसीहत है
49وَإِنَّا لَنَعْلَمُ أَنَّ مِنكُم مُّكَذِّبِينَ
और हम ख़ूब जानते हैं कि तुम में से कुछ लोग (इसके) झुठलाने वाले हैं
अल-हाक़्काकुरान सूची
52आयत
मक्कीअवतरण स्थान
47आयत

अनुवाद — अल-हाक़्का 47

सूरा अल-हाक़्का आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)

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Wednesday, September 30, 2026

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