अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَاجِزِينَ: रोकने वाले, बचाने वाले, आड़ बनने वाले।
तफ़सीर:
यह आयत उस महान सत्य को बयान करती है कि अल्लाह तआला अपने रसूल ﷺ की हिफ़ाज़त का ज़िम्मा ख़ुद लिए हुए है। अगर नबी ﷺ अल्लाह पर कोई झूठी बात गढ़कर कहते, तो अल्लाह उनसे सख्त बदला लेता — उनका दाहिना हाथ पकड़ता और उनकी गर्दन की रग काट देता। लेकिन चूँकि वे सच्चे और अमानतदार थे, अल्लाह ने उन्हें हर आफ़त से महफ़ूज़ रखा।
इस आयत का मतलब यह है कि अगर अल्लाह अपने नबी ﷺ को सज़ा देना चाहे, तो पूरी दुनिया की ताकतें मिलकर भी उन्हें नहीं बचा सकतीं। न कोई इंसान, न कोई जिन्न, न कोई फरिश्ता — कोई भी अल्लाह के फैसले के आगे आड़ नहीं बन सकता। यह बात क़ुरैश के उन लोगों के लिए चेतावनी है जो नबी ﷺ को रोकना या नुकसान पहुँचाना चाहते थे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की हिफ़ाज़त सबसे बड़ी हिफ़ाज़त है। जिसे अल्लाह बचाए, उसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा सकता। नबी ﷺ की सच्चाई का सबूत यह है कि दुश्मनों की हर साज़िश के बावजूद अल्लाह ने उन्हें हर मुश्किल से बचाया। यही वजह है कि आज पूरी दुनिया में इस्लाम फैला और क़ुरैश के मुखालिफ़िन का नामो-निशान मिट गया।
इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि हमें भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए। जब हम सच्चाई पर हों और अल्लाह की राह में हों, तो अल्लाह खुद हमारी हिफ़ाज़त करता है। कोई ताकत हमें नुकसान नहीं पहुँचा सकती जब तक अल्लाह की मर्ज़ी न हो। यह ईमान की ताकत है जो मुसलमान को बहादुर और निडर बनाती है।
यह क़ुरआन उन लोगों के लिए नसीहत है जो अल्लाह से डरते हैं और उसके हुक्मों पर चलते हैं। जो अल्लाह की इबादत करते हैं और उसकी नाफ़रमानी से बचते हैं, उनके लिए इस किताब में हिदायत और रहमत है।
📜 आयत 45-49 — अल-हाक़्का
अनुवाद — अल-हाक़्का 47
सूरा अल-हाक़्का आयत 47 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो तुममें से कोई उनसे (मुझे रोक न सकता)सूरा आयत 47/52 — अल-हाक़्का الحاقة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हाक़्का सुनें, अल-हाक़्का अनुवाद, अल-हाक़्का mp3, अल-हाक़्का pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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