अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحَسَنَةُ: खुशहाली, समृद्धि, अच्छे दिन, फसलों की अच्छी पैदावार।
- السَّيِّئَةُ: बुराई, मुसीबत, कष्ट, अकाल, महंगाई।
- يَطَّيَّرُوا: वे अपशकुन मानते थे, बदशगूनी करते थे।
- طَائِرُهُمْ: उनका भाग्य, उन पर आने वाली विपत्ति या अच्छाई।
तफसीर (व्याख्या):
जब फ़िरऔन और उसकी क़ौम के पास खुशहाली आती—जैसे अच्छी फ़सल, खाने-पीने की प्रचुरता और समृद्धि—तो वे कहते: "यह तो हमारा हक़ है, हम इसके लायक़ हैं।" वे इसे अपनी योग्यता और क़ाबिलियत का नतीजा समझते थे, और अल्लाह का शुक्र अदा नहीं करते थे। लेकिन जब उन पर कोई मुसीबत आती—जैसे अकाल, महंगाई, बीमारियाँ या अन्य आपदाएँ—तो वे मूसा (अलैहिस्सलाम) और उनके साथियों (बनी इसराईल) को अपशकुन मानते और कहते: "यह सब इसलिए हुआ क्योंकि मूसा और उसके साथी हमारे बीच आ गए।"
अल्लाह तआला इनकी इस ग़लत सोच का खंडन करते हुए फ़रमाता है: "सुन लो! उनकी बदनसीबी और जो कुछ भी उन पर आता है, वह अल्लाह ही की ओर से है।" यानी हर अच्छाई और बुराई अल्लाह के फ़ैसले और उसकी क़ुदरत से होती है। यह मूसा (अलैहिस्सलाम) की वजह से नहीं आती, बल्कि उनके अपने कुफ़्र, नाफ़रमानी और गुनाहों की सज़ा है। लेकिन फ़िरऔन की क़ौम के अक्सर लोग इस हक़ीक़त को नहीं जानते, क्योंकि वे जहालत और गुमराही में डूबे हुए थे।
फ़ायदे (सबक़):
- हर हाल में अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए—जब हमें खुशहाली मिले तो उसे अपनी क़ाबिलियत का नतीजा न समझें, बल्कि अल्लाह का एहसान जानें और शुक्र अदा करें।
- मुसीबत में सब्र और अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए—किसी इंसान या चीज़ को अपशकुन मानना जहालत है। मुसीबतें अल्लाह की तरफ़ से आती हैं, और उनमें इंसान के लिए परीक्षा और पाकीज़गी होती है।
- अपनी ग़लतियों पर नज़र रखनी चाहिए—जब हम पर कोई मुसीबत आए तो पहले अपने आचरण और गुनाहों की जाँच करें, दूसरों पर इल्ज़ाम लगाने के बजाय।
- अल्लाह का इल्म और हिकमत हर चीज़ पर हावी है—इंसान की समझ नाक़िस है, इसलिए उसे अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए और उसकी रहमत से उम्मीद नहीं खोनी चाहिए।
- यह ईमान की निशानी है कि इंसान हर हाल में अल्लाह को याद रखे—खुशहाली में शुक्रगुज़ार और मुसीबत में सब्र करने वाला इंसान अल्लाह के करीब होता है और उसकी मदद उसके साथ होती है।
📜 आयत 129-133 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 131
सूरा अल-आराफ आयत 131 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो जब उन्हें कोई राहत मिलती तो कहने लगते कि…सूरा आयत 131/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 129–133. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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