अल-आराफ · 166/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
فَلَمَّا عَتَوْا عَن مَّا نُهُوا عَنْهُ قُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ ۝١٦٦
Falammaa `ataw `ammmaa nuhoo `anhu qulna lahum kkoonoo qiradatan khaasi`een
📖 हिंदी अर्थ
फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَتَوْا: सरकशी और ज़्यादती करना, हद से बढ़ जाना।
  • خَاسِئِينَ: अपमानित, रुसवा, हर भलाई से दूर किए गए।

तफ़सीर:

जब उन्होंने उस निषेध के मुक़ाबले में सरकशी और ज़्यादती की, जिससे उन्हें रोका गया था—यानी शनिवार के दिन मछली पकड़ने से—और वे अपनी हठधर्मी और अकड़ में न तो नसीहत मानी और न ही अल्लाह के हुक्म के आगे झुके, तो अल्लाह ने उन्हें सज़ा देते हुए कहा: "बंदर बन जाओ, अपमानित और हर भलाई से दूर किए हुए।" यह अल्लाह का फ़रमान था, और वे वैसे ही हो गए। यह उनके लिए एक ऐसी सज़ा थी जो उनके किए की मुनासिब थी—जिन्होंने अल्लाह के हुक्म को तोड़ा और उसकी निशानियों का मज़ाक उड़ाया, उन्हें जानवरों की शक्ल दे दी गई। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक नमूना है कि जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस कहता है "हो जा" और वह हो जाती है।

फ़ायदे:

  • अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके हुक्मों से सरकशी करना इंसान को इंसानियत से गिरा सकता है और उसे सबसे बुरी हालत तक पहुँचा सकता है।
  • अल्लाह की सज़ा उसके बंदों पर उनके कर्मों के अनुसार आती है; जो हद से बढ़ते हैं, उन्हें उसी के अनुरूप अपमानित किया जाता है।
  • अल्लाह की क़ुदरत असीम है—वह जब चाहता है, किसी को भी किसी भी हालत में बदल सकता है, इसलिए उसके हुक्म से आगे बढ़ना बड़ी नादानी है।
  • यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के निषेधों का सम्मान करना और उनसे बचना ही इंसान की इज़्ज़त और कामयाबी की जड़ है।


📜 आयत 164-168 — अल-आराफ

164وَإِذْ قَالَتْ أُمَّةٌ مِّنْهُمْ لِمَ تَعِظُونَ قَوْمًا ۙ اللَّهُ مُهْلِكُهُمْ أَوْ مُعَذِّبُهُمْ عَذَابًا شَدِيدًا ۖ قَالُوا مَعْذِرَةً إِلَىٰ رَبِّكُمْ وَلَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ
और जब उनमें से एक जमाअत ने (उन लोगों में से जो शुम्बे के दिन शिकार को मना करते थे) कहा कि जिन्हें ख़ुदा हलाक़ करना या सख्त अज़ाब में मुब्तिला करना चाहता है उन्हें (बेफायदे) क्यो नसीहत करते हो तो वह कहने लगे कि फक़त तुम्हारे परवरदिगार में (अपने को) इल्ज़ाम से बचाने के लिए यायद इसलिए कि ये लोग परहेज़गारी एख्तियार करें
165فَلَمَّا نَسُوا مَا ذُكِّرُوا بِهِ أَنجَيْنَا الَّذِينَ يَنْهَوْنَ عَنِ السُّوءِ وَأَخَذْنَا الَّذِينَ ظَلَمُوا بِعَذَابٍ بَئِيسٍ بِمَا كَانُوا يَفْسُقُونَ
फिर जब वह लोग जिस चीज़ की उन्हें नसीहत की गई थी उसे भूल गए तो हमने उनको तो तजावीज़ (नजात) दे दी जो बुरे काम से लोगों को रोकते थे और जो लोग ज़ालिम थे उनको उनकी बद चलनी की वजह से बड़े अज़ाब में गिरफ्तार किया
166فَلَمَّا عَتَوْا عَن مَّا نُهُوا عَنْهُ قُلْنَا لَهُمْ كُونُوا قِرَدَةً خَاسِئِينَ
फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)
167وَإِذْ تَأَذَّنَ رَبُّكَ لَيَبْعَثَنَّ عَلَيْهِمْ إِلَىٰ يَوْمِ الْقِيَامَةِ مَن يَسُومُهُمْ سُوءَ الْعَذَابِ ۗ إِنَّ رَبَّكَ لَسَرِيعُ الْعِقَابِ ۖ وَإِنَّهُ لَغَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने पुकार पुकार के (बनी ईसराइल से कह दिया था कि वह क़यामत तक उन पर ऐसे हाक़िम को मुसल्लत देखेगा जो उन्हें बुरी बुरी तकलीफें देता रहे क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बहुत जल्द अज़ाब करने वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि वह बड़ा बख्शने वाला (मेहरबान) भी है
168وَقَطَّعْنَاهُمْ فِي الْأَرْضِ أُمَمًا ۖ مِّنْهُمُ الصَّالِحُونَ وَمِنْهُمْ دُونَ ذَٰلِكَ ۖ وَبَلَوْنَاهُم بِالْحَسَنَاتِ وَالسَّيِّئَاتِ لَعَلَّهُمْ يَرْجِعُونَ
और हमने उनको रूए ज़मीन में गिरोह गिरोह तितिर बितिर कर दिया उनमें के कुछ लोग तो नेक हैं और कुछ लोग और तरह के (बदकार) हैं और हमने उन्हें सुख और दुख (दोनो तरह) से आज़माया ताकि वह (शरारत से) बाज़ आए
अल-आराफकुरान सूची
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मक्कीRevelation
166आयत

अनुवाद — अल-आराफ 166

सूरा अल-आराफ आयत 166 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी…

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Tuesday, August 18, 2026

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