फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)
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غرض جن اعمال (بد) سے ان کو منع کیا گیا تھا جب وہ ان (پراصرار اور ہمارے حکم سے) گردن کشی کرنے لگے تو ہم نے ان کو حکم دیا کہ ذلیل بندر ہوجاؤ
خَاسِئِينَ: अपमानित, रुसवा, हर भलाई से दूर किए गए।
तफ़सीर:
जब उन्होंने उस निषेध के मुक़ाबले में सरकशी और ज़्यादती की, जिससे उन्हें रोका गया था—यानी शनिवार के दिन मछली पकड़ने से—और वे अपनी हठधर्मी और अकड़ में न तो नसीहत मानी और न ही अल्लाह के हुक्म के आगे झुके, तो अल्लाह ने उन्हें सज़ा देते हुए कहा: "बंदर बन जाओ, अपमानित और हर भलाई से दूर किए हुए।" यह अल्लाह का फ़रमान था, और वे वैसे ही हो गए। यह उनके लिए एक ऐसी सज़ा थी जो उनके किए की मुनासिब थी—जिन्होंने अल्लाह के हुक्म को तोड़ा और उसकी निशानियों का मज़ाक उड़ाया, उन्हें जानवरों की शक्ल दे दी गई। यह अल्लाह की क़ुदरत का एक नमूना है कि जब वह किसी चीज़ का इरादा करता है, तो बस कहता है "हो जा" और वह हो जाती है।
फ़ायदे:
अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके हुक्मों से सरकशी करना इंसान को इंसानियत से गिरा सकता है और उसे सबसे बुरी हालत तक पहुँचा सकता है।
अल्लाह की सज़ा उसके बंदों पर उनके कर्मों के अनुसार आती है; जो हद से बढ़ते हैं, उन्हें उसी के अनुरूप अपमानित किया जाता है।
अल्लाह की क़ुदरत असीम है—वह जब चाहता है, किसी को भी किसी भी हालत में बदल सकता है, इसलिए उसके हुक्म से आगे बढ़ना बड़ी नादानी है।
यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि अल्लाह के निषेधों का सम्मान करना और उनसे बचना ही इंसान की इज़्ज़त और कामयाबी की जड़ है।
फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)
और जब उनमें से एक जमाअत ने (उन लोगों में से जो शुम्बे के दिन शिकार को मना करते थे) कहा कि जिन्हें ख़ुदा हलाक़ करना या सख्त अज़ाब में मुब्तिला करना चाहता है उन्हें (बेफायदे) क्यो नसीहत करते हो तो वह कहने लगे कि फक़त तुम्हारे परवरदिगार में (अपने को) इल्ज़ाम से बचाने के लिए यायद इसलिए कि ये लोग परहेज़गारी एख्तियार करें
फिर जब वह लोग जिस चीज़ की उन्हें नसीहत की गई थी उसे भूल गए तो हमने उनको तो तजावीज़ (नजात) दे दी जो बुरे काम से लोगों को रोकते थे और जो लोग ज़ालिम थे उनको उनकी बद चलनी की वजह से बड़े अज़ाब में गिरफ्तार किया
फिर जिस बात की उन्हें मुमानिअत (रोक) की गई थी जब उन लोगों ने उसमें सरकशी की तो हमने हुक्म दिया कि तुम ज़लील और ख़्वार (धुत्कारे) हुए बन्दर बन जाओ (और वह बन गए)
(ऐ रसूल वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने पुकार पुकार के (बनी ईसराइल से कह दिया था कि वह क़यामत तक उन पर ऐसे हाक़िम को मुसल्लत देखेगा जो उन्हें बुरी बुरी तकलीफें देता रहे क्योंकि) इसमें तो शक़ ही नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बहुत जल्द अज़ाब करने वाला है और इसमें भी शक़ नहीं कि वह बड़ा बख्शने वाला (मेहरबान) भी है
और हमने उनको रूए ज़मीन में गिरोह गिरोह तितिर बितिर कर दिया उनमें के कुछ लोग तो नेक हैं और कुछ लोग और तरह के (बदकार) हैं और हमने उन्हें सुख और दुख (दोनो तरह) से आज़माया ताकि वह (शरारत से) बाज़ आए
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