Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- تَأَذَّنَ: अर्थात अल्लाह ने स्पष्ट रूप से घोषणा कर दी और अपना फैसला सुना दिया।
- لَيَبْعَثَنَّ: अवश्य भेजेगा (अर्थात निश्चित रूप से उठाएगा और नियुक्त करेगा)।
- يَسُومُهُمْ: उन्हें चखाएगा, उन पर लादेगा, उन्हें झेलने पर मजबूर करेगा।
- سُوءَ الْعَذَابِ: बुरा और कठोर अज़ाब, जिसमें अपमान, ज़िल्लत और सख्त सज़ा शामिल हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! उस समय को याद करो जब अल्लाह ने स्पष्ट और दो टूक फैसला सुना दिया कि वह यहूदियों पर क़ियामत के दिन तक ऐसे लोगों को मुसल्लत करेगा जो उन्हें बुरा अज़ाब चखाएंगे और उन्हें अपमानित करेंगे। यह उनके अत्याचार, बग़ावत और अल्लाह की नाफ़रमानी का नतीजा था। इतिहास गवाह है कि हज़रत सुलेमान (अलैहिस्सलाम) के बाद अल्लाह ने बुख़्तनस्सर को उन पर भेजा, जिसने उनके घर तबाह किए, उन्हें क़त्ल किया, उनकी औरतों और बच्चों को क़ैद किया और बचे हुए लोगों पर जज़िया (टैक्स) लाद दिया। यह सिलसिला जारी रहा और क़ियामत तक उन पर ज़िल्लत और रुसवाई रहेगी।
ऐ नबी! तेरा रब सज़ा देने में बहुत तेज़ है — जो उसकी नाफ़रमानी करता है और उसके हुक्म से सरकशी करता है, उसे वह दुनिया में ही पकड़ लेता है और उसे अपने किए की सज़ा चखाता है। लेकिन साथ ही वह बड़ा क्षमा करने वाला और अत्यंत दयालु भी है — जो कोई अपनी ग़लती पर पशेमान होकर उसकी तरफ़ लौटता है, तौबा करता है और ईमान लाता है, अल्लाह उसके गुनाह माफ कर देता है और उस पर रहम फरमाता है।
दावती पहलू (आमंत्रण का पहलू):
इस आयत में अल्लाह की दो सिफ़तें (विशेषताएँ) बड़ी खूबसूरती से बयान हुई हैं — सज़ा में तेज़ी और माफ़ी में रहमत। यह हमारे लिए एक बड़ी नसीहत है कि अल्लाह से डरें और उसकी नाफ़रमानी से बचें, क्योंकि उसकी पकड़ बहुत सख्त है। लेकिन साथ ही यह खुशखबरी भी है कि अल्लाह का दरवाज़ा तौबा करने वालों के लिए हमेशा खुला है। चाहे गुनाह कितने ही बड़े हों, अगर दिल सच्चा हो और तौबा ख़ालिस हो, तो अल्लाह माफ करने वाला है। यही इस्लाम की खूबसूरती है — वह न तो इंसान को गुनाह पर उकसाता है और न ही उसे मायूसी में छोड़ता है। वह रहमत और इंसाफ़ का पूरा संतुलन रखता है। आओ, हम अपने रब की रहमत की तरफ़ लौटें, उसकी नाफ़रमानी से बचें और उसके दीन को अपनी ज़िंदगी में अपनाएँ, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी हासिल कर सकें।
📜 आयत 165-169 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 167
सूरा अल-आराफ आयत 167 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल वह वक्त याद दिलाओ) जब तुम्हारे परवरदिगार ने…सूरा आयत 167/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 165–169. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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