अल-आराफ · 180/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ ۝١٨٠
Wa lillaahil Asmaaa `ul Husnaa fad`oohu bihaa wa zarul lazeena yulhidoona feee Asmaaa`ih; sa yujzawna maa kaanoo ya`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लोग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाएं पाएंगें
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ: सबसे सुंदर नाम, जो अल्लाह की पूर्णता और महानता को दर्शाते हैं।
  • فَادْعُوهُ بِهَا: उन्हीं नामों के माध्यम से अल्लाह से प्रार्थना करो और उसे पुकारो।
  • يُلْحِدُونَ: जो लोग अल्लाह के नामों में कुटिलता अपनाते हैं, उन्हें बदलते हैं, उनका अर्थ विकृत करते हैं, या उन्हें अल्लाह के अलावा किसी और के लिए प्रयोग करते हैं।
  • سَيُجْزَوْنَ: उन्हें बदला दिया जाएगा।

व्याख्या:

अल्लाह तआला के नाम सबसे सुंदर और सर्वोच्च हैं। उसके हर नाम से उसकी महानता, पवित्रता और पूर्णता झलकती है। उसने अपने इन्हीं नामों को अपने बंदों के लिए प्रकट किया है ताकि वे उसे इन्हीं नामों से पुकारें, उससे प्रार्थना करें और उसकी स्तुति करें। जब भी कोई बंदा अल्लाह से कुछ माँगे, तो उसे उसके उपयुक्त नाम के माध्यम से माँगना चाहिए — जैसे रहमान और रहीम के नाम से दया की प्रार्थना करे, रज़्ज़ाक़ के नाम से रोज़ी माँगे, ग़फ़ूर के नाम से क्षमा माँगे। इसी तरह, अल्लाह के नामों का सही अर्थ और उद्देश्य यह है कि उन्हें केवल अल्लाह ही के लिए विशेष रखा जाए।

इसके बाद अल्लाह तआला ने उन लोगों से बचने का आदेश दिया है जो उसके नामों में कुटिलता और विकृति लाते हैं। यह कुटिलता कई रूपों में हो सकती है: कुछ लोग अल्लाह के नामों को बदल देते हैं, कुछ उनका अर्थ विकृत कर देते हैं, कुछ उन्हें झुठलाते हैं, और कुछ मुशरिकों की तरह अपने झूठे देवताओं को अल्लाह के नामों से पुकारते हैं। ये सब कुटिलता और गुमराही है। अल्लाह तआला ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लोगों को उनके कर्मों का पूरा बदला अवश्य मिलेगा — चाहे वह दुनिया में हो या आख़िरत में। यह अल्लाह का न्याय है कि वह किसी के अच्छे या बुरे कर्म को बेइंसाफी से नहीं छोड़ता।

शिक्षाएँ और लाभ:

  1. अल्लाह के नामों का सही अर्थ समझना और उन्हें अपनी प्रार्थनाओं में इस्तेमाल करना ईमान की निशानी है। यह बंदे को अल्लाह के करीब लाता है और उसकी प्रार्थनाओं को स्वीकार किए जाने का माध्यम बनता है।
  2. अल्लाह के नामों की पवित्रता की रक्षा करना हर मुसलमान का कर्तव्य है। किसी भी नाम को विकृत करना, उसका गलत अर्थ निकालना, या उसे किसी और के लिए प्रयोग करना गंभीर पाप है।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि बुराई और कुटिलता करने वालों से दूर रहना चाहिए और उनके साथ जुड़ने से बचना चाहिए, क्योंकि उनका अंजाम बुरा है।
  4. अल्लाह का न्याय अटल है — हर व्यक्ति को उसके कर्मों का फल मिलकर रहेगा। यह विश्वास बंदे को नेक काम करने की प्रेरणा देता है और गलत रास्तों से दूर रखता है।
  5. अल्लाह के सुंदर नामों को याद करना और उनके अर्थों पर चिंतन करना दिल को सुकून देता है, ईमान को मजबूत करता है और बंदे को अल्लाह की महानता का एहसास कराता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 178-182 — अल-आराफ

178مَن يَهْدِ اللَّهُ فَهُوَ الْمُهْتَدِي ۖ وَمَن يُضْلِلْ فَأُولَٰئِكَ هُمُ الْخَاسِرُونَ
राह पर बस वही शख़्श है जिसकी ख़ुदा हिदायत करे और जिनको गुमराही में छोड़ दे तो वही लोग घाटे में हैं
179وَلَقَدْ ذَرَأْنَا لِجَهَنَّمَ كَثِيرًا مِّنَ الْجِنِّ وَالْإِنسِ ۖ لَهُمْ قُلُوبٌ لَّا يَفْقَهُونَ بِهَا وَلَهُمْ أَعْيُنٌ لَّا يُبْصِرُونَ بِهَا وَلَهُمْ آذَانٌ لَّا يَسْمَعُونَ بِهَا ۚ أُولَٰئِكَ كَالْأَنْعَامِ بَلْ هُمْ أَضَلُّ ۚ أُولَٰئِكَ هُمُ الْغَافِلُونَ
और गोया हमने (ख़ुदा) बहुतेरे जिन्नात और आदमियों को जहन्नुम के वास्ते पैदा किया और उनके दिल तो हैं (मगर कसदन) उन से देखते ही नहीं और उनके कान भी है (मगर) उनसे सुनने का काम ही नहीं लेते (खुलासा) ये लोग गोया जानवर हैं बल्कि उनसे भी कहीं गए गुज़रे हुए यही लोग (अमूर हक़) से बिल्कुल बेख़बर हैं
180وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लोग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाएं पाएंगें
181وَمِمَّنْ خَلَقْنَا أُمَّةٌ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِهِ يَعْدِلُونَ
और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं
182وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएंगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी
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अनुवाद — अल-आराफ 180

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सूरा आयत 180/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 178–182. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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