अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أُمَّةٌ: एक समुदाय या समूह।
- يَهْدُونَ: वे मार्गदर्शन करते हैं।
- بِالْحَقِّ: सत्य के साथ, सत्य के आधार पर।
- يَعْدِلُونَ: वे न्याय करते हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में बताते हैं कि उसने जो लोग पैदा किए हैं, उनमें से एक ऐसा समुदाय भी है जो सत्य को अपनाता है, सत्य के अनुसार चलता है और दूसरों को भी सत्य की ओर बुलाता है। ये लोग अपने जीवन में हर मामले में सत्य का साथ देते हैं और उसी के अनुसार निर्णय लेते हैं। वे न केवल स्वयं सत्य पर स्थिर रहते हैं, बल्कि दूसरों को भी सत्य का रास्ता दिखाते हैं। जब वे किसी के बीच फैसला करते हैं, तो पूरी तरह न्याय करते हैं, किसी पर ज़ुल्म नहीं करते और न ही किसी का हक़ मारते हैं। यह समुदाय वह है जिसे अल्लाह ने ईमान और अच्छे कर्मों का तौफ़ीक़ दिया है, और ये लोग हिदायत के इमाम और न्याय के प्रतीक होते हैं। ये वे लोग हैं जो अल्लाह के दीन को समझते हैं, उस पर अमल करते हैं और उसे दूसरों तक पहुँचाते हैं। इनकी पहचान यह है कि ये हर मामले में सच्चाई और इंसाफ़ को ही अपना मार्ग बनाते हैं।
फ़ायदे (उपदेश):
- इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह की पैदा की हुई मख़लूक़ात में हमेशा एक ऐसा समुदाय मौजूद रहता है जो सत्य पर क़ायम रहता है और न्याय करता है। यह उम्मत के लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है कि हक़ और इंसाफ़ की यह परंपरा कभी ख़त्म नहीं होती।
- यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चा मुसलमान वही है जो सत्य को अपना इमाम बनाए, उसी के अनुसार चले और उसी के अनुसार दूसरों के बीच फैसला करे।
- इससे यह भी पता चलता है कि इस्लाम में न्याय और इंसाफ़ की कितनी अहमियत है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह हर मामले में — चाहे वह घर का हो, समाज का हो या किसी मुक़दमे का — पूरी तरह न्याय करे और किसी के साथ नाइंसाफ़ी न करे।
- यह आयत उन लोगों के लिए एक प्रोत्साहन है जो सत्य और न्याय पर क़ायम रहते हैं, कि उनका यह काम अल्लाह को बहुत पसंद है और वे उसकी नज़र में बहुत ऊँचे दर्जे पर हैं।
- इससे यह भी समझ आता है कि सिर्फ़ अपनी निजी हिदायत काफ़ी नहीं है, बल्कि दूसरों को भी सत्य की ओर बुलाना और उनके बीच न्याय करना भी इसी समुदाय की पहचान है। यानी एक अच्छा मुसलमान वही है जो दूसरों के लिए भी रहनुमा बने।
📜 आयत 179-183 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 181
सूरा अल-आराफ आयत 181 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो…सूरा आयत 181/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 179–183. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








