अल-आराफ · 182/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ ۝١٨٢
Wallazeena kazzaboo bi Aayaatinaa sanastadrijuhum min haisu laa ya`lamoon
📖 हिंदी अर्थ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएंगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • كَذَّبُوا: झुठलाया, अस्वीकार किया
  • آيَاتِنَا: हमारी निशानियाँ (आयतें, प्रमाण)
  • سَنَسْتَدْرِجُهُم: हम उन्हें धीरे-धीरे (आहिस्ता-आहिस्ता) पकड़ेंगे, उन्हें बढ़ने देंगे और फिर अचानक पकड़ लेंगे
  • مِنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ: ऐसी जगह/तरीके से जिसका उन्हें एहसास भी न हो

तफसीर (व्याख्या):

जिन लोगों ने हमारी आयतों और निशानियों को झुठलाया और उन्हें अस्वीकार कर दिया, और उनसे शिक्षा नहीं ली, उनके बारे में अल्लाह तआला का फरमान है कि हम उन्हें धीरे-धीरे उनके अंजाम की तरफ ले जा रहे हैं। हम उन्हें दुनिया में खूब सुख-सुविधाएँ, रिज़्क़ और तरक्की देते हैं, लेकिन यह उनके लिए सम्मान या इज़्ज़त नहीं है, बल्कि यह एक चालाकी भरा तरीका है। हम उन्हें मौका देते हैं कि वे अपनी गलतियों में और आगे बढ़ें, अपने कुकर्मों में मग्न रहें और यह समझें कि वे सही रास्ते पर हैं। जब वे इसी ग़फ़लत और घमंड में होंगे, तब अचानक हम उन्हें पकड़ लेंगे — इस तरह कि उन्हें इसका ज़रा भी अंदाज़ा न होगा। यह अल्लाह की ओर से उन लोगों के लिए एक सज़ा है जिन्होंने उसकी निशानियों को झुठलाया और उनसे मुँह मोड़ा। यह उन्हें धीरे-धीरे विनाश की ओर ले जाना है, जैसे कोई व्यक्ति सीढ़ियों से एक-एक कदम ऊपर चढ़ता है और फिर अचानक नीचे गिर जाता है।

फ़ायदे (सबक):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया में मिलने वाली नेमतें और सुख-सुविधाएँ हमेशा अल्लाह की रज़ामंदी की निशानी नहीं होतीं। कभी-कभी यह इस्तिदराज (धीरे-धीरे पकड़) का ज़रिया होती हैं।
  2. इंसान को चाहिए कि वह अपनी सफलता और आराम पर घमंड न करे, बल्कि हमेशा अल्लाह से डरता रहे और अपने आख़िरत (परलोक) को याद रखे।
  3. अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, और वह इंसान को उस वक़्त पकड़ता है जब उसे इसका एहसास भी नहीं होता। इसलिए हमें हर वक़्त सावधान रहना चाहिए और अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए।
  4. यह आयत हमें बताती है कि कुरआन की आयतों को झुठलाना और उनसे मुँह मोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है, जिसकी सज़ा अल्लाह ज़रूर देगा — चाहे वह देर से ही क्यों न हो।
  5. मोमिन (ईमानवाले) को चाहिए कि वह अल्लाह की निशानियों पर ग़ौर करे और उनसे सबक ले, ताकि वह उन लोगों की तरह न हो जाए जो दुनिया के धोखे में आकर आख़िरत को भूल गए।
🎧 सुनें

📜 आयत 180-184 — अल-आराफ

180وَلِلَّهِ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ فَادْعُوهُ بِهَا ۖ وَذَرُوا الَّذِينَ يُلْحِدُونَ فِي أَسْمَائِهِ ۚ سَيُجْزَوْنَ مَا كَانُوا يَعْمَلُونَ
और अच्छे (अच्छे) नाम ख़ुदा ही के ख़ास हैं तो उसे उन्हीं नामों में पुकारो और जो लोग उसके नामों में कुफ्र करते हैं उन्हें (उनके हाल पर) छोड़ दो और वह बहुत जल्द अपने करतूत की सज़ाएं पाएंगें
181وَمِمَّنْ خَلَقْنَا أُمَّةٌ يَهْدُونَ بِالْحَقِّ وَبِهِ يَعْدِلُونَ
और हमारी मख़लूक़ात से कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दीने हक़ की हिदायत करते हैं और हक़ से इन्साफ़ भी करते हैं
182وَالَّذِينَ كَذَّبُوا بِآيَاتِنَا سَنَسْتَدْرِجُهُم مِّنْ حَيْثُ لَا يَعْلَمُونَ
और जिन लोगों ने हमारी आयतों को झुठलाया हम उन्हें बहुत जल्द इस तरह आहिस्ता आहिस्ता (जहन्नुम में) ले जाएंगें कि उन्हें ख़बर भी न होगी
183وَأُمْلِي لَهُمْ ۚ إِنَّ كَيْدِي مَتِينٌ
और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूंगा बेशक मेरी तद्बीर (पुख्ता और) मज़बूत है
184أَوَلَمْ يَتَفَكَّرُوا ۗ مَا بِصَاحِبِهِم مِّن جِنَّةٍ ۚ إِنْ هُوَ إِلَّا نَذِيرٌ مُّبِينٌ
क्या उन लोगों ने इतना भी ख्याल न किया कि आख़िर उनके रफीक़ (मोहम्मद ) को कुछ जुनून तो नहीं वह तो बस खुल्लम खुल्ला (अज़ाबे ख़ुदा से) डराने वाले हैं
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अनुवाद — अल-आराफ 182

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Tuesday, August 18, 2026

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