Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- وَأُمْلِي لَهُمْ: मैं उन्हें मोहलत देता हूँ, अर्थात उनकी सज़ा को टालता हूँ।
- كَيْدِي: मेरी योजना, मेरी पकड़, मेरा दाँव।
- مَتِينٌ: अत्यंत मज़बूत, दृढ़ और अटूट।
व्याख्या:
इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के बारे में बता रहे हैं जिन्होंने उसकी आयतों को झुठलाया और नबी की दावत को नकार दिया। अल्लाह फ़रमाता है कि जब ये लोग अपनी सरकशी और इनकार पर अड़े रहे, तो मैंने उन्हें तुरंत पकड़ना मुनासिब नहीं समझा, बल्कि उन्हें लंबी मोहलत दे दी। मैं उनकी सज़ा को टालता रहता हूँ, ताकि वे यह समझें कि उन्हें कोई सज़ा नहीं मिलेगी और वे अपने कुफ़्र और सरकशी में और बढ़ते चले जाएँ। यह मोहलत उनके लिए रहमत नहीं, बल्कि एक चालाकी भरी मोहलत है, जिससे उनका अज़ाब और दोगुना हो जाएगा।
अल्लाह फ़रमाता है: "मेरी चाल अत्यंत मज़बूत है।" यानी जब मैं उन्हें पकड़ूँगा, तो उनकी कोई ताक़त, कोई हथियार, कोई चालाकी उन्हें बचा नहीं सकेगी। मेरी पकड़ ऐसी होगी जिसे कोई रोक नहीं सकता। बाहर से देखने में यह मोहलत उनके लिए भलाई लगती है, लेकिन असल में यह उनके लिए नुक़्सान का सामान है, क्योंकि हर गुनाह जो वे इस मोहलत में करते हैं, उनके अज़ाब में इज़ाफ़ा करता है।
फ़ायदे:
- अल्लाह की सज़ा में देरी उसकी रहमत की कमी नहीं है, बल्कि वह अपने बंदों को तौबा का मौक़ा देता है। जो इस मौक़े से फ़ायदा उठाए, वह कामयाब है।
- इंसान को कभी भी अल्लाह की मोहलत पर धोखा नहीं खाना चाहिए। जो लोग गुनाहों पर अड़े रहते हैं और समझते हैं कि हमें कुछ नहीं होगा, वे सबसे बड़े घाटे में हैं।
- अल्लाह की पकड़ बहुत मज़बूत है। उसकी पकड़ से बचने की कोई सूरत नहीं। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अल्लाह की नाफ़रमानी से बचे और उसकी रहमत का दामन थामे।
- यह आयत मुसलमानों को सब्र और दृढ़ता सिखाती है। जब वे देखें कि बातिल के लोग तरक़्क़ी कर रहे हैं और उन्हें कोई सज़ा नहीं मिल रही, तो वे निराश न हों, क्योंकि अल्लाह की योजना सबसे मज़बूत है और उसका फ़ैसला अटल है।
- अल्लाह की मोहलत को ग़नीमत समझकर तौबा और इस्लाह का रास्ता अपनाना चाहिए, क्योंकि मोहलत की आख़िरी घड़ी का पता किसी को नहीं।
📜 आयत 181-185 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 183
सूरा अल-आराफ आयत 183 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मैं उन्हें (दुनिया में) ढील दूंगा बेशक मेरी तद्बीर…सूरा आयत 183/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 181–185. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, September 30, 2026
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