Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- طَائِفٌ (ताइफ़): वह चीज़ जो किसी चीज़ के चारों ओर घूमती है, यहाँ अर्थ है शैतान की वसवसा (बुरा ख़याल) जो इंसान के दिल के इर्द-गिर्द घूमती है।
- مَسَّهُمْ (मस्सहुम): उन्हें छू लिया, अर्थात उन पर हावी हो गया या उन्हें पा लिया।
- تَذَكَّرُوا (तज़क्करू): वे याद कर लेते हैं, अल्लाह को और उसकी सज़ा और इनाम को।
- مُبْصِرُونَ (मुब्सिरून): देखने वाले, स्पष्ट रूप से समझने वाले, सत्य को पहचानने वाले।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत मुत्तक़ियों (अल्लाह से डरने वालों) की विशेषता बयान करती है। जो लोग अल्लाह से डरते हैं, उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं और उसकी मनाही से बचते हैं, जब उन्हें शैतान की ओर से कोई वसवसा (बुरा ख़याल) छू जाता है — यानी उनके दिल में कोई बुरा विचार आ जाता है या वे कोई गलती कर बैठते हैं — तो वे तुरंत अल्लाह को याद कर लेते हैं। वे अल्लाह की अज़मत, उसकी सज़ा और उसके इनाम को याद करते हैं, और अपनी गलती का एहसास होते ही तौबा कर लेते हैं। वे अल्लाह से पनाह माँगते हैं और अपने रब की ओर लौट आते हैं। नतीजा यह होता है कि वे अपनी ग़लती की जगह को साफ़ देख लेते हैं, सत्य को पहचान जाते हैं, और शैतान की वसवसा से बचकर सीधे रास्ते पर आ जाते हैं। वे अंधेरे में नहीं भटकते, बल्कि उनकी आँखें खुल जाती हैं और वे स्पष्ट रूप से देख लेते हैं कि सही क्या है और गलत क्या है।
फ़ायदे (लाभ):
- मुत्तक़ी की पहचान: यह आयत बताती है कि मुत्तक़ी वह नहीं जो कभी गलती करता ही नहीं, बल्कि वह है जो गलती होते ही तुरंत जाग जाता है, तौबा करता है और लौट आता है। यह हमें उम्मीद देता है कि अल्लाह के प्यारे बंदे भी इंसान हैं, लेकिन उनकी पहचान उनकी जल्दी तौबा है।
- शैतान की वसवसा से बचाव का रास्ता: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब भी दिल में बुरा ख़याल आए, तो तुरंत अल्लाह को याद करें। अल्लाह की याद शैतान को भगाने का सबसे कारगर हथियार है।
- तौबा का दरवाज़ा हमेशा खुला: यह आयत हमें बताती है कि चाहे कितनी भी बड़ी गलती हो जाए, अल्लाह का दरवाज़ा बंद नहीं है। जो भी सच्चे दिल से लौट आए, अल्लाह उसे कबूल करता है और उसे सही रास्ता दिखा देता है।
- बसीरत (दूरदर्शिता) का इनाम: जो लोग अल्लाह की याद में जीते हैं, अल्लाह उन्हें बसीरत (सूझ-बूझ) देता है, जिससे वे सत्य और असत्य में फर्क कर सकें। यह दुनिया और आख़िरत दोनों में काम आने वाली नेमत है।
- इस्लाम की खूबसूरती: यह आयत इस्लाम की खूबसूरती दिखाती है कि यह इंसान को निराशा नहीं देता, बल्कि हर गलती के बाद उठने और सुधरने का मौका देता है। यह एक ऐसा दीन है जो इंसान की कमज़ोरियों को समझता है और उसके लिए राह आसान करता है।
📜 आयत 199-203 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 201
सूरा अल-आराफ आयत 201 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बेशक लोग परहेज़गार हैं जब भी उन्हें शैतान का ख्याल…सूरा आयत 201/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 199–203. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


