अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- إِخْوَانُهُمْ (उनके भाई): शैतानों के भाई, अर्थात काफिरों और बदकार इंसान।
- يَمُدُّونَهُمْ (वे उन्हें बढ़ाते हैं): शैतान उन्हें बढ़ावा देते हैं और उनकी मदद करते हैं।
- الْغَيِّ (गुमराही): पथभ्रष्टता, भटकाव, और बुराई का रास्ता।
- لَا يُقْصِرُونَ (वे बाज़ नहीं आते): वे रुकते नहीं, न शैतान अपने काम से रुकते हैं और न ही उनके भाई बुराई करने से।
तफसीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन कर रही है जो शैतान के अनुयायी बन जाते हैं। जिस प्रकार पिछली आयत में बताया गया था कि शैतान अपने साथियों को गुमराही की तरफ बुलाते हैं, इस आयत में बताया जा रहा है कि शैतान और उनके इंसानी भाई एक-दूसरे की मदद करते हैं। शैतान अपने इंसानी भाइयों को लगातार गुमराही में बढ़ावा देते हैं, उन्हें बुराई की तरफ धकेलते हैं, और उनके दिलों में बुरे विचार डालते हैं। वे उन्हें पाप के बाद पाप करने की प्रेरणा देते हैं, और उन्हें कभी भी सच्चाई की तरफ लौटने का मौका नहीं देते।
दूसरी ओर, ये इंसानी भाई भी शैतान के इशारे पर काम करते हैं और बुराई में लगे रहते हैं। न तो शैतान उन्हें गुमराह करने से रुकते हैं, और न ही ये लोग बुराई से बाज़ आते हैं। यह एक दुष्चक्र है — शैतान उन्हें बढ़ावा देते हैं, और वे खुद भी अपनी इच्छा से बुराई में आगे बढ़ते जाते हैं। यह उन लोगों की हालत है जिन्होंने अल्लाह की याद से मुँह मोड़ लिया, इसलिए शैतान उनके साथी बन गए हैं।
फ़ायदे (सीख):
- यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान इंसान का खुला दुश्मन है और वह हर समय हमें गुमराह करने की कोशिश में लगा रहता है। इसलिए हमें हमेशा उसके धोखे से सावधान रहना चाहिए।
- बुरे लोगों की संगत से बचना चाहिए, क्योंकि बुरे दोस्त इंसान को शैतान की तरफ ले जाते हैं और उसे बुराई में बढ़ावा देते हैं।
- यह आयत हमें यह भी बताती है कि अगर इंसान एक बार बुराई में पड़ जाए, तो शैतान उसे और गहरा धकेलता है। इसलिए पहले ही कदम पर बुराई से दूर रहना चाहिए।
- अल्लाह की याद और क़ुरआन की तिलावत ही वह चीज़ है जो शैतान को इंसान से दूर करती है। जो लोग अल्लाह को याद करते हैं, शैतान उनके पास नहीं फटक सकता।
- यह आयत हमें अच्छे लोगों की संगत की अहमियत सिखाती है — जैसे बुरे लोग एक-दूसरे को बुराई में बढ़ावा देते हैं, वैसे ही अच्छे लोगों को भी एक-दूसरे को नेकी में बढ़ावा देना चाहिए।
📜 आयत 200-204 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 202
सूरा अल-आराफ आयत 202 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही…सूरा आयत 202/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 200–204. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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