अल-आराफ · 202/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَإِخْوَانُهُمْ يَمُدُّونَهُمْ فِي الْغَيِّ ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَ ۝٢٠٢
Wa ikhwaanuhum yamuddoonahum fil ghaiyi summa laa yuqsiroon
📖 हिंदी अर्थ
उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही के तरफ घसीटे जाते हैं फिर किसी तरह की कोताही (भी) नहीं करते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • إِخْوَانُهُمْ (उनके भाई): शैतानों के भाई, अर्थात काफिरों और बदकार इंसान।
  • يَمُدُّونَهُمْ (वे उन्हें बढ़ाते हैं): शैतान उन्हें बढ़ावा देते हैं और उनकी मदद करते हैं।
  • الْغَيِّ (गुमराही): पथभ्रष्टता, भटकाव, और बुराई का रास्ता।
  • لَا يُقْصِرُونَ (वे बाज़ नहीं आते): वे रुकते नहीं, न शैतान अपने काम से रुकते हैं और न ही उनके भाई बुराई करने से।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के हाल का वर्णन कर रही है जो शैतान के अनुयायी बन जाते हैं। जिस प्रकार पिछली आयत में बताया गया था कि शैतान अपने साथियों को गुमराही की तरफ बुलाते हैं, इस आयत में बताया जा रहा है कि शैतान और उनके इंसानी भाई एक-दूसरे की मदद करते हैं। शैतान अपने इंसानी भाइयों को लगातार गुमराही में बढ़ावा देते हैं, उन्हें बुराई की तरफ धकेलते हैं, और उनके दिलों में बुरे विचार डालते हैं। वे उन्हें पाप के बाद पाप करने की प्रेरणा देते हैं, और उन्हें कभी भी सच्चाई की तरफ लौटने का मौका नहीं देते।

दूसरी ओर, ये इंसानी भाई भी शैतान के इशारे पर काम करते हैं और बुराई में लगे रहते हैं। न तो शैतान उन्हें गुमराह करने से रुकते हैं, और न ही ये लोग बुराई से बाज़ आते हैं। यह एक दुष्चक्र है — शैतान उन्हें बढ़ावा देते हैं, और वे खुद भी अपनी इच्छा से बुराई में आगे बढ़ते जाते हैं। यह उन लोगों की हालत है जिन्होंने अल्लाह की याद से मुँह मोड़ लिया, इसलिए शैतान उनके साथी बन गए हैं।

फ़ायदे (सीख):

  1. यह आयत हमें सिखाती है कि शैतान इंसान का खुला दुश्मन है और वह हर समय हमें गुमराह करने की कोशिश में लगा रहता है। इसलिए हमें हमेशा उसके धोखे से सावधान रहना चाहिए।
  2. बुरे लोगों की संगत से बचना चाहिए, क्योंकि बुरे दोस्त इंसान को शैतान की तरफ ले जाते हैं और उसे बुराई में बढ़ावा देते हैं।
  3. यह आयत हमें यह भी बताती है कि अगर इंसान एक बार बुराई में पड़ जाए, तो शैतान उसे और गहरा धकेलता है। इसलिए पहले ही कदम पर बुराई से दूर रहना चाहिए।
  4. अल्लाह की याद और क़ुरआन की तिलावत ही वह चीज़ है जो शैतान को इंसान से दूर करती है। जो लोग अल्लाह को याद करते हैं, शैतान उनके पास नहीं फटक सकता।
  5. यह आयत हमें अच्छे लोगों की संगत की अहमियत सिखाती है — जैसे बुरे लोग एक-दूसरे को बुराई में बढ़ावा देते हैं, वैसे ही अच्छे लोगों को भी एक-दूसरे को नेकी में बढ़ावा देना चाहिए।
🎧 सुनें

📜 आयत 200-204 — अल-आराफ

200وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
अगर शैतान की तरफ से तुम्हारी (उम्मत के) दिल में किसी तरह का (वसवसा (शक) पैदा हो तो ख़ुदा से पनाह मॉगों (क्योंकि) उसमें तो शक़ ही नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
201إِنَّ الَّذِينَ اتَّقَوْا إِذَا مَسَّهُمْ طَائِفٌ مِّنَ الشَّيْطَانِ تَذَكَّرُوا فَإِذَا هُم مُّبْصِرُونَ
बेशक लोग परहेज़गार हैं जब भी उन्हें शैतान का ख्याल छू भी गया तो चौक पड़ते हैं फिर फौरन उनकी ऑखें खुल जाती हैं
202وَإِخْوَانُهُمْ يَمُدُّونَهُمْ فِي الْغَيِّ ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَ
उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही के तरफ घसीटे जाते हैं फिर किसी तरह की कोताही (भी) नहीं करते
203وَإِذَا لَمْ تَأْتِهِم بِآيَةٍ قَالُوا لَوْلَا اجْتَبَيْتَهَا ۚ قُلْ إِنَّمَا أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ مِن رَّبِّي ۚ هَٰذَا بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते तो कहते हैं कि तुमने उसे क्यों नहीं बना लिया (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो बस इसी वही का पाबन्द हूँ जो मेरे परवरदिगार की तरफ से मेरे पास आती है ये (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (हक़ीकत) की दलीलें हैं
204وَإِذَا قُرِئَ الْقُرْآنُ فَاسْتَمِعُوا لَهُ وَأَنصِتُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ईमानदार लोगों के वास्ते हिदायत और रहमत हैं (लोगों) जब क़ुरान पढ़ा जाए तो कान लगाकर सुनो और चुपचाप रहो ताकि (इसी बहाने) तुम पर रहम किया जाए
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
202आयत

अनुवाद — अल-आराफ 202

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Tuesday, August 18, 2026

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