अल-आराफ · 200/206
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-आराफ
وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ ۝٢٠٠
Wa immaa yanzaghannaka minash Shaitaani nazghun fasta`iz billaah; innahoo Samee`un Aleem
📖 हिंदी अर्थ
अगर शैतान की तरफ से तुम्हारी (उम्मत के) दिल में किसी तरह का (वसवसा (शक) पैदा हो तो ख़ुदा से पनाह मॉगों (क्योंकि) उसमें तो शक़ ही नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَنزَغَنَّكَ – तुम्हें छेड़े, उकसाए, या तुम्हारे दिल में कुछ डाल दे।
  • نَزْغٌ – वसवसा, उकसावा, ग़ुस्से का जोश, या बुराई की तरफ उभारना।
  • فَاسْتَعِذْ – पनाह माँगो, सहारा लो, और उसकी शरण में जाओ।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! जब भी शैतान की तरफ से तुम्हें कोई वसवसा पहुँचे — चाहे वह ग़ुस्से का जोश हो, बुराई की तरफ उभारना हो, या किसी नेक काम से रोकने की कोशिश हो — तो उस वक़्त तुम फ़ौरन अल्लाह की पनाह माँगो और उसी की शरण में जाओ। यानी "أعوذ بالله من الشيطان الرجيم" कहो। यह सिर्फ़ ज़ुबानी कहना नहीं है, बल्कि दिल से अल्लाह पर भरोसा करना और उसी से मदद माँगना है। अल्लाह हर बात को सुनने वाला है — चाहे वह तुम्हारी ज़ुबान से निकले या तुम्हारे दिल में हो — और वह तुम्हारे हर अमल को जानने वाला है। वह जानता है कि तुम्हारे लिए किस चीज़ में भलाई है, और जब तुम उसकी पनाह माँगोगे तो वह तुम्हें शैतान के शर से महफ़ूज़ रखेगा और तुम्हें उस रास्ते पर चलाएगा जो तुम्हारे लिए बेहतर है।

फ़ायदे (सबक़):

  1. शैतान की वसवसा हर इंसान को आती है, यहाँ तक कि नबी को भी — इसलिए कोई शर्मिंदा न हो, बल्कि सीखे कि उस वक़्त क्या करना है।
  2. शैतान से बचने का सबसे मज़बूत ज़रिया अल्लाह की पनाह है — अपनी ताक़त या अपनी कोशिशों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
  3. यह आयत हमें सिखाती है कि ग़ुस्से या बुरे ख़यालात के वक़्त फ़ौरन अल्लाह का ज़िक्र करें — यही सबसे बड़ा हथियार है।
  4. अल्लाह की सुनने और जानने की सिफ़त हमें तसल्ली देती है कि हमारी हर दुआ और पनाह की दरख़्वास्त उस तक पहुँचती है, और वह हमें अकेला नहीं छोड़ता।
  5. यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि हर मुश्किल में अल्लाह की तरफ रुजू करना चाहिए — यही ईमान की निशानी है और यही कामयाबी का रास्ता है।


📜 आयत 198-202 — सूरा अल-आराफ

198وَإِن تَدْعُوهُمْ إِلَى الْهُدَىٰ لَا يَسْمَعُوا ۖ وَتَرَاهُمْ يَنظُرُونَ إِلَيْكَ وَهُمْ لَا يُبْصِرُونَ
और अगर उन्हें हिदायत की तरफ बुलाएगा भी तो ये सुन ही नहीं सकते और तू तो समझता है कि वह तुझे (ऑखें खोले) देख रहे हैं हालॉकि वह देखते नहीं
199خُذِ الْعَفْوَ وَأْمُرْ بِالْعُرْفِ وَأَعْرِضْ عَنِ الْجَاهِلِينَ
(ऐ रसूल) तुम दरगुज़र करना एख्तियार करो और अच्छे काम का हुक्म दो और जाहिलों की तरफ से मुह फेर लो
200وَإِمَّا يَنزَغَنَّكَ مِنَ الشَّيْطَانِ نَزْغٌ فَاسْتَعِذْ بِاللَّهِ ۚ إِنَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
अगर शैतान की तरफ से तुम्हारी (उम्मत के) दिल में किसी तरह का (वसवसा (शक) पैदा हो तो ख़ुदा से पनाह मॉगों (क्योंकि) उसमें तो शक़ ही नहीं कि वह बड़ा सुनने वाला वाक़िफकार है
201إِنَّ الَّذِينَ اتَّقَوْا إِذَا مَسَّهُمْ طَائِفٌ مِّنَ الشَّيْطَانِ تَذَكَّرُوا فَإِذَا هُم مُّبْصِرُونَ
बेशक लोग परहेज़गार हैं जब भी उन्हें शैतान का ख्याल छू भी गया तो चौक पड़ते हैं फिर फौरन उनकी ऑखें खुल जाती हैं
202وَإِخْوَانُهُمْ يَمُدُّونَهُمْ فِي الْغَيِّ ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَ
उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही के तरफ घसीटे जाते हैं फिर किसी तरह की कोताही (भी) नहीं करते
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीअवतरण स्थान
200आयत

अनुवाद — अल-आराफ 200

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Thursday, October 1, 2026

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