अल-आराफ · 203/206
अनुवाद उच्चारण — अल-आराफ
وَإِذَا لَمْ تَأْتِهِم بِآيَةٍ قَالُوا لَوْلَا اجْتَبَيْتَهَا ۚ قُلْ إِنَّمَا أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ مِن رَّبِّي ۚ هَٰذَا بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ ۝٢٠٣
Wa izaa lam taatihim bi aayatin qaaloo law lajtabai tahaa; qul innamaaa attabi`u maa yoohaaa ilaiya mir Rabbee; haazaa basaaa`iru mir Rabbikum wa hudanw wa rahmatul liqawminy yu`minoon
📖 हिंदी अर्थ
और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते तो कहते हैं कि तुमने उसे क्यों नहीं बना लिया (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो बस इसी वही का पाबन्द हूँ जो मेरे परवरदिगार की तरफ से मेरे पास आती है ये (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (हक़ीकत) की दलीलें हैं

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بِآيَةٍ: कोई निशानी या चमत्कार (जैसे कोई नई आयत या माँगी गई निशानी)।
  • لَوْلَا اجْتَبَيْتَهَا: "तुमने इसे क्यों नहीं बना लिया?" यानी तुम इसे अपनी ओर से क्यों नहीं गढ़ लाते?
  • بَصَائِرُ: बहुवचन, जिसका अर्थ है दिलों को रोशनी देने वाली स्पष्ट दलीलें और प्रमाण।
  • هُدًى: सीधा रास्ता दिखाने वाला मार्गदर्शन।
  • رَحْمَةٌ: दया और कृपा।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! जब आप इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) के पास कोई नई आयत या निशानी नहीं लाते, तो वे मज़ाक़ और उपहास के तौर पर कहते हैं: "आपने इसे अपनी ओर से क्यों नहीं बना लिया? आप इसे स्वयं क्यों नहीं गढ़ लाते?" यानी वे चाहते हैं कि आप उनकी मनमानी पर कोई आयत या चमत्कार पेश करें।

अल्लाह आपको सिखाता है कि आप उन्हें जवाब दें: "यह मेरा काम नहीं है, और न ही मुझे यह अधिकार है कि मैं अपनी ओर से कोई बात गढ़ूँ। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ जो मेरे रब की ओर से मुझ पर उतारा जाता है। यह कुरआन जो मैं तुम्हें सुना रहा हूँ, यह तुम्हारे रब की ओर से स्पष्ट प्रमाण और दलीलें हैं, जो तुम्हें सत्य की ओर मार्गदर्शन करती हैं। यह उन लोगों के लिए रहमत और हिदायत है जो ईमान लाते हैं।"

यानी कुरआन अपने आप में एक जीवित चमत्कार है, जो हर युग में सच्चाई का सबूत पेश करता है। यह उन लोगों के लिए आँखों की रोशनी, दिलों की शिफ़ा और रहमत है जो इसे मानते हैं और इस पर अमल करते हैं। जो लोग ईमान नहीं लाते, वे इससे महरूम रहते हैं और गुमराही में पड़े रहते हैं।


फ़ायदे (सीख):

  1. नबी ﷺ की पैरवी: हमें सीख मिलती है कि नबी ﷺ अपनी ओर से कोई बात नहीं कहते थे, बल्कि पूरी तरह अल्लाह की वही (प्रकाशना) के पाबंद थे। यह उनकी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही है।
  2. कुरआन ही काफी है: कुरआन हर ज़माने के लिए सबसे बड़ा चमत्कार और प्रमाण है। किसी और निशानी की तलाश करना बेकार है, क्योंकि यह किताब खुद अपने अंदर सच्चाई के सबूत रखती है।
  3. हिदायत और रहमत ईमान वालों के लिए: कुरआन से फ़ायदा उठाने के लिए ईमान और खुले दिल की ज़रूरत है। जो लोग इसे सच्चे दिल से पढ़ते और समझते हैं, उन्हें यह सही रास्ता दिखाता है और उन पर अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
  4. नबी ﷺ की बेबसी और अल्लाह की बड़ाई: यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ भी अल्लाह के बंदे हैं और बिना अल्लाह की इजाज़त के कुछ नहीं कर सकते। यह हमारे लिए सबक है कि हम भी अपने जीवन में अल्लाह के हुक्म को मानें और उसी की राह पर चलें।
  5. सब्र और दृढ़ता: मुशरिकों की बातों से नबी ﷺ को कोई फ़र्क नहीं पड़ता था, बल्कि वे अल्लाह की वही पर डटे रहे। हमें भी चाहिए कि लोगों की बातों से विचलित न हों और सच्चाई पर क़ायम रहें।


📜 आयत 201-205 — अल-आराफ

201إِنَّ الَّذِينَ اتَّقَوْا إِذَا مَسَّهُمْ طَائِفٌ مِّنَ الشَّيْطَانِ تَذَكَّرُوا فَإِذَا هُم مُّبْصِرُونَ
बेशक लोग परहेज़गार हैं जब भी उन्हें शैतान का ख्याल छू भी गया तो चौक पड़ते हैं फिर फौरन उनकी ऑखें खुल जाती हैं
202وَإِخْوَانُهُمْ يَمُدُّونَهُمْ فِي الْغَيِّ ثُمَّ لَا يُقْصِرُونَ
उन काफिरों के भाई बन्द शैतान उनको (धर पकड़) गुमराही के तरफ घसीटे जाते हैं फिर किसी तरह की कोताही (भी) नहीं करते
203وَإِذَا لَمْ تَأْتِهِم بِآيَةٍ قَالُوا لَوْلَا اجْتَبَيْتَهَا ۚ قُلْ إِنَّمَا أَتَّبِعُ مَا يُوحَىٰ إِلَيَّ مِن رَّبِّي ۚ هَٰذَا بَصَائِرُ مِن رَّبِّكُمْ وَهُدًى وَرَحْمَةٌ لِّقَوْمٍ يُؤْمِنُونَ
और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते तो कहते हैं कि तुमने उसे क्यों नहीं बना लिया (ऐ रसूल) तुम कह दो कि मै तो बस इसी वही का पाबन्द हूँ जो मेरे परवरदिगार की तरफ से मेरे पास आती है ये (क़ुरान) तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (हक़ीकत) की दलीलें हैं
204وَإِذَا قُرِئَ الْقُرْآنُ فَاسْتَمِعُوا لَهُ وَأَنصِتُوا لَعَلَّكُمْ تُرْحَمُونَ
और ईमानदार लोगों के वास्ते हिदायत और रहमत हैं (लोगों) जब क़ुरान पढ़ा जाए तो कान लगाकर सुनो और चुपचाप रहो ताकि (इसी बहाने) तुम पर रहम किया जाए
205وَاذْكُر رَّبَّكَ فِي نَفْسِكَ تَضَرُّعًا وَخِيفَةً وَدُونَ الْجَهْرِ مِنَ الْقَوْلِ بِالْغُدُوِّ وَالْآصَالِ وَلَا تَكُن مِّنَ الْغَافِلِينَ
और अपने परवरदिगार को अपने जी ही में गिड़गिड़ा के और डर के और बहुत चीख़ के नहीं (धीमी) आवाज़ से सुबह व शाम याद किया करो और (उसकी याद से) ग़ाफिल बिल्कुल न हो जाओ
अल-आराफकुरान सूची
206आयत
मक्कीRevelation
203आयत

अनुवाद — अल-आराफ 203

सूरा अल-आराफ आयत 203 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते…

सूरा आयत 203/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 201–205. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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