अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- بِآيَةٍ: कोई निशानी या चमत्कार (जैसे कोई नई आयत या माँगी गई निशानी)।
- لَوْلَا اجْتَبَيْتَهَا: "तुमने इसे क्यों नहीं बना लिया?" यानी तुम इसे अपनी ओर से क्यों नहीं गढ़ लाते?
- بَصَائِرُ: बहुवचन, जिसका अर्थ है दिलों को रोशनी देने वाली स्पष्ट दलीलें और प्रमाण।
- هُدًى: सीधा रास्ता दिखाने वाला मार्गदर्शन।
- رَحْمَةٌ: दया और कृपा।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! जब आप इन मुशरिकों (बहुदेववादियों) के पास कोई नई आयत या निशानी नहीं लाते, तो वे मज़ाक़ और उपहास के तौर पर कहते हैं: "आपने इसे अपनी ओर से क्यों नहीं बना लिया? आप इसे स्वयं क्यों नहीं गढ़ लाते?" यानी वे चाहते हैं कि आप उनकी मनमानी पर कोई आयत या चमत्कार पेश करें।
अल्लाह आपको सिखाता है कि आप उन्हें जवाब दें: "यह मेरा काम नहीं है, और न ही मुझे यह अधिकार है कि मैं अपनी ओर से कोई बात गढ़ूँ। मैं तो केवल उसी का अनुसरण करता हूँ जो मेरे रब की ओर से मुझ पर उतारा जाता है। यह कुरआन जो मैं तुम्हें सुना रहा हूँ, यह तुम्हारे रब की ओर से स्पष्ट प्रमाण और दलीलें हैं, जो तुम्हें सत्य की ओर मार्गदर्शन करती हैं। यह उन लोगों के लिए रहमत और हिदायत है जो ईमान लाते हैं।"
यानी कुरआन अपने आप में एक जीवित चमत्कार है, जो हर युग में सच्चाई का सबूत पेश करता है। यह उन लोगों के लिए आँखों की रोशनी, दिलों की शिफ़ा और रहमत है जो इसे मानते हैं और इस पर अमल करते हैं। जो लोग ईमान नहीं लाते, वे इससे महरूम रहते हैं और गुमराही में पड़े रहते हैं।
फ़ायदे (सीख):
- नबी ﷺ की पैरवी: हमें सीख मिलती है कि नबी ﷺ अपनी ओर से कोई बात नहीं कहते थे, बल्कि पूरी तरह अल्लाह की वही (प्रकाशना) के पाबंद थे। यह उनकी सच्चाई की सबसे बड़ी गवाही है।
- कुरआन ही काफी है: कुरआन हर ज़माने के लिए सबसे बड़ा चमत्कार और प्रमाण है। किसी और निशानी की तलाश करना बेकार है, क्योंकि यह किताब खुद अपने अंदर सच्चाई के सबूत रखती है।
- हिदायत और रहमत ईमान वालों के लिए: कुरआन से फ़ायदा उठाने के लिए ईमान और खुले दिल की ज़रूरत है। जो लोग इसे सच्चे दिल से पढ़ते और समझते हैं, उन्हें यह सही रास्ता दिखाता है और उन पर अल्लाह की रहमत नाज़िल होती है।
- नबी ﷺ की बेबसी और अल्लाह की बड़ाई: यह आयत हमें सिखाती है कि नबी ﷺ भी अल्लाह के बंदे हैं और बिना अल्लाह की इजाज़त के कुछ नहीं कर सकते। यह हमारे लिए सबक है कि हम भी अपने जीवन में अल्लाह के हुक्म को मानें और उसी की राह पर चलें।
- सब्र और दृढ़ता: मुशरिकों की बातों से नबी ﷺ को कोई फ़र्क नहीं पड़ता था, बल्कि वे अल्लाह की वही पर डटे रहे। हमें भी चाहिए कि लोगों की बातों से विचलित न हों और सच्चाई पर क़ायम रहें।
📜 आयत 201-205 — अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 203
सूरा अल-आराफ आयत 203 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और जब तुम उनके पास कोई (ख़ास) मौजिज़ा नहीं लाते…सूरा आयत 203/206 — अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-आराफ सुनें, अल-आराफ अनुवाद, अल-आराफ mp3, अल-आराफ pdf. आयत 201–205. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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