Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَفِيضُوا: बहा दो, उंडेल दो (पानी या किसी चीज़ को प्रचुर मात्रा में देना)।
- مِمَّا رَزَقَكُمُ اللَّهُ: उस चीज़ में से जो अल्लाह ने तुम्हें (जन्नत में) दी है, अर्थात भोजन और पेय।
- حَرَّمَهُمَا: उन दोनों (पानी और भोजन) को हराम (वर्जित) कर दिया है।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत क़ियामत के दिन के एक भयावह और दर्दनाक दृश्य का वर्णन करती है। जब जहन्नम के लोग आग में जल रहे होंगे और प्यास व भूख से बेहाल होंगे, तो वे जन्नत के लोगों को पुकारेंगे और उनसे विनती करेंगे कि वे उन पर थोड़ा पानी बहा दें, या उन्हें उस भोजन में से कुछ दे दें जो अल्लाह ने उन्हें जन्नत में दिया है। वे अपनी स्थिति की गंभीरता के कारण यह मदद माँगेंगे।
लेकिन जन्नत के लोग उन्हें जवाब देंगे कि अल्लाह ने पानी और भोजन—यानी ये दोनों चीज़ें—काफ़िरों पर हराम कर दी हैं। यानी जिन्होंने अल्लाह की एकता को नकारा और उसके रसूलों को झुठलाया, उनके लिए ये नेमतें हमेशा के लिए वर्जित हैं। जन्नत के लोग यह भी बताएँगे कि वे उन चीज़ों में से कुछ भी उन्हें नहीं दे सकते जिन्हें अल्लाह ने उनके लिए हराम किया है। यह उत्तर उनके लिए एक और यातना होगी—निराशा और पछतावे की।
यह आयत यह भी बताती है कि जन्नत, जहन्नम से ऊपर है, क्योंकि जहन्नम के लोग ऊपर की ओर देखकर जन्नत के लोगों को पुकार रहे हैं।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- क़ियामत की सच्चाई: यह आयत हमें यक़ीन दिलाती है कि क़ियामत का दिन ज़रूर आएगा और हर इंसान को अपने कर्मों का फल मिलेगा। यह हमें आज से ही अच्छे कर्म करने की तरग़ीब देती है।
- कुफ़्र का अंजाम: कुफ़्र (अल्लाह को नकारना) का नतीजा सिर्फ़ आग में जलना नहीं, बल्कि अल्लाह की रहमत से पूरी तरह महरूम होना है। यह हमें ईमान की क़द्र करना सिखाता है।
- अल्लाह की नेमतों की क़द्र: जन्नत के पानी और भोजन की चर्चा हमें याद दिलाती है कि दुनिया की ये नेमतें अस्थायी हैं। असली नेमतें जन्नत में हैं, और उन्हें पाने के लिए हमें अल्लाह की आज्ञा का पालन करना चाहिए।
- मदद की अपील का जवाब: जन्नत के लोगों का जवाब सिखाता है कि अल्लाह की मरज़ी के ख़िलाफ़ किसी की मदद नहीं की जा सकती। हमें हमेशा अल्लाह के हुक्म को सबसे ऊपर रखना चाहिए।
- ईमान की नेमत: यह आयत हमें शुक्रगुज़ार बनाती है कि अल्लाह ने हमें ईमान की नेमत दी है, और हमें इस नेमत को बनाए रखने के लिए दुआ करनी चाहिए और नेक कर्मों में लगे रहना चाहिए।
📜 आयत 48-52 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 50
सूरा अल-आराफ आयत 50 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और दोज़ख वाले अहले बेहिश्त को (लजाजत से) आवाज़ देगें…सूरा आयत 50/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 48–52. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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