Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- أَهْلَ الْقُرَىٰ: उन बस्तियों के निवासी जिनकी ओर पैगंबर भेजे गए थे।
- آمَنُوا: ईमान लाएं, अर्थात् अपने पैगंबरों पर विश्वास करें।
- وَاتَّقَوْا: अल्लाह का भय रखें और उसके आदेशों का पालन करते हुए निषेधों से बचें।
- بَرَكَاتٍ: खुशहाली, बरकतें, भलाई के द्वार।
- فَأَخَذْنَاهُم: हमने उन्हें पकड़ लिया, अर्थात् उन्हें यातना में जकड़ लिया।
तफ़सीर (व्याख्या):
यदि उन बस्तियों के लोग, जिनके पास अल्लाह के पैगंबर आए थे, ईमान लाते और उनके संदेश को सच मानते, और अल्लाह के भय से अपने जीवन को ढाल लेते—अर्थात् उसकी अवज्ञा और पापों से बचते—तो अल्लाह उनके लिए आसमान और ज़मीन की बरकतों के द्वार खोल देता। आसमान से बारिश होती, ज़मीन से फ़सलें उगतीं, और उन्हें हर तरफ़ से भलाई और खुशहाली मिलती। लेकिन उन्होंने अपने पैगंबरों को झुठलाया और उनके लाए हुए संदेश को अस्वीकार कर दिया। इसलिए अल्लाह ने उन्हें उनके किए हुए कर्मों—कुफ्र और गुनाहों—की सज़ा में अचानक यातना में पकड़ लिया, और उनका विनाश कर दिया।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- यह आयत सिखाती है कि ईमान और तक़वा (अल्लाह का भय) ही असली कुंजी है जो रिज़्क़ और बरकत के दरवाज़े खोलती है। जब कोई समाज ईमान और नेकी पर चलता है, तो अल्लाह उसे आसमानी और ज़मीनी नेमतों से नवाज़ता है।
- यह बताती है कि पाप और कुफ्र न केवल आख़िरत की सज़ा का कारण हैं, बल्कि दुनिया में भी अल्लाह की पकड़ और यातना का सबब बनते हैं। जब लोग सच्चाई को झुठलाते हैं, तो उनकी भलाई छीन ली जाती है और विनाश उनका इंतज़ार करता है।
- यह आयत मुसलमानों को प्रोत्साहित करती है कि वे ईमान और तक़वा को अपने जीवन का आधार बनाएँ, क्योंकि यही दुनिया और आख़िरत की सफलता की गारंटी है। अल्लाह की रहमत और बरकतें उन्हीं पर नाज़िल होती हैं जो उसकी ओर रुजू करते हैं।
- इसमें एक चेतावनी भी है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जो लोग उसके पैगंबरों को झुठलाते हैं और पापों में डूबे रहते हैं, उन्हें अचानक उसकी यातना आ घेरती है। इसलिए इंसान को अपने कर्मों की जाँच करते रहना चाहिए और अल्लाह की रहमत से निराश नहीं होना चाहिए, बल्कि तौबा और इस्तिग़फ़ार की ओर लौटना चाहिए।
📜 आयत 94-98 — सूरा अल-आराफ
अनुवाद — अल-आराफ 96
सूरा अल-आराफ आयत 96 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और वह बिल्कुल बेख़बर थे और अगर उन बस्तियों के…सूरा आयत 96/206 — सूरा अल-आराफ الأعراف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-आराफ सुनें, सूरा अल-आराफ अनुवाद, सूरा अल-आराफ mp3, सूरा अल-आराफ pdf. आयत 94–98. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


