अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- حَمِيمٌ (हमीम): निकट का रिश्तेदार, सच्चा मित्र और वह व्यक्ति जो दिल से किसी का हितैषी हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
उस दिन (क़ियामत के दिन) का हाल यह होगा कि कोई निकट का रिश्तेदार या सच्चा मित्र अपने दोस्त या रिश्तेदार की ख़बर तक नहीं पूछेगा। हर व्यक्ति अपनी ही फ़िक्र में इतना डूबा होगा कि उसे अपने सबसे प्यारे और करीबी लोगों की भी परवाह नहीं रहेगी। माँ अपने बच्चे को, बाप अपने बेटे को, भाई अपने भाई को और दोस्त अपने दोस्त को भूल जाएगा। इसका कारण यह होगा कि उस दिन का भय और हौल इतना सख्त होगा कि हर शख्स सिर्फ अपनी ही नजात (मुक्ति) के बारे में सोचेगा।
यह आयत हमें बताती है कि क़ियामत का दिन कितना भयानक और सख्त होगा। आज हम अपने रिश्तेदारों और दोस्तों से मोहब्बत करते हैं, उनकी ख़ैरियत पूछते हैं, लेकिन उस दिन हालात इतने गंभीर होंगे कि ये सारे रिश्ते और मोहब्बतें बेकार हो जाएँगी।
इससे हमें सबक लेना चाहिए कि हम उस दिन के लिए तैयारी करें। आज हमारे पास मौका है कि हम अपने अमल (कर्मों) को सुधारें, नेकियाँ कमाएँ और अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें। याद रखें, उस दिन कोई दोस्त किसी दोस्त के काम नहीं आएगा, न कोई रिश्तेदार किसी रिश्तेदार की मदद कर सकेगा। सिर्फ अल्लाह पर भरोसा और नेक अमल ही हमारी नजात का ज़रिया बनेंगे। अल्लाह हम सबको उस सख्त दिन के अज़ाब से बचाए और अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 8-12 — अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 10
सूरा अल-मआरिज आयत 10 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : बावजूद कि एक दूसरे को देखते होंगेसूरा आयत 10/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 8–12. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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