Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يُبَصَّرُونَهُمْ: उन्हें एक-दूसरे को दिखाया जाएगा, यानी हर इंसान अपने रिश्तेदारों को पहचान लेगा और देख लेगा।
- يَوَدُّ: वह चाहेगा, कामना करेगा।
- الْمُجْرِمُ: अपराधी, यानी काफिर और मुशरिक।
- يَفْتَدِي: बदले में देकर छुड़ाना, फिदया देना।
- بِبَنِيهِ: अपने बेटों के साथ।
तफसीर (व्याख्या):
क़यामत के दिन का मंज़र बहुत ही भयानक और सख्त होगा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि उस दिन सभी लोग एक-दूसरे को देखेंगे और पहचान लेंगे, लेकिन उस वक्त की दहशत और खौफ़ इतना ज़्यादा होगा कि कोई किसी से बात नहीं करेगा, कोई किसी की मदद नहीं मांगेगा और न ही कोई किसी की मदद कर सकेगा। हर इंसान सिर्फ अपनी फिक्र में डूबा होगा।
उस दिन अपराधी, यानी वह लोग जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफरमानी की और शिर्क किया, वह ऐसी हालत में होंगे कि वह चाहेंगे कि काश! वह अपने बेटों को फिदया (बदले) में देकर उस दिन के अज़ाब से छुटकारा पा लेते। वह अपने सबसे प्यारे और करीबी लोगों को क़ुरबान करने को तैयार हो जाएंगे, बस इसलिए कि वह अल्लाह के अज़ाब से बच जाएं।
यह उस दिन की सख्ती और अज़ाब की शिद्दत को बयान करता है कि एक बाप अपने बेटों को, जिनसे उसे दुनिया में बेहद मुहब्बत होती है, अज़ाब से बचने के लिए छोड़ने को तैयार हो जाएगा। यह उन लोगों के लिए बहुत बड़ी चेतावनी है जो दुनिया में अल्लाह की नाफरमानी करते हैं और आख़िरत को भूल जाते हैं।
दावत और नसीहत:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम अपने बेटों, बीवी, मां-बाप और रिश्तेदारों से इतनी मुहब्बत करते हैं, लेकिन क़यामत के दिन यही रिश्ते हमारे किसी काम नहीं आएंगे। सिर्फ अल्लाह पर ईमान और नेक अमल ही हमें उस दिन बचा सकते हैं। आज हमें उस दिन की तैयारी करनी है — नमाज़ क़ायम करनी है, अल्लाह का ज़िक्र करना है, और उसके हुक्मों पर चलना है। यह दुनिया फानी है, लेकिन आख़िरत हमेशा रहने वाली है। अल्लाह तआला हम सबको समझ दे और उस दिन के अज़ाब से बचाए, आमीन।
📜 आयत 9-13 — सूरा अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 11
सूरा अल-मआरिज आयत 11 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : कोई किसी दोस्त को न पूछेगा गुनेहगार तो आरज़ू करेगा…सूरा आयत 11/44 — सूरा अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मआरिज सुनें, सूरा अल-मआरिज अनुवाद, सूरा अल-मआरिज mp3, सूरा अल-मआरिज pdf. आयत 9–13. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-मआरिज
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


