अल-मआरिज · 16/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ ۝١٦
Nazzaa`atal lishshawaa
📖 हिंदी अर्थ
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नज़्ज़ा'अतुन (نَزَّاعَةً): बहुत अधिक उखाड़ने वाली, खींचकर अलग करने वाली।
  • लिश्शवा (لِلشَّوَى): "शवा" खोपड़ी की खाल (सिर की जिल्द) और शरीर के वे अंग जो जानलेवा न हों, जैसे हाथ, पैर और अन्य अंग।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दृश्य का वर्णन कर रही है जो क़यामत के दिन काफ़िरों और अल्लाह से मुँह मोड़ने वालों के सामने होगा। जहन्नम की आग न केवल जलाती है, बल्कि वह अपनी अत्यधिक गर्मी और भीषणता के कारण सिर की खाल और शरीर के सभी अंगों को बुरी तरह उखाड़ कर अलग कर देती है। यह आग ऐसी है जो हर उस चीज़ को नोच लेती है जो जीवन के लिए आवश्यक नहीं है—यानी हाथ, पैर, सिर की खाल—और फिर वे अंग दोबारा बन जाते हैं, और यही क्रम हमेशा चलता रहता है। यह अज़ाब कभी खत्म नहीं होता, बल्कि हर बार नए सिरे से दोहराया जाता है ताकि पीड़ा और अधिक बढ़ती रहे।

यह वर्णन उन लोगों के लिए है जिन्होंने दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी की, उसके रसूल की बात नहीं मानी, और अपने धन को जमा करके उसमें अल्लाह का हक़ अदा नहीं किया। वे दुनिया में अपनी औलाद, माल और ताक़त पर इतराते रहे, लेकिन क़यामत के दिन वे अपने बदले में अपने बच्चों, पत्नी, भाइयों और पूरे क़बीले को भी फ़िदया (बदला) के रूप में देना चाहेंगे ताकि उस भयानक अज़ाब से बच सकें, लेकिन यह कभी स्वीकार नहीं होगा।

दावती पहलू (उपदेशात्मक संदेश):

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है, लेकिन साथ ही यह भी बताती है कि अल्लाह की रहमत कितनी बड़ी है कि उसने हमें आगाह कर दिया और तौबा का रास्ता खुला रखा। अगर हम आज अपनी गलतियों से तौबा कर लें, अपने आचरण को सुधार लें, अल्लाह की इबादत करें और उसके बताए रास्ते पर चलें, तो हम इस भयानक अंजाम से बच सकते हैं। यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की चमक-दमक और माल-दौलत कुछ भी नहीं है, असली कामयाबी उस दिन होगी जब हम अल्लाह की रहमत से जहन्नम की आग से बच जाएँ और जन्नत में दाखिल हों। अल्लाह हम सबको समझ दे और सीधे रास्ते पर चलाए। आमीन।



📜 आयत 14-18 — अल-मआरिज

14وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِ
और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें
15كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ
(मगर) ये हरगिज़ न होगा
16نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
17تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
18وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)
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अनुवाद — अल-मआरिज 16

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Tuesday, August 18, 2026

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