अल-मआरिज · 15/44
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मआरिज
كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ ۝١٥
Kallaa innahaa lazaa
📖 हिंदी अर्थ
(मगर) ये हरगिज़ न होगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • कल्ला (كَلَّا): हरगिज़ नहीं, ऐसा कदापि नहीं हो सकता।
  • लज़ा (لَظَى): यह नर्क (जहन्नम) का एक नाम है, जिसका अर्थ है भड़कती हुई आग।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस काफ़िर और अपराधी की उस कामना का खंडन करती है, जो दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी करता है, उसके हुक्मों को ठुकराता है और आख़िरत में अपने बचाव के लिए फ़िदया (मुआवज़ा) देना चाहता है। अल्लाह तआला फ़रमाता है: "हरगिज़ नहीं! यह कभी पूरा नहीं होगा।" यानी उसकी यह आरज़ू और तमन्ना हरगिज़ पूरी नहीं होगी, क्योंकि अल्लाह की पकड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "बेशक वह (आग) लज़ा है" — यानी वह आग जो भड़कती हुई, दहकती हुई और शोला-ए-आतिश है। यह नर्क का एक नाम है, जो अपनी तेज़ आग और अत्यधिक गर्मी की वजह से सर के बालों को नोच लेती है, खाल को जला डालती है और शरीर के हर हिस्से को अपनी लपटों में घेर लेती है। यह वह आग है जो उन लोगों को पुकारेगी जिन्होंने दुनिया में हक़ से मुँह मोड़ा, अल्लाह और उसके रसूल की इताअत छोड़ दी, और माल जमा करके उसे ख़ज़ानों में रखा, लेकिन अल्लाह का हक़ (ज़कात और सदक़ा) अदा नहीं किया।

दावती पहलू:

यह आयत हमें अल्लाह के अज़ाब से डराती है और बताती है कि आख़िरत का अज़ाब इतना सख्त है कि उससे बचने का कोई ज़रिया नहीं होगा — न माल, न बेटे, न दुनिया की कोई ताक़त। लेकिन अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमें मौका दिया है कि हम दुनिया में रहते हुए तौबा कर लें, अपने गुनाहों से बाज़ आएँ और अल्लाह की इताअत अपना लें। यही वह रास्ता है जो हमें उस आग से बचा सकता है। अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान और रहीम है — उसने हमें क़ुरआन और रसूल ﷺ की शिक्षाओं के ज़रिए हिदायत दी है, ताकि हम उसकी रहमत के हक़दार बनें और उस आग से महफ़ूज़ रहें। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक ढालें और उस आग से बचने की कोशिश करें, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके अज़ाब से कहीं ज़्यादा वसी' है।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-मआरिज

13وَفَصِيلَتِهِ الَّتِي تُؤْوِيهِ
और उसके कुनबे को जिसमें वह रहता था
14وَمَن فِي الْأَرْضِ جَمِيعًا ثُمَّ يُنجِيهِ
और जितने आदमी ज़मीन पर हैं सब को ले ले और उसको छुटकारा दे दें
15كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ
(मगर) ये हरगिज़ न होगा
16نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
17تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
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मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 15

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Friday, October 2, 2026

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