अल-मआरिज · 17/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ ۝١٧
Tad`oo man adbara wa tawallaa
📖 हिंदी अर्थ
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَدْعُو: पुकारती है, बुलाती है।
  • مَنْ أَدْبَرَ: जो पीछे हट गया (सत्य से मुँह मोड़ लिया)।
  • وَتَوَلَّىٰ: और उसने (सत्य से) विमुख होकर रुख बदल लिया।

व्याख्या:

यह आयत उस भयानक दृश्य का चित्रण करती है जो क़ियामत के दिन घटित होगा। जहन्नम की आग, जो अपनी भीषण गर्मी और प्रचंड लपटों के साथ धधक रही होगी, उन लोगों को अपनी ओर खींचेगी और पुकारेगी जिन्होंने दुनिया में सत्य का मार्ग छोड़ दिया था। यह पुकार केवल एक आवाज़ नहीं, बल्कि एक ऐसी वास्तविकता होगी जो उनके चेहरे, उनके अंगों और उनकी रूह को झकझोर देगी।

यहाँ "أَدْبَرَ" (पीछे हटना) और "تَوَلَّىٰ" (मुँह मोड़ना) दोनों शब्द उन लोगों की स्थिति को बयान करते हैं जिन्होंने ईमान की दावत को सुनकर भी उसे ठुकरा दिया, जिन्होंने अल्लाह के रसूल (ﷺ) की शिक्षाओं को पाकर भी उनसे किनारा कर लिया, और जिन्होंने अल्लाह के हुक्मों को जानते हुए भी उनकी अवहेलना की। ये वे लोग हैं जिन्होंने सत्य को देखकर जानबूझकर उससे विमुखता अपनाई, और अपने धन-दौलत को इकट्ठा करके उसे खज़ानों में बंद कर दिया, बिना अल्लाह का हक़ अदा किए।

कुछ मुफ़स्सिरीन ने बताया है कि जहन्नम उन्हें उनके नाम लेकर पुकारेगी, और यह पुकार उनके लिए सबसे बड़ी रुसवाई और अपमान का कारण होगी। यह वह क्षण होगा जब कोई भी छिपाने की जगह नहीं होगी, कोई सिफ़ारिश करने वाला नहीं होगा, और कोई बचाव का रास्ता नहीं होगा।


दावती पहलू:

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हमारा रुख़ किस ओर है? क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह की ओर आते हैं, या उनमें से हैं जो उससे मुँह मोड़ते हैं? यह एक चेतावनी है कि आज हम जिस सत्य को सुनकर अनदेखा कर रहे हैं, वही सत्य क़ियामत के दिन हमारे खिलाफ़ गवाही देगा। लेकिन अल्लाह की रहमत बहुत बड़ी है—उसने हमें ज़िंदगी दी है, तौबा का दरवाज़ा खुला रखा है, और हर पल हमें अपनी ओर लौटने का मौक़ा दे रहा है। आइए, हम अपने रुख़ को सुधारें, अल्लाह की ओर मुड़ें, और उसके हुक्मों को अपनी ज़िंदगी में उतारें, ताकि उस दिन हम जहन्नम की पुकार सुनने वालों में न हों, बल्कि जन्नत की ओर बुलाए जाने वालों में शामिल हों।



📜 आयत 15-19 — अल-मआरिज

15كَلَّا ۖ إِنَّهَا لَظَىٰ
(मगर) ये हरगिज़ न होगा
16نَزَّاعَةً لِّلشَّوَىٰ
जहन्नुम की वह भड़कती आग है कि खाल उधेड़ कर रख देगी
17تَدْعُو مَنْ أَدْبَرَ وَتَوَلَّىٰ
(और) उन लोगों को अपनी तरफ बुलाती होगी
18وَجَمَعَ فَأَوْعَىٰ
जिन्होंने (दीन से) पीठ फेरी और मुँह मोड़ा और (माल जमा किया)
19۞ إِنَّ الْإِنسَانَ خُلِقَ هَلُوعًا
और बन्द कर रखा बेशक इन्सान बड़ा लालची पैदा हुआ है
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17आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 17

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सूरा आयत 17/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 15–19. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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