अल-मआरिज · 24/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ ۝٢٤
Wallazeena feee amwaalihim haqqum ma`loom
📖 हिंदी अर्थ
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حَقٌّ مَّعْلُومٌ (हक़्क़ुन मा'लूम): एक निश्चित और मुक़र्रर हिस्सा जो अल्लाह ने फ़र्ज़ किया है।

तफ़सीर:

इस आयत में अल्लाह तआला उन मोमिनिन की सिफ़त बयान कर रहा है जो जन्नत के मुस्तहिक़ हैं। ये वो लोग हैं जिनके मालों में एक मुक़र्रर हिस्सा होता है — यानी ज़कात, जिसे अल्लाह ने उन पर फ़र्ज़ किया है। ये हिस्सा सिर्फ़ उनके अपने लिए नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो सवाल करते हैं और उन लोगों के लिए भी जो सवाल नहीं करते, लेकिन ज़रूरतमंद हैं — यानी ग़रीबों, मिस्कीनों और मोहताजों का हक़ है।

यहाँ अल्लाह तआला ने "हक़" का लफ़्ज़ इस्तेमाल किया है, न कि "सदक़ा" या "अता" का, ताकि ये बताया जाए कि ग़रीबों का माल में हिस्सा अल्लाह ने मुक़र्रर किया है। ये कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका हक़ है जो अदा करना हर मुसलमान पर फ़र्ज़ है। यही वो लोग हैं जो अपने माल को अल्लाह की राह में खर्च करते हैं और बुख़्ल (कंजूसी) से बचते हैं।

इस आयत में अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि माल अल्लाह की दी हुई अमानत है, और उसमें दूसरों का हिस्सा है। जो शख्स ये हिस्सा अदा करता है, उसका माल पाक होता है, उसमें बरकत होती है और वो अल्लाह के करीब होता है। ये आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि दूसरों के हक़ अदा करने का भी नाम है। जो बंदा अपने माल से दूसरों की मदद करता है, अल्लाह उससे ख़ुश होता है और उसे दुनिया और आख़िरत में इज़्ज़त देता है।

याद रखिए! ज़कात सिर्फ़ एक रस्म नहीं, बल्कि दिल की सफ़ाई और माल की पाकीज़गी का ज़रिया है। जो बंदा ये अमल करता है, वो अल्लाह के उन ख़ास बंदों में शामिल होता है जिनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है।



📜 आयत 22-26 — अल-मआरिज

22إِلَّا الْمُصَلِّينَ
मगर जो लोग नमाज़ पढ़ते हैं
23الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ
जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं
24وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के
25لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है
26وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
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अनुवाद — अल-मआरिज 24

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Tuesday, August 18, 2026

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