अल-मआरिज · 25/44
अनुवाद उच्चारण — अल-मआरिज
لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ ۝٢٥
Lissaaa `ili walmahroom
📖 हिंदी अर्थ
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّائِل (अस-साइल): वह जो माँगता है, सहायता का हक़दार।
  • المَحْرُوم (अल-महरूम): वह जो माँगने से बचता है (अपनी इज़्ज़त की वजह से) और जिसे ज़रूरत के बावजूद कमी मिलती है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन मोमिनों के गुणों का हिस्सा है जिन्हें अल्लाह ने सूरह अल-मआरिज में सराहा है। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ये नेक लोग अपने माल में एक निश्चित हिस्सा रखते हैं — यानी फ़र्ज़ ज़कात और नफ़्ली सदक़ा — जो उन लोगों के लिए मुक़र्रर है जो सवाल करते हैं (माँगते हैं) और उनके लिए भी जो सवाल नहीं करते, लेकिन ज़रूरतमंद हैं।

"अस-साइल" वह है जो अपनी हाजत के लिए लोगों से मदद माँगता है, और "अल-महरूम" वह है जो माँगने से झिझकता है, अपनी इज़्ज़त और आत्म-सम्मान की वजह से लोगों के सामने हाथ नहीं फैलाता, हालाँकि उसे सख्त ज़रूरत होती है। इस्लाम सिखाता है कि सिर्फ़ माँगने वाले को ही नहीं, बल्कि उस बे-ज़बान ज़रूरतमंद को भी देना चाहिए जो अपनी मजबूरी छिपाता है।

यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि उनका माल सिर्फ़ उनकी अपनी ज़रूरतों के लिए नहीं, बल्कि समाज के कमज़ोर तबक़े की मदद के लिए भी है। यही वह नेकी है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है और उसकी रहमत का ज़रिया बनती है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का दीन नहीं, बल्कि समाजी हमदर्दी और एक-दूसरे की मदद का दीन है। जब हम अपने माल में से उन लोगों का हक़ निकालते हैं जो माँगते हैं और उनका भी जो माँगने से शर्माते हैं, तो हम अल्लाह की रज़ा और उसकी मुहब्बत के हक़दार बनते हैं। यही वह रास्ता है जो दिलों को साफ़ करता है, समाज में भाईचारा पैदा करता है और हमें उस अज़ाब से बचाता है जो उन लोगों के लिए है जो अपने माल में दूसरों का हक़ नहीं पहचानते। अल्लाह तआला हमें इस नेकी पर अमल करने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 23-27 — अल-मआरिज

23الَّذِينَ هُمْ عَلَىٰ صَلَاتِهِمْ دَائِمُونَ
जो अपनी नमाज़ का इल्तज़ाम रखते हैं
24وَالَّذِينَ فِي أَمْوَالِهِمْ حَقٌّ مَّعْلُومٌ
और जिनके माल में माँगने वाले और न माँगने वाले के
25لِّلسَّائِلِ وَالْمَحْرُومِ
लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है
26وَالَّذِينَ يُصَدِّقُونَ بِيَوْمِ الدِّينِ
और जो लोग रोज़े जज़ा की तस्दीक़ करते हैं
27وَالَّذِينَ هُم مِّنْ عَذَابِ رَبِّهِم مُّشْفِقُونَ
और जो लोग अपने परवरदिगार के अज़ाब से डरते रहते हैं
अल-मआरिजकुरान सूची
44आयत
मक्कीRevelation
25आयत

अनुवाद — अल-मआरिज 25

सूरा अल-मआरिज आयत 25 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : लिए एक मुक़र्रर हिस्सा है

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Tuesday, August 18, 2026

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