अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- अज़वाजिहिम (أَزْوَاجِهِمْ): उनकी पत्नियाँ
- मा मलकत ऐमानुहुम (مَا مَلَكَتْ أَيْمَانُهُمْ): जो उनके स्वामित्व में हो (दासियाँ/लौंडियाँ)
- गैरु मलूमीन (غَيْرُ مَلُومِينَ): मलामत के पात्र नहीं, कोई दोष नहीं
तफसीर:
यह आयत उन मोमिनिन की विशेषताओं का वर्णन कर रही है जो अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार हैं। पिछली आयतों में बताया गया था कि सच्चे मोमिन वे हैं जो अपनी शर्मगाहों (पवित्रता) की रक्षा करते हैं। यहाँ अल्लाह तआला स्पष्ट कर रहे हैं कि इस रक्षा का मतलब यह नहीं कि वे अपनी वैध पत्नियों से दूर रहें, बल्कि उनके लिए दो मामलों में छूट है:
पहला: उनकी अपनी पत्नियाँ (अज़वाज) — जिनसे उन्होंने शादी की है, उनके साथ वैवाहिक संबंध रखना पूर्ण रूप से जायज़ और हलाल है।
दूसरा: वे दासियाँ जो उनके स्वामित्व में हों — जो युद्ध में मिली हों या किसी वैध तरीके से उनकी मिल्कियत में आई हों। इनके साथ भी संबंध रखना जायज़ है।
इन दोनों के अलावा किसी भी और स्त्री से संबंध रखना — चाहे वह रिश्तेदार हो, पड़ोसन हो, या कोई और — पूर्ण रूप से हराम है, और यही वह सीमा है जिसे मोमिन पार नहीं करते।
यहाँ अल्लाह तआला ने "غَيْرُ مَلُومِينَ" (गैरु मलूमीन) कहकर स्पष्ट कर दिया कि जो लोग केवल इन्हीं दो वैध रिश्तों तक सीमित रहते हैं, उन पर कोई दोष नहीं है, न दुनिया में और न आख़िरत में। बल्कि वे अल्लाह के आदेश का पालन करने वाले और उसकी रहमत के हक़दार हैं।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम एक फितरत (प्राकृतिक) का दीन है। यह इंसान की स्वाभाविक आवश्यकताओं को नकारता नहीं, बल्कि उन्हें पाक और पवित्र तरीके से पूरा करने का मार्ग दिखाता है। इस्लाम ने जहाँ नाजायज़ संबंधों से रोका है, वहीं जायज़ और हलाल रिश्तों को खुला दरवाज़ा दिया है। यही इस्लाम की पवित्रता और समाज की सुरक्षा का आधार है।
जो व्यक्ति इन हदों (सीमाओं) का पालन करता है, वह न केवल अपनी आत्मा को पاک رکھتا है، बल्कि समाज में बुराई और अश्लीलता के प्रसार को भी रोकता है। यही वह रास्ता है जो इंसान को जन्नत तक पहुँचाता है। अल्लाह तआला हम सभी को इन पवित्र सीमाओं पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 28-32 — अल-मआरिज
अनुवाद — अल-मआरिज 30
सूरा अल-मआरिज आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो इन लोगों की हरगिज़ मलामत न की जाएगीसूरा आयत 30/44 — अल-मआरिज المعارج (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मआरिज सुनें, अल-मआरिज अनुवाद, अल-मआरिज mp3, अल-मआरिज pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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