नूह · 17/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
وَاللَّهُ أَنبَتَكُم مِّنَ الْأَرْضِ نَبَاتًا ۝١٧
Wallaahu ambatakum minal ardi nabaataa
📖 हिंदी अर्थ
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَنبَتَكُم (अन्बतकुम): उसने तुम्हें उगाया / पैदा किया
  • نَبَاتًا (नबातन): उगाने की तरह (यहाँ इसका अर्थ है पैदा करना, क्योंकि इंसान पौधे की तरह नहीं उगता, बल्कि यह अभिव्यक्ति अल्लाह की कुदरत को बयान करती है)

विस्तृत तफसीर:

अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी असीम कुदरत और एहसान का ज़िक्र करते हुए फ़रमाता है कि उसने तुम्हें ज़मीन से पैदा किया। तुम्हारे पहले बाप आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से बनाया गया, फिर उनकी नस्ल से तुम सबको इसी ज़मीन से उगाया। जिस तरह एक छोटा सा बीज ज़मीन में डाला जाता है और फिर अल्लाह की कुदरत से वह पौधा बनकर उगता है, उसी तरह अल्लाह ने इंसान को नुत्फ़े (बूंद) से पैदा करके ज़मीन पर बसाया।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है। जिस अल्लाह ने हमें मिट्टी से पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करके उठाएगा। जिस तरह बारिश के बाद ज़मीन हरी-भरी हो जाती है और मुर्दा ज़मीन से तरह-तरह की चीज़ें उगती हैं, उसी तरह अल्लाह क़यामत के दिन हमें क़ब्रों से उठाएगा।

यह भी याद रखने की बात है कि हमारा शरीर ज़मीन से बना है और आख़िरकार उसी ज़मीन में मिल जाएगा। हमें चाहिए कि इस हक़ीक़त को समझें और अपने रब की इबादत में लगे रहें। जिस अल्लाह ने हमें पैदा किया, उसी की तरफ़ हमें लौटकर जाना है। यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत, उसकी रहमत और उसकी ताक़त पर ईमान लाने की तरग़ीब देती है।

अल्लाह ने ज़मीन को हमारे लिए बिछौना बनाया और उसमें हमारी गुज़र-बसर का सामान रखा। हमें चाहिए कि इस नेमत का शुक्र अदा करें और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी तक पहुँचाएगा।



📜 आयत 15-19 — सूरा नूह

15أَلَمْ تَرَوْا كَيْفَ خَلَقَ اللَّهُ سَبْعَ سَمَاوَاتٍ طِبَاقًا
क्या तुमने ग़ौर नहीं किया कि ख़ुदा ने सात आसमान ऊपर तलें क्यों कर बनाए
16وَجَعَلَ الْقَمَرَ فِيهِنَّ نُورًا وَجَعَلَ الشَّمْسَ سِرَاجًا
और उसी ने उसमें चाँद को नूर बनाया और सूरज को रौशन चिराग़ बना दिया
17وَاللَّهُ أَنبَتَكُم مِّنَ الْأَرْضِ نَبَاتًا
और ख़ुदा ही तुमको ज़मीन से पैदा किया
18ثُمَّ يُعِيدُكُمْ فِيهَا وَيُخْرِجُكُمْ إِخْرَاجًا
फिर तुमको उसी में दोबारा ले जाएगा और (क़यामत में उसी से) निकाल कर खड़ा करेगा
19وَاللَّهُ جَعَلَ لَكُمُ الْأَرْضَ بِسَاطًا
और ख़ुदा ही ने ज़मीन को तुम्हारे लिए फ़र्श बनाया
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
17आयत

अनुवाद — नूह 17

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Thursday, October 1, 2026

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