नूह · 27/28
अनुवाद उच्चारण — सूरा नूह
إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوا إِلَّا فَاجِرًا كَفَّارًا ۝٢٧
Innaka in tazarhum yudil loo `ibaadaka wa laa yalidooo illaa faajiran kaffaaraa
📖 हिंदी अर्थ
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
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A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
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A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَذَرْهُمْ: उन्हें छोड़ दो, उन्हें माफ़ कर दो या उन्हें जीवित रहने दो।
  • يُضِلُّوا: गुमराह करेंगे, पथभ्रष्ट करेंगे।
  • فَاجِرًا: सत्य से भटका हुआ, अवज्ञाकारी, पापी।
  • كَفَّارًا: अत्यधिक कृतघ्न, बहुत बड़ा इनकार करने वाला, जो अल्लाह की नेमतों का अत्यधिक इनकार करे।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत नूह (अलैहिस्सलाम) ने अपनी क़ौम के हिदायत से मायूस होने के बाद, अल्लाह तआला से दुआ में कहा: "ऐ मेरे रब! अगर तू इन काफ़िरों को ज़मीन पर छोड़ देगा और इन्हें हलाक नहीं करेगा, तो ये तेरे उन बंदों को, जो तुझ पर ईमान ला चुके हैं, ज़रूर गुमराह कर देंगे और उन्हें सच्चे रास्ते से भटका देंगे।"

फिर उन्होंने एक और बात बयान की: "और इन काफ़िरों की नस्ल से, इनकी पीठों और रहमों से, कोई संतान पैदा नहीं होगी जो नेक और सच्ची हो, बल्कि जो भी पैदा होगा वह सत्य से भटका हुआ, अल्लाह की अवज्ञा करने वाला और उसकी नेमतों का अत्यधिक इनकार करने वाला होगा।"

यानी इन काफ़िरों का असर सिर्फ़ उनकी अपनी ज़िंदगी तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि उनकी आने वाली नस्लें भी उन्हीं के रास्ते पर चलेंगी और ईमान वालों के लिए फ़ितना (परीक्षा) का सबब बनेंगी। यही वजह थी कि नूह (अलैहिस्सलाम) ने अल्लाह से उनके सर्वनाश की दुआ की, ताकि ज़मीन से कुफ़्र और गुमराही की जड़ें उखड़ जाएँ और ईमान वालों को सुकून और सुरक्षा मिले।

इस आयत से हमें यह सबक़ मिलता है कि बुरे लोगों का साथ और उनका वजूद सिर्फ़ उनकी अपनी हलाकत का सबब नहीं होता, बल्कि वे दूसरों को भी गुमराह करने का ज़रिया बनते हैं। इसलिए अल्लाह के नेक बंदों को चाहिए कि वे बुराई से दूर रहें और अल्लाह से हिफ़ाज़त की दुआ करें। साथ ही यह भी सीख मिलती है कि जब एक नेक इंसान अपनी क़ौम की हिदायत के लिए पूरी कोशिश कर लेता है और फिर भी वे न मानें, तो उसे अल्लाह पर भरोसा रखते हुए उसकी तरफ़ रुजू करना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही सबसे अच्छा फैसला करने वाला है।

यह दुआ हमें सिखाती है कि हमें अपने दिल को ईमान वालों के लिए मुहब्बत और काफ़िरों के लिए अल्लाह की राह में बराअत (बेज़ारी) का जज़्बा रखना चाहिए, और यह कि अल्लाह की रहमत और अज़ाब दोनों उसकी हिकमत पर मुनहसिर हैं।



📜 आयत 25-28 — सूरा नूह

25مِّمَّا خَطِيئَاتِهِمْ أُغْرِقُوا فَأُدْخِلُوا نَارًا فَلَمْ يَجِدُوا لَهُم مِّن دُونِ اللَّهِ أَنصَارًا
(आख़िर) वह अपने गुनाहों की बदौलत (पहले तो) डुबाए गए फिर जहन्नुम में झोंके गए तो उन लोगों ने ख़ुदा के सिवा किसी को अपना मददगार न पाया
26وَقَالَ نُوحٌ رَّبِّ لَا تَذَرْ عَلَى الْأَرْضِ مِنَ الْكَافِرِينَ دَيَّارًا
और नूह ने अर्ज़ की परवरदिगार (इन) काफ़िरों में रूए ज़मीन पर किसी को बसा हुआ न रहने दे
27إِنَّكَ إِن تَذَرْهُمْ يُضِلُّوا عِبَادَكَ وَلَا يَلِدُوا إِلَّا فَاجِرًا كَفَّارًا
क्योंकि अगर तू उनको छोड़ देगा तो ये (फिर) तेरे बन्दों को गुमराह करेंगे और उनकी औलाद भी गुनाहगार और कट्टी काफिर ही होगी
28رَّبِّ اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِمَن دَخَلَ بَيْتِيَ مُؤْمِنًا وَلِلْمُؤْمِنِينَ وَالْمُؤْمِنَاتِ وَلَا تَزِدِ الظَّالِمِينَ إِلَّا تَبَارًا
परवरदिगार मुझको और मेरे माँ बाप को और जो मोमिन मेरे घर में आए उनको और तमाम ईमानदार मर्दों और मोमिन औरतों को बख्श दे और (इन) ज़ालिमों की बस तबाही को और ज्यादा कर
नूहकुरान सूची
28आयत
मक्कीअवतरण स्थान
27आयत

अनुवाद — नूह 27

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Thursday, October 1, 2026

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