अल-मुज्जम्मिल · 13/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا ۝١٣
Wa ta`aaman zaa ghussa tinw wa`azaaban aleemaa
📖 हिंदी अर्थ
और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • غُصَّة — वह चीज़ जो गले में अटक जाए और नीचे न उतरे, जिससे साँस रुक जाए।
  • ذَا غُصَّةٍ — ऐसा भोजन जो गले में फँस जाए और निगला न जा सके।
  • أَلِيمًا — बहुत दर्दनाक और तकलीफ़देह।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला इस आयत में काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों के लिए उस भयानक अज़ाब का ज़िक्र कर रहे हैं जो उनके लिए आख़िरत में तैयार किया गया है। यह वो लोग हैं जो दुनिया में अल्लाह के दीन से मुँह मोड़ते हैं, हक़ को झुठलाते हैं और अपनी ज़िंदगी को अपनी मर्ज़ी के मुताबिक़ गुज़ारते हैं। उनके लिए जहन्नम में भारी बेड़ियाँ होंगी जो उनके हाथ-पैरों में डाली जाएँगी, और दहकती हुई आग होगी जिसमें वे जलाए जाएँगे।

फिर अल्लाह फ़रमाता है कि उनके लिए "ऐसा खाना होगा जो गले में अटक जाएगा" — यानी बेहद कड़वा, बदबूदार और खारा खाना, जो निगलने की कोशिश करेंगे तो गले में फँस जाएगा, न ऊपर आएगा न नीचे उतरेगा। यह उनके उस अत्याचार का बदला है जो उन्होंने दुनिया में अल्लाह के बंदों के साथ किया — उन्होंने यतीमों का हक़ मारा, मिस्कीनों को खाना नहीं खिलाया, और दूसरों को भी भलाई से रोका। आज उन्हें ऐसा खाना दिया जाएगा जो उनके गले में फँसकर उन्हें तड़पाएगा।

और इस सबके ऊपर "दर्दनाक अज़ाब" होगा — यानी अलग से तकलीफ़देह सज़ा, जो उनके शरीर और रूह दोनों को झुलसा देगी। यह अज़ाब इतना सख्त होगा कि उसकी हल्की सी झलक भी दुनिया के किसी इंसान के बस की बात नहीं।


नसीहत और दावत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम आज जो भी कर रहे हैं, उसका नतीजा कल हमें भुगतना पड़ेगा। अल्लाह ने हमें दुनिया में भेजा है तो आज़माइश के लिए, और हमें यह मौक़ा दिया है कि हम अपनी ज़िंदगी को अच्छे कामों से सजाएँ। अगर हम आज अल्लाह के हुक्मों को मानेंगे, नमाज़ पढ़ेंगे, रोज़ा रखेंगे, लोगों के हक़ अदा करेंगे, और अपने मुँह से झूठ और ग़ीबत को दूर रखेंगे — तो अल्लाह हमें जन्नत की नेमतों से नवाज़ेगा, जहाँ हर तरह की खुशियाँ और आराम है।

लेकिन अगर हमने दुनिया को ही सब कुछ समझ लिया और आख़िरत को भुला दिया, तो वो दिन बहुत बुरा होगा जब हम अपने किए पर पछताएँगे और फिर वापसी का कोई रास्ता नहीं होगा। यह आयत हमें डराती भी है और समझाती भी है — कि अभी वक़्त है, तौबा कर लो, अल्लाह की रहमत की तरफ लौट आओ। अल्लाह बड़ा मेहरबान है, वो अपने बंदों की तौबा क़बूल करता है और गुनाहों को माफ़ कर देता है। आओ, हम सब अपनी ज़िंदगी को सुधारें और उस दिन की तैयारी करें जब कोई किसी के काम न आएगा।



📜 आयत 11-15 — अल-मुज्जम्मिल

11وَذَرْنِي وَالْمُكَذِّبِينَ أُولِي النَّعْمَةِ وَمَهِّلْهُمْ قَلِيلًا
और मुझे उन झुठलाने वालों से जो दौलतमन्द हैं समझ लेने दो और उनको थोड़ी सी मोहलत दे दो
12إِنَّ لَدَيْنَا أَنكَالًا وَجَحِيمًا
बेशक हमारे पास बेड़ियाँ (भी) हैं और जलाने वाली आग (भी)
13وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا
और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)
14يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे
15إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
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13आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 13

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Tuesday, August 18, 2026

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