अल-मुज्जम्मिल · 14/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا ۝١٤
Yawma tarjuful ardu waljibaalu wa kaanatil jibaalu kaseebam maheelaa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَرْجُفُ: काँपना, ज़ोर से हिलना-डुलना।
  • كَثِيبًا: रेत का टीला, जो जमा हुआ हो।
  • مَّهِيلًا: बहता हुआ, ढीला और बिखरने वाला रेत।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उस भयानक दिन का वर्णन कर रही है जब अल्लाह तआला अपनी क़ुदरत से इस कायनात को बदल देगा। उस दिन ज़मीन और पहाड़ ऐसे काँपेंगे और हिलेंगे कि उनका स्थिर रहना नामुमकिन हो जाएगा। जो पहाड़ आज अपनी बुलंदी और सख़्ती के लिए मशहूर हैं, वे उस दिन बिखर कर रेत के ढीले टीलों की तरह हो जाएँगे, जो हवा के झोंके से उड़ते और बहते फिरते हों। यानी जो चीज़ें आज सबसे ज़्यादा मज़बूत और पक्की लगती हैं, अल्लाह के हुक्म से वे सबसे नाज़ुक और बेबस हो जाएँगी।

यह मंज़र उस दिन की हौलनाकी को बयान करता है जब हर इंसान अपने किए गए आमाल के सामने खड़ा होगा। यह आयत हमें याद दिलाती है कि दुनिया की यह ज़िंदगी और इसकी चमक-दमक कुछ दिनों की है। जो लोग आज अल्लाह के हुक्म से ग़ाफ़िल हैं और दुनिया के मोह में डूबे हुए हैं, उन्हें इस दिन से डरना चाहिए और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत में गुज़ारना चाहिए।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सीख देती है कि इस दुनिया की कोई भी चीज़ हमेशा नहीं रहने वाली। पहाड़ जैसी सख़्त चीज़ भी उस दिन रेत की तरह बिखर जाएगी। तो हमें अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के लिए ढालना चाहिए, नेक काम करने चाहिए, और उस दिन की तैयारी करनी चाहिए जब कोई दौलत, कोई औलाद, कोई ओहदा काम नहीं आएगा। सिर्फ़ ईमान और नेक आमाल ही हमारी नजात का ज़रिया होंगे। अल्लाह तआला हम सबको उस दिन की हौलनाकी से बचाए और अपनी रहमत से नवाज़े। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 12-16 — अल-मुज्जम्मिल

12إِنَّ لَدَيْنَا أَنكَالًا وَجَحِيمًا
बेशक हमारे पास बेड़ियाँ (भी) हैं और जलाने वाली आग (भी)
13وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا
और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)
14يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे
15إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
अल-मुज्जम्मिलकुरान सूची
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मक्कीRevelation
14आयत

अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 14

सूरा अल-मुज्जम्मिल आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत…

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Tuesday, August 18, 2026

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