अल-मुज्जम्मिल · 15/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا ۝١٥
Innaa arsalnaaa ilaikum rasoolan shahidan `alikum kamaaa arsalnaaa ilaa Fir`awna Rasoolna
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • रसूलन – संदेशवाहक, पैगंबर
  • शाहिदन – गवाह, साक्षी देने वाला
  • फ़िरऔन – मिस्र का अत्याचारी शासक

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला इस आयत में मक्का के काफ़िरों को संबोधित करते हुए फ़रमाता है कि हमने तुम्हारी ओर एक रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) भेजा है, जो क़ियामत के दिन तुम्हारे ऊपर गवाह होंगे। यानी वे उस दिन गवाही देंगे कि उन्होंने तुम्हें अल्लाह का संदेश पूरा पहुँचा दिया था, और तुममें से जिन्होंने कुफ़्र और नाफ़रमानी की, उनके ख़िलाफ़ गवाही देंगे। यह बात उसी तरह है जैसे हमने फ़िरऔन के पास मूसा (अलैहिस्सलाम) को रसूल बनाकर भेजा था। फ़िरऔन ने मूसा को झुठलाया, उनकी बात नहीं मानी और सरकशी की, तो अल्लाह ने उसे ऐसी सख़्त पकड़ में पकड़ा कि वह डूबकर हलाक हो गया।

इस आयत में अल्लाह तआला मक्का वालों को डरा रहा है कि जिस तरह फ़िरऔन का अंजाम बुरा हुआ, उसी तरह अगर तुमने मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नाफ़रमानी की और उन्हें झुठलाया, तो तुम भी उसी अज़ाब का शिकार हो सकते हो। यह एक बड़ी चेतावनी है कि अल्लाह के रसूलों की नाफ़रमानी किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं की जाती।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के रसूलों की मोहब्बत और इताअत (आज्ञाकारिता) ही हमारी नजात का ज़रिया है। जिसने भी रसूल की बात मानी, उसने अल्लाह की बात मानी और उसे कामयाबी मिली। और जिसने रसूल की नाफ़रमानी की, उसका अंजाम फ़िरऔन जैसा बुरा हुआ। आज भी हमारे लिए यही रास्ता है कि हम अपने प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलें, उनके बताए रास्ते पर क़दम बढ़ाएँ, ताकि दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों। याद रखिए, रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) हमारे लिए रहमत बनकर आए थे, और उनकी पैरवी ही हमें जहन्नुम की आग से बचा सकती है।

🎧 सुनें

📜 आयत 13-17 — अल-मुज्जम्मिल

13وَطَعَامًا ذَا غُصَّةٍ وَعَذَابًا أَلِيمًا
और गले में फँसने वाला खाना (भी) और दुख देने वाला अज़ाब (भी)
14يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे
15إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
17فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا
तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा
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अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 15

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Tuesday, August 18, 2026

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