अल-मुज्जम्मिल · 16/20
अनुवाद उच्चारण — अल-मुज्जम्मिल
فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا ۝١٦
Fa`asaa Fir`awnur Rasoola fa akhaznaahu akhzanw wabeelaa
📖 हिंदी अर्थ
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَعَصَىٰ: उसने नाफ़रमानी की, आज्ञा का उल्लंघन किया।
  • الرَّسُولَ: अल्लाह के भेजे हुए पैग़ंबर (हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम)।
  • فَأَخَذْنَاهُ: तो हमने उसे पकड़ लिया।
  • أَخْذًا وَبِيلًا: सख्त, भारी और विनाशकारी पकड़ — ऐसी पकड़ जिससे बचना नामुमकिन हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम और फ़िरऔन के क़िस्से का एक अहम हिस्सा बयान कर रहे हैं। फ़िरऔन ने अपने रब के भेजे हुए रसूल (मूसा अलैहिस्सलाम) की बात नहीं मानी, उसकी नाफ़रमानी की और उसे झुठलाया। उसने घमंड और सरकशी में अल्लाह के हुक्म को क़बूल नहीं किया। नतीजा यह हुआ कि अल्लाह ने उसे ऐसी सख्त पकड़ में पकड़ा जो बहुत भारी और विनाशकारी थी — उसे समुद्र में डुबोकर हमेशा के लिए ख़त्म कर दिया, और आख़िरत में उसके लिए जहन्नुम का अज़ाब भी मुक़र्रर है।

यहाँ अल्लाह तआला मक्का के काफ़िरों को ख़िताब करके फ़रमा रहे हैं कि हमने तुम्हारी तरफ़ मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) को रसूल बनाकर भेजा है, जैसे हमने मूसा अलैहिस्सलाम को फ़िरऔन के पास भेजा था। फ़िरऔन ने अपने रसूल की नाफ़रमानी की तो उसे ऐसा अंजाम भुगतना पड़ा। यह एक सख्त तनबीह और ख़तरनाक चेतावनी है कि अगर तुम लोग भी अपने रसूल (मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की नाफ़रमानी करोगे, तो तुम पर भी वैसा ही अज़ाब आ सकता है जैसा फ़िरऔन और उसकी क़ौम पर आया।

यह आयत हमें बहुत बड़ा सबक़ देती है कि अल्लाह के रसूलों की नाफ़रमानी कभी सज़ा के बग़ैर नहीं रहती। फ़िरऔन जैसा ताक़तवर और सल्तनत वाला बादशाह भी जब अल्लाह के रसूल के मुक़ाबले में खड़ा हुआ, तो उसकी सारी ताक़त और सल्तनत उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकी। यह हर ज़माने के लोगों के लिए इबरत है कि अल्लाह की नाफ़रमानी और उसके रसूल की मुख़ालफ़त का अंजाम बहुत बुरा होता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने नबी मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नत पर चलें, उनके बताए हुए रास्ते पर क़दम बढ़ाएँ, और उनकी नाफ़रमानी से बचें। क्योंकि रसूल की इताअत (आज्ञापालन) ही अल्लाह की इताअत है, और रसूल की नाफ़रमानी अल्लाह की नाफ़रमानी है। जो लोग रसूल की पैरवी करते हैं, वही कामयाब और नजात पाने वाले हैं, और जो उनकी मुख़ालफ़त करते हैं, उनका अंजाम फ़िरऔन जैसा हो सकता है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 14-18 — अल-मुज्जम्मिल

14يَوْمَ تَرْجُفُ الْأَرْضُ وَالْجِبَالُ وَكَانَتِ الْجِبَالُ كَثِيبًا مَّهِيلًا
जिस दिन ज़मीन और पहाड़ लरज़ने लगेंगे और पहाड़ रेत के टीले से भुर भुरे हो जाएँगे
15إِنَّا أَرْسَلْنَا إِلَيْكُمْ رَسُولًا شَاهِدًا عَلَيْكُمْ كَمَا أَرْسَلْنَا إِلَىٰ فِرْعَوْنَ رَسُولًا
(ऐ मक्का वालों) हमने तुम्हारे पास (उसी तरह) एक रसूल (मोहम्मद) को भेजा जो तुम्हारे मामले में गवाही दे जिस तरह फिरऔन के पास एक रसूल (मूसा) को भेजा था
16فَعَصَىٰ فِرْعَوْنُ الرَّسُولَ فَأَخَذْنَاهُ أَخْذًا وَبِيلًا
तो फिरऔन ने उस रसूल की नाफ़रमानी की तो हमने भी (उसकी सज़ा में) उसको बहुत सख्त पकड़ा
17فَكَيْفَ تَتَّقُونَ إِن كَفَرْتُمْ يَوْمًا يَجْعَلُ الْوِلْدَانَ شِيبًا
तो अगर तुम भी न मानोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से क्यों कर बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा बना देगा
18السَّمَاءُ مُنفَطِرٌ بِهِ ۚ كَانَ وَعْدُهُ مَفْعُولًا
जिस दिन आसमान फट पड़ेगा (ये) उसका वायदा पूरा होकर रहेगा
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अनुवाद — अल-मुज्जम्मिल 16

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Tuesday, August 18, 2026

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