अल-मुद्दस्सिर · 14/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
وَمَهَّدتُّ لَهُ تَمْهِيدًا ۝١٤
Wa mahhattu lahoo tamheeda
📖 हिंदी अर्थ
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَهَّدْتُ: मैंने आसान कर दिया, फैला दिया, तैयार कर दिया।
  • تَمْهِيدًا: पूरी तरह से आसानी, खूब अच्छी तरह से बिछा देना (यानी हर तरह की सुख-सुविधाएँ मुहैया करा देना)।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को दिलासा देते हुए उस सरकश और हठीले इंसान (वलीद बिन मुग़ीरा) का ज़िक्र कर रहा है, जिसने इस्लाम और क़ुरआन का विरोध करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। अल्लाह फ़रमाता है कि मैंने उसे अकेला पैदा किया था, न उसके पास माल था न औलाद। फिर मैंने उसे खूब फैला हुआ माल दिया, उसकी दौलत को बढ़ाया, उसे लंबी उम्र दी, उसे मक्का में हमेशा साथ रहने वाली औलाद दी, और उसके लिए ज़िंदगी के सारे साधन और राहें आसान कर दीं। उसके घर, उसकी तिजारत, उसकी इज़्ज़त, सब कुछ मैंने उसे अता किया। यानी मैंने उसे हर तरह की दुनियावी खुशहाली और सुख-सुविधाएँ देकर उसके लिए ज़िंदगी का बिस्तर बिछा दिया, कोई कमी नहीं छोड़ी।

लेकिन इस सबके बावजूद उसने मेरा शुक्र अदा नहीं किया, बल्कि उसकी नीयत यह है कि मैं उसे और देता रहूँ, और वह मेरी नेमतों को नकारते हुए मेरे दीन और मेरे रसूल के खिलाफ़ सर उठाए रहे। वह समझता है कि यह सब कुछ उसकी अपनी काबिलियत से मिला है, और वह यह भी चाहता है कि मैं उसे और ज़्यादा दूँ, हालाँकि उसने कुफ़्र और इन्कार का रास्ता इख्तियार किया है।

यह आयत उन लोगों के लिए बड़ी सीख है जो दुनिया की नेमतों को देखकर यह समझते हैं कि यह अल्लाह की मुहब्बत की निशानी है। हक़ीक़त यह है कि अल्लाह जिसे चाहता है दुनिया देता है, लेकिन यह देना इम्तिहान होता है, न कि इज़्ज़त। जो शख्स इन नेमतों को पाकर अल्लाह का शुक्र नहीं करता और उसके दीन के खिलाफ़ ज़िद पर अड़ा रहता है, उसके लिए यही नेमतें उसकी सज़ा का ज़रिया बन जाती हैं। अल्लाह उसे ढील देता है, लेकिन जब पकड़ता है तो ऐसी पकड़ता है कि कोई नहीं बचा सकता।

इससे हमें यह सबक मिलता है कि हमें दुनिया की चकाचौंध में नहीं खोना चाहिए। अल्लाह ने हमें जो कुछ भी दिया है—माल, औलाद, आराम, सुविधाएँ—यह सब उसकी रहमत है, लेकिन इसका सही इस्तेमाल यह है कि हम उसके शुक्रगुज़ार बनें, उसकी इबादत करें, और उसके दीन की खिदमत में लगाएँ। जो इंसान इन नेमतों को पाकर अल्लाह से बग़ावत करता है, वह अपने लिए तबाही मोल लेता है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें नेमतों का सही इस्तेमाल करने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो नेमत पाकर सरकश हो जाते हैं।



📜 आयत 12-16 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

12وَجَعَلْتُ لَهُ مَالًا مَّمْدُودًا
और उसे बहुत सा माल दिया
13وَبَنِينَ شُهُودًا
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)
14وَمَهَّدتُّ لَهُ تَمْهِيدًا
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
15ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
16كَلَّا ۖ إِنَّهُ كَانَ لِآيَاتِنَا عَنِيدًا
ये हरगिज़ न होगा ये तो मेरी आयतों का दुश्मन था
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
14आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 14

सूरा अल-मुद्दस्सिर आयत 14 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी

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Friday, October 2, 2026

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