अल-मुद्दस्सिर · 13/56
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुद्दस्सिर
وَبَنِينَ شُهُودًا ۝١٣
Wa baneena shuhoodaa
📖 हिंदी अर्थ
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • बनीन (بَنِينَ): बेटे, संतान।
  • शुहूदन (شُهُودًا): हाज़िर रहने वाले, साथ में मौजूद रहने वाले, जो कभी जुदा न हों।

विस्तृत तफ़सीर:

यह आयत उस व्यक्ति के बारे में है जो हक़ (सत्य) का विरोधी और इस्लाम का दुश्मन था — वलीद बिन मुग़ीरा। अल्लाह तआला फ़रमाता है कि मैंने उसे अकेला पैदा किया था, न धन था न औलाद, फिर मैंने उसे बहुत सारा माल दिया और उसे ऐसे बेटे दिए जो हमेशा उसके साथ रहते थे, मक्का में मौजूद रहते थे और उसकी महफ़िलों में शामिल होते थे। वे बेटे उसके पास ही रहते, कभी उससे दूर नहीं जाते थे, ताकि उसे जीवन की खुशियाँ और आराम मिले। अल्लाह ने उसके लिए जीवन के सारे साधन आसान कर दिए, फिर भी उसने कृतघ्नता दिखाई और कहा कि मुझे और माल और और औलाद दो। वह अल्लाह की नेअमतों का इनकार करने वाला और क़ुरआन का विरोधी बन गया।

अल्लाह तआला फ़रमाता है: यह उसकी उम्मीदें झूठी हैं, मैं उसे और नहीं दूँगा। उसका अंजाम यह है कि मैं उस पर सख्त अज़ाब डालूँगा, ऐसी मुश्किल और भारी सज़ा जिससे उसे कोई राहत न मिलेगी। यह सिर्फ़ वलीद बिन मुग़ीरा की ही बात नहीं है, बल्कि हर उस शख्स के लिए नसीहत है जो हक़ का विरोध करता है और अल्लाह की नेअमतों को पाकर भी नाशुक्री करता है।

दावती पहलू:

इस आयत से हमें बहुत बड़ा सबक मिलता है — अल्लाह तआला जिसे चाहता है माल और औलाद देता है, लेकिन यह नेअमतें इम्तिहान हैं, हमेशा रहने वाली नहीं। जिसे अल्लाह ने माल और औलाद दी है, उसे चाहिए कि वह अल्लाह का शुक्र अदा करे, उसकी नेअमतों को पहचाने और हक़ के साथ खड़ा रहे। माल और औलाद पर घमंड करना, हक़ का इनकार करना और अल्लाह से बेरुखी करना इंसान को तबाही की तरफ ले जाता है। याद रखिए, असली कामयाबी उसी की है जो अल्लाह की दी हुई नेअमतों का सही इस्तेमाल करे और उसकी राह में खर्च करे। क़ुरआन हमें सिखाता है कि दुनिया की चीज़ें अस्थायी हैं, लेकिन अल्लाह की रज़ा और उसका दीन हमेशा रहने वाला है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की बताई हुई राह पर चलाएँ और उसकी नेअमतों के शुक्रगुज़ार बनें।



📜 आयत 11-15 — सूरा अल-मुद्दस्सिर

11ذَرْنِي وَمَنْ خَلَقْتُ وَحِيدًا
(ऐ रसूल) मुझे और उस शख़्श को छोड़ दो जिसे मैने अकेला पैदा किया
12وَجَعَلْتُ لَهُ مَالًا مَّمْدُودًا
और उसे बहुत सा माल दिया
13وَبَنِينَ شُهُودًا
और नज़र के सामने रहने वाले बेटे (दिए)
14وَمَهَّدتُّ لَهُ تَمْهِيدًا
और उसे हर तरह के सामान से वुसअत दी
15ثُمَّ يَطْمَعُ أَنْ أَزِيدَ
फिर उस पर भी वह तमाअ रखता है कि मैं और बढ़ाऊँ
अल-मुद्दस्सिरकुरान सूची
56आयत
मक्कीअवतरण स्थान
13आयत

अनुवाद — अल-मुद्दस्सिर 13

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Thursday, October 1, 2026

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