अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- "मन राक़िन": क्या कोई झाड़-फूँक करने वाला है? (अर्थात् क्या कोई ऐसा व्यक्ति है जो इस मरणासन्न व्यक्ति को झाड़-फूँक करके या दवा देकर बचा सके?)
विस्तृत तफ़सीर:
जब मृत्यु का समय आ जाता है और रूह (आत्मा) सीने तक पहुँच जाती है, तो वहाँ उपस्थित लोगों की हालत देखने लायक़ होती है। हर तरफ़ चीख-पुकार मच जाती है, लोग घबरा जाते हैं और एक दूसरे से कहते हैं: "क्या कोई झाड़-फूँक करने वाला है? क्या कोई वैद्य या हकीम है जो इसकी जान बचा सके?" लेकिन अफ़सोस! यह सब बेकार है। जब अल्लाह का फ़ैसला आ जाता है, तो कोई दवा, कोई झाड़-फूँक, कोई इलाज़ काम नहीं आता।
यह वह घड़ी है जब इंसान को अपनी बेबसी और लाचारी का पूरा एहसास होता है। दुनिया की सारी ताक़तें, सारे डॉक्टर, सारे वसीले — सब नाकाफ़ी साबित होते हैं। मरने वाला व्यक्ति फ़रिश्तों को देखता है, उसकी आँखें खुली रह जाती हैं, और वह समझ जाता है कि अब दुनिया से विदाई का वक़्त आ गया है।
यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखा रहे हैं कि मौत की घड़ी में इंसान की सारी कोशिशें, सारे इलाज़, सारी दौलत — कुछ भी काम नहीं आती। केवल अल्लाह की रहमत और उसका फ़ैसला ही चलता है। इसलिए हमें चाहिए कि इस ज़िंदगी में ही अल्लाह की राह पर चलें, उसके हुक्मों को मानें, ताकि मौत के वक़्त हमारा दिल परेशान न हो और हमारा अंजाम जन्नत हो।
याद रखिए! यह दुनिया की आख़िरी घड़ी और आख़िरत की पहली घड़ी का मिलन है। जो व्यक्ति दुनिया में नेक अमल करता है, उसके लिए यह घड़ी रहमत बन जाती है, और जो ग़ाफ़िल रहा, उसके लिए यही घड़ी अज़ाब का आग़ाज़ बन जाती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हम सबको अच्छी मौत दे और हमारा अंजाम जन्नत बनाए। आमीन।
📜 आयत 25-29 — अल-क़ियामा
अनुवाद — अल-क़ियामा 27
सूरा अल-क़ियामा आयत 27 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहा जाएगा कि (इस वक्त) क़ोई झाड़ फूँक करने…सूरा आयत 27/40 — अल-क़ियामा القيامة (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-क़ियामा सुनें, अल-क़ियामा अनुवाद, अल-क़ियामा mp3, अल-क़ियामा pdf. आयत 25–29. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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