अल-मुरसलात · 19/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝١٩
Wailunw yawma `izil lil mukazzibeen
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
0:00
0:00
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • वैल (وَيْلٌ): विनाश, हलाकत और सख्त अज़ाब।
  • यौमइज़िन (يَوْمَئِذٍ): उस दिन (यानी क़ियामत के दिन)।
  • लिल्मुकज़्ज़िबीन (لِلْمُكَذِّبِينَ): झुठलाने वालों के लिए, यानी जो लोग अल्लाह के दीन, उसके रसूलों और आख़िरत के दिन को नहीं मानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला उन लोगों के लिए विनाश और सख्त अज़ाब की धमकी दे रहा है जो उसके दीन, उसकी नबुव्वत, क़ियामत के दिन और हिसाब-किताब को झुठलाते हैं। यह वह लोग हैं जिन्होंने अल्लाह को अकेला इबादत के लायक़ नहीं माना, उसके रसूलों पर ईमान नहीं लाए और मरने के बाद दोबारा जीवित होकर अल्लाह के सामने हाज़िर होने को महज़ एक कल्पना समझा।

अल्लाह तआला ने इस सूरह में इसी वाक्य को दस बार दोहराया है, ताकि लोगों को यह बात अच्छी तरह समझ आ जाए कि जो लोग अल्लाह की आयतों और उसके वादों को झुठलाते हैं, उनका अंजाम कितना भयानक है। यह दोहराव सिर्फ़ डराने के लिए नहीं, बल्कि इसलिए है कि इंसान अपनी ग़फ़लत से जागे, अपने रब की तरफ़ लौटे और उस रास्ते पर चले जो उसे जहन्नुम की आग से बचाकर जन्नत की राहत तक पहुँचाता है।

यह आयत हमारे लिए एक बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह तआला ने अपने बंदों पर बड़ा रहम किया है कि उन्हें दुनिया में ही आगाह कर दिया कि झुठलाने का अंजाम क्या है। अगर हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह के हुक्मों को मानें, उसके रसूल ﷺ की सुन्नत पर चलें और आख़िरत के दिन पर पक्का ईमान रखें, तो हम उस विनाश से बच जाएँगे जिसका ज़िक्र इस आयत में किया गया है।

याद रखिए, अल्लाह तआला बड़ा मेहरबान है, वह चाहता है कि उसके बंदे सीधे रास्ते पर चलें और उसकी रहमत के हक़दार बनें। जो लोग उसकी बात मान लें, उनके लिए जन्नत की ख़ुशख़बरी है, और जो उसे झुठलाएँ, उनके लिए इस आयत में साफ़ तौर पर विनाश की चेतावनी है। आइए, हम सब इस चेतावनी से सबक़ सीखें और अपने रब की इबादत और उसकी राह में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें, ताकि क़ियामत के दिन हम उन लोगों में से न हों जिनके लिए यह विनाश का वादा है।



📜 आयत 17-21 — सूरा अल-मुरसलात

17ثُمَّ نُتْبِعُهُمُ الْآخِرِينَ
फिर उनके पीछे पीछे पिछलों को भी चलता करेंगे
18كَذَٰلِكَ نَفْعَلُ بِالْمُجْرِمِينَ
हम गुनेहगारों के साथ ऐसा ही किया करते हैं
19وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
20أَلَمْ نَخْلُقكُّم مِّن مَّاءٍ مَّهِينٍ
क्या हमने तुमको ज़लील पानी (मनी) से पैदा नहीं किया
21فَجَعَلْنَاهُ فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक मुअय्यन वक्त तक
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
19आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 19

सूरा अल-मुरसलात आयत 19 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है

सूरा आयत 19/50 — सूरा अल-मुरसलात المرسلات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-मुरसलात सुनें, सूरा अल-मुरसलात अनुवाद, सूरा अल-मुरसलात mp3, सूरा अल-मुरसलात pdf. आयत 17–21. हिंदी अर्थ: اردو.





पवित्र क़ुरआन


Thursday, October 1, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए