अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- المُحْسِنِينَ: अर्थात वे लोग जो अपने अमल (कर्मों) को अच्छे ढंग से करते हैं, अल्लाह की इबादत इस तरह करते हैं जैसे वे उसे देख रहे हैं, और अपने आचरण और व्यवहार में भलाई को अपनाते हैं। यह ईमान और अमल दोनों में अच्छाई को शामिल करता है।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि जिस तरह हमने पिछली आयतों में नेक लोगों के लिए जन्नत के सुख-साधन, घने साये, बहते चश्मे, मनपसंद फल और आरामदायक जीवन का वर्णन किया है, उसी तरह हम उन लोगों को बदला देते हैं जो मुहसिन हैं — यानी वे लोग जिन्होंने अपनी नीयत को खालिस किया, अपने अक़ीदे (विश्वास) को सही किया, और अपने अमल को अल्लाह की रज़ा के अनुसार ढाला। वे अल्लाह से डरते थे, उसके हुक्मों की पालना करते थे और उसकी मनाही से बचते थे। उन्होंने दुनिया में भलाई की, तो आख़िरत में उन्हें भलाई का बदला मिलेगा।
यह अल्लाह का अटल नियम है — जो कोई भी अपने कर्मों में अच्छाई अपनाएगा, अल्लाह उसे उसके अच्छे कर्मों का पूरा-पूरा बदला देगा, बिना किसी कमी के। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को कभी नहीं तोड़ता।
इस आयत में एक बड़ी खुशखबरी है — कि अल्लाह नेक लोगों के साथ अपने इनाम और रहमत का सलूक करता है। यहाँ "मुहसिन" का ज़िक्र इसलिए किया गया है ताकि हर मुसलमान कोशिश करे कि वह सिर्फ़ मुसलमान ही न रहे, बल्कि मुहसिन बने — यानी अपनी इबादत, अपने अख़लाक़ (आचरण), अपने मामलात (लेन-देन) और अपने रिश्तों में सबसे अच्छा बनने की कोशिश करे।
और फिर इसके तुरंत बाद अल्लाह फ़रमाता है: "उस दिन झुठलाने वालों के लिए विनाश और अफ़सोस है" — यानी जो लोग इस दिन (क़यामत) और इसके इनाम-अज़ाब को झुठलाते हैं, उनके लिए सख्त अज़ाब और बर्बादी है। यह तुलना दिखाती है कि नेकी का अंजाम क्या है और इनकार का अंजाम क्या है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और इनाम का दरवाज़ा हर उस इंसान के लिए खुला है जो भलाई की राह अपनाए। चाहे इंसान ने पहले कितनी भी गलतियाँ की हों, अगर वह सच्चे दिल से तौबा करके अच्छे काम करने लगे, तो अल्लाह उसे अपने करीबियों में शामिल कर लेता है। यह आयत हमें अच्छाई की तरफ बुलाती है — कि हम अपने अंदर "इहसान" (अच्छाई) की सिफ़त पैदा करें, क्योंकि अल्लाह मुहसिनों के साथ है और उन्हें बेहतरीन बदला देने वाला है।
📜 आयत 42-46 — अल-मुरसलात
अनुवाद — अल-मुरसलात 44
सूरा अल-मुरसलात आयत 44 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैंसूरा आयत 44/50 — अल-मुरसलात المرسلات (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मुरसलात सुनें, अल-मुरसलात अनुवाद, अल-मुरसलात mp3, अल-मुरसलात pdf. आयत 42–46. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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