अल-मुरसलात · 45/50
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मुरसलात
وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ ۝٤٥
Wailuny yawma `izil lilmuzkazzibeen
📖 हिंदी अर्थ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • वैल (ويل): विनाश, हलाकत, बड़ी बुराई और कठोर यातना।
  • यौमइज़िन (يومئذ): उस दिन, अर्थात् क़ियामत के दिन।
  • लिल्मुकज़्ज़िबीन (للمكذبين): झुठलाने वालों के लिए, जो अल्लाह के दीन, उसके रसूलों और आख़िरत के दिन को नहीं मानते।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला ने उन लोगों के लिए सख्त चेतावनी और विनाश की घोषणा की है जो उस दिन को झुठलाते हैं। यहाँ "वैल" का शब्द बहुत गहरा अर्थ रखता है — यह हर उस बुराई, यातना और दुख को समेटे हुए है जो उस दिन झुठलाने वालों के हिस्से में आएगी।

यह आयत उन लोगों के लिए है जो अल्लाह के वादे को झूठ समझते हैं, जो क़ियामत, हिसाब-किताब, जन्नत और जहन्नम पर विश्वास नहीं करते। उन्होंने दुनिया में अपनी इच्छाओं को पूजा, सत्य को झुठलाया और नबियों के संदेश का मज़ाक उड़ाया। उनके लिए उस दिन ऐसा विनाश है जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि इस आयत से पहले अल्लाह ने मुत्तक़ियों (परहेज़गारों) के लिए जो इनाम बयान किए हैं — छायादार पेड़, बहते चश्मे, मनपसंद फल, लज़ीज़ खाना और आरामदायक पीना — उसके बाद यह चेतावनी दी गई है। यह बताता है कि अल्लाह का इंसाफ़ बिल्कुल स्पष्ट है: जो लोग उससे डरे और उसकी आज्ञाओं का पालन किया, उनके लिए खुशियाँ हैं; और जिन्होंने उसके दीन को झुठलाया, उनके लिए विनाश है।

यह आयत हर उस इंसान के लिए एक ज़ोरदार पुकार है जो आज लापरवाही में जी रहा है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है: क्या हम उन लोगों में से हैं जो अल्लाह के वादे पर यक़ीन रखते हैं और उसके अनुसार अपनी ज़िंदगी बनाते हैं, या हम उनमें से हैं जो इसे सिर्फ़ एक कहानी समझकर दरकिनार कर देते हैं?

अल्लाह तआला ने कुरआन में कई बार इसी शैली को दोहराया है — पहले मोमिनों के लिए खुशखबरी, फिर मुन्किरों के लिए चेतावनी। यह अल्लाह की रहमत और उसके इंसाफ़ का अद्भुत संगम है। वह चाहता है कि बंदा डरकर उसकी ओर लौट आए, क्योंकि वह तौबा क़बूल करने वाला और माफ़ करने वाला है।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि आज का फैसला हमारे हाथ में है। अगर हम चाहें तो उन लोगों में शामिल हो सकते हैं जिनके लिए उस दिन खुशियाँ हैं, और अगर हम चाहें तो उनमें से बन सकते हैं जिनके लिए विनाश है। अल्लाह ने हमें अक्ल दी है, कुरआन दिया है, और रसूल भेजे हैं — अब फैसला हमारा है कि हम किस रास्ते पर चलते हैं।

आइए हम अपनी ज़िंदगी को देखें: क्या हम उन लोगों की तरह हैं जो अल्लाह के वादे को सच मानते हैं और उसके अनुसार अमल करते हैं? या हमने इसे सिर्फ़ ज़ुबान से माना है, लेकिन अमल से इनकार किया है? यह आयत हमें जगाने के लिए काफ़ी है — कि उस दिन से पहले आज ही लौट आएं, क्योंकि उस दिन के बाद कोई मौका नहीं मिलेगा।



📜 आयत 43-47 — सूरा अल-मुरसलात

43كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो
44إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
45وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
46كُلُوا وَتَمَتَّعُوا قَلِيلًا إِنَّكُم مُّجْرِمُونَ
(झुठलाने वालों) चन्द दिन चैन से खा पी लो तुम बेशक गुनेहगार हो
47وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की मिट्टी ख़राब है
अल-मुरसलातकुरान सूची
50आयत
मक्कीअवतरण स्थान
45आयत

अनुवाद — अल-मुरसलात 45

सूरा अल-मुरसलात आयत 45 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है

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Wednesday, September 30, 2026

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