अल-मुरसलात · 43/50
अनुवाद उच्चारण — अल-मुरसलात
كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝٤٣
Kuloo washraboo haneee `am bimaa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • कुलू – खाओ
  • वशरबू – और पिओ
  • हनीअन – ऐसा जो खुशगवार, पाक और हर प्रकार की तकलीफ से मुक्त हो
  • बिमा कुन्तुम तअमलून – उन (अच्छे) कर्मों के बदले जो तुम करते रहे

तफसीर:

अल्लाह तआला अपने नेक बंदों से जन्नत में फ़रमाएँगे: "खाओ और पिओ, यह सब कुछ तुम्हारे लिए हनीअन (पाक और खुशगवार) है—यानी ऐसा खाना-पीना जिसमें कोई परेशानी, बीमारी, थकान या कोई कमी नहीं, और न ही उसका कोई बुरा अंजाम होगा। यह सब उन अच्छे कर्मों का फल है जो तुमने दुनिया में अल्लाह की इबादत और उसकी रज़ा के लिए किए।"

यह वही लोग हैं जिन्होंने दुनिया में अपने रब का डर रखा, उसके अज़ाब से डरते रहे, उसके हुक्मों का पालन किया और उसकी मनाही से बचते रहे। उनके लिए जन्नत में ठंडी छाँवें, बहते चश्मे और तरह-तरह के फल हैं जो उनके दिल को भाएँगे। जब वे जन्नत में दाखिल होंगे तो उन्हें खाने-पीने का हुक्म दिया जाएगा, और यह खाना-पीना ऐसा होगा जिसमें कोई मेहनत या परेशानी नहीं, बल्कि पूरी आराम और खुशी के साथ होगा।

यह अल्लाह की ओर से उनके अच्छे कर्मों का इनाम है। अल्लाह तआला नेकी करने वालों को इसी तरह का बदला देता है। याद रखिए, दुनिया में जो आदमी जैसा बोएगा, आख़िरत में वैसा ही काटेगा। जिसने दुनिया में अल्लाह की राह में अपने अमल सुधारे, उसकी रज़ा के लिए काम किया, उसके लिए यह नेअमतें हैं। और जिसने दुनिया में अल्लाह के हुक्मों को झुठलाया और उसकी नाफ़रमानी की, उसके लिए उस दिन हलाकत और सख्त अज़ाब है।

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला अपने बंदों पर कितना मेहरबान है। उसने जन्नत की नेअमतें उन लोगों के लिए तैयार की हैं जो उस पर ईमान लाते हैं और नेक अमल करते हैं। आइए, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक बनाएँ, उसके हुक्मों पर चलें और उसकी मनाही से बचें, ताकि हम भी उस दिन इस खुशगवार खाने-पीने और हमेशा की राहत से नवाज़े जाएँ। अल्लाह हम सबको अपनी राह पर चलने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 41-45 — अल-मुरसलात

41إِنَّ الْمُتَّقِينَ فِي ظِلَالٍ وَعُيُونٍ
बेशक परहेज़गार लोग (दरख्तों की) घनी छाँव में होंगे
42وَفَوَاكِهَ مِمَّا يَشْتَهُونَ
और चश्मों और आदमियों में जो उन्हें मरग़ूब हो
43كُلُوا وَاشْرَبُوا هَنِيئًا بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
(दुनिया में) जो अमल करते थे उसके बदले में मज़े से खाओ पियो
44إِنَّا كَذَٰلِكَ نَجْزِي الْمُحْسِنِينَ
मुबारक हम नेकोकारों को ऐसा ही बदला दिया करते हैं
45وَيْلٌ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُكَذِّبِينَ
उस दिन झुठलाने वालों की ख़राबी है
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अनुवाद — अल-मुरसलात 43

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Tuesday, August 18, 2026

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