अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- हब्बन (حَبًّا): अनाज, गेहूँ, जौ आदि जो मनुष्यों का भोजन हैं।
- नबातन (نَبَاتًا): वनस्पति, घास-फूस और वे पौधे जो जानवरों के चारे के रूप में उपयोग होते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने बारिश के पानी का ज़िक्र करने के बाद बताया कि इस पानी को भेजने का एक बड़ा मक़सद यह भी है कि उसके ज़रिए हम ज़मीन से अनाज और वनस्पति निकालें। यानी जब आसमान से पानी बरसता है, तो ज़मीन से तरह-तरह के अनाज पैदा होते हैं — जैसे गेहूँ, जौ, चावल, मक्का — जो इंसानों की गुज़र-बसर का ज़रिया बनते हैं। और साथ ही वनस्पति, घास और हरियाली उगती है, जो चौपायों और जानवरों का चारा बनती है। इस तरह अल्लाह का यह इंतज़ाम देखिए कि एक ही पानी से इंसानों और जानवरों दोनों की रोज़ी का सामान निकल आता है।
यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि बेजान पानी ज़मीन पर पड़ता है, तो ज़मीन अपने सीने से तरह-तरह की नेअमतें निकालती है। अगर इंसान ज़रा ग़ौर करे तो समझ जाए कि यह सब किसी हकीम और क़ादिर हस्ती के इशारे से होता है। यही वह अल्लाह है जो अपने बंदों की परवरिश करता है, उनकी ज़रूरतों को जानता है और उनके लिए रोज़ी के दरवाज़े खोलता है।
इस आयत में इंसान के लिए बड़ी नसीहत है कि वह अपनी रोज़ी और खाने-पीने की चीज़ों पर ग़ौर करे। जब अल्लाह ने पानी के ज़रिए अनाज और वनस्पति पैदा करके अपनी रहमत का सबूत दिया, तो क्या वह मरने के बाद दोबारा ज़िंदा करने पर क़ादिर नहीं? जो अल्लाह हर साल मुर्दा ज़मीन को ज़िंदा करके हरियाली से भर देता है, वही अल्लाह क़यामत के दिन लोगों को क़ब्रों से उठाएगा। यही उस आयत का असली पैग़ाम है कि अल्लाह की कुदरत पर ईमान लाओ, उसके शुक्रगुज़ार बनो, और उस दिन के लिए तैयारी करो जब सब उसके सामने हाज़िर होंगे।
📜 आयत 13-17 — अन-नबा
अनुवाद — अन-नबा 15
सूरा अन-नबा आयत 15 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ताकि उसके ज़रिए से दाने और सबज़ीसूरा आयत 15/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 13–17. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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