अन-नबा · 16/40
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नबा
وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا ۝١٦
Wa jan naatin alfafa
📖 हिंदी अर्थ
और घने घने बाग़ पैदा करें

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • जन्नात (جَنَّاتٍ): बाग़, बग़ीचे
  • अल्फ़ाफ़ा (أَلْفَافًا): घने, गुँथे हुए, जिनके पेड़ एक दूसरे से इस क़दर मिले हुए हों कि उनकी शाखाएँ आपस में गुँथ गई हों

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी उस महान शक्ति और रहमत का ज़िक्र किया है जो उसने बारिश के पानी में रखी है। जब अल्लाह बादलों से मूसलाधार पानी बरसाता है, तो उस पानी से न केवल अनाज पैदा होता है जो इंसानों की गुज़र-बसर का ज़रिया है, बल्कि वह चारा भी उगाता है जो जानवरों के लिए भोजन बनता है। और इसी पानी से वह घने बाग़ भी उगाता है, जिनके पेड़ इतने सघन और गुँथे हुए होते हैं कि उनकी शाखाएँ आपस में इस तरह मिल जाती हैं कि देखने वाला दंग रह जाता है।

यह आयत हमें अल्लाह की उस क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है जो हर पल हमारे सामने प्रकट हो रही है। जब हम किसी हरे-भरे बाग़ को देखते हैं, जहाँ पेड़ घने और फलों से लदे होते हैं, तो क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि यह सब किसने पैदा किया? यह वही अल्लाह है जिसने बारिश का पानी उतारा, उससे यह सब कुछ उगाया। और जो अल्लाह पानी से यह सब कर सकता है, वह मुर्दों को ज़िन्दा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें और उसका शुक्र अदा करें। हर हरा-भरा बाग़, हर फलदार पेड़, हर लहलहाती फ़सल — यह सब अल्लाह की रहमत का नतीजा है। और जो अल्लाह इतनी बड़ी नेमतें देने वाला है, उसकी इबादत और उसका शुक्र हम पर फ़र्ज़ है। यह आयत हमें उस दिन की याद भी दिलाती है जब अल्लाह अपने बन्दों को उनके अच्छे और बुरे कर्मों का बदला देगा। जो लोग अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करेंगे और उसकी इबादत करेंगे, उनके लिए जन्नत के ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते।



📜 आयत 14-18 — सूरा अन-नबा

14وَأَنزَلْنَا مِنَ الْمُعْصِرَاتِ مَاءً ثَجَّاجًا
और हम ही ने बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया
15لِّنُخْرِجَ بِهِ حَبًّا وَنَبَاتًا
ताकि उसके ज़रिए से दाने और सबज़ी
16وَجَنَّاتٍ أَلْفَافًا
और घने घने बाग़ पैदा करें
17إِنَّ يَوْمَ الْفَصْلِ كَانَ مِيقَاتًا
बेशक फैसले का दिन मुक़र्रर है
18يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ فَتَأْتُونَ أَفْوَاجًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और तुम लोग गिरोह गिरोह हाज़िर होगे
अन-नबाकुरान सूची
40आयत
मक्कीअवतरण स्थान
16आयत

अनुवाद — अन-नबा 16

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Saturday, October 3, 2026

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