अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- जन्नात (جَنَّاتٍ): बाग़, बग़ीचे
- अल्फ़ाफ़ा (أَلْفَافًا): घने, गुँथे हुए, जिनके पेड़ एक दूसरे से इस क़दर मिले हुए हों कि उनकी शाखाएँ आपस में गुँथ गई हों
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस आयत में अपनी उस महान शक्ति और रहमत का ज़िक्र किया है जो उसने बारिश के पानी में रखी है। जब अल्लाह बादलों से मूसलाधार पानी बरसाता है, तो उस पानी से न केवल अनाज पैदा होता है जो इंसानों की गुज़र-बसर का ज़रिया है, बल्कि वह चारा भी उगाता है जो जानवरों के लिए भोजन बनता है। और इसी पानी से वह घने बाग़ भी उगाता है, जिनके पेड़ इतने सघन और गुँथे हुए होते हैं कि उनकी शाखाएँ आपस में इस तरह मिल जाती हैं कि देखने वाला दंग रह जाता है।
यह आयत हमें अल्लाह की उस क़ुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है जो हर पल हमारे सामने प्रकट हो रही है। जब हम किसी हरे-भरे बाग़ को देखते हैं, जहाँ पेड़ घने और फलों से लदे होते हैं, तो क्या हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि यह सब किसने पैदा किया? यह वही अल्लाह है जिसने बारिश का पानी उतारा, उससे यह सब कुछ उगाया। और जो अल्लाह पानी से यह सब कर सकता है, वह मुर्दों को ज़िन्दा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की नेमतों पर ग़ौर करें और उसका शुक्र अदा करें। हर हरा-भरा बाग़, हर फलदार पेड़, हर लहलहाती फ़सल — यह सब अल्लाह की रहमत का नतीजा है। और जो अल्लाह इतनी बड़ी नेमतें देने वाला है, उसकी इबादत और उसका शुक्र हम पर फ़र्ज़ है। यह आयत हमें उस दिन की याद भी दिलाती है जब अल्लाह अपने बन्दों को उनके अच्छे और बुरे कर्मों का बदला देगा। जो लोग अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करेंगे और उसकी इबादत करेंगे, उनके लिए जन्नत के ऐसे बाग़ हैं जिनके बारे में हम सोच भी नहीं सकते।
📜 आयत 14-18 — अन-नबा
अनुवाद — अन-नबा 16
सूरा अन-नबा आयत 16 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और घने घने बाग़ पैदा करेंसूरा आयत 16/40 — अन-नबा النبأ (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नबा सुनें, अन-नबा अनुवाद, अन-नबा mp3, अन-नबा pdf. आयत 14–18. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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