अन-नाज़ियात · 34/46
अनुवाद उच्चारण — अन-नाज़ियात
فَإِذَا جَاءَتِ الطَّامَّةُ الْكُبْرَىٰ ۝٣٤
Fa-izaa jaaa`atit taaam matul kubraa
📖 हिंदी अर्थ
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • الطَّامَّةُ: अर्थात वह आपदा जो हर चीज़ को ढक ले, हर चीज़ पर छा जाए और अपनी भयावहता से सबको दबा दे। यह क़ियामत की आपदा के लिए प्रयुक्त हुआ है।
  • الْكُبْرَى: अर्थात सबसे बड़ी, महानतम। यहाँ इसका अर्थ है वह महान घटना जिससे बड़ी कोई घटना नहीं।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब वह महानतम आपदा आएगी—जो क़ियामत की दूसरी सूर (नरसिंगा) है—जो अपनी दहशत और भयावहता से हर चीज़ को अपनी लपेट में ले लेगी, और हर बड़ी से बड़ी मुसीबत उसके सामने छोटी प्रतीत होगी, तब मनुष्य के सामने उसके सभी कर्म—अच्छे और बुरे—प्रस्तुत कर दिए जाएँगे। वह अपने हर अमल को याद करेगा और उसे पहचान लेगा, और जहन्नम (नरक) को हर देखने वाले के सामने खुला दिखा दिया जाएगा।

यह वह क्षण होगा जब हर व्यक्ति अपने किए का फल देखेगा। यह वह दिन है जिसकी हक़ीक़त को झुठलाने वाले आज भी इनकार कर रहे हैं, लेकिन जब वह घड़ी आएगी तो किसी को मौका नहीं दिया जाएगा। यह वह दिन है जब अल्लाह तआला अपने बंदों के बीच पूरे न्याय के साथ फ़ैसला करेगा।

दावत और नसीहत:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें उस दिन की याद दिलाती है जिस दिन से बड़ा कोई दिन नहीं। यह दिन हमें चौकन्ना करता है कि हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) में गुज़ारें। जो आज अपने रब की राह पर चलेगा, वह उस दिन की घबराहट और दहशत से محفوظ رہے گا। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह तआला ने हम पर अपनी रहमत से इस दुनिया में मौका दिया है—तौबा करने का, नेक अमल करने का और अपने गुनाहों से बाज़ आने का। आओ हम इस नेमत की क़द्र करें और अपने रब की राह पर चलें, ताकि उस महान दिन पर हमारा हिसाब आसान हो और हम जन्नत की नेमतों से नवाज़े जाएँ। याद रखें, जो आज अल्लाह की याद से ग़ाफ़िल है, वह उस दिन क्या करेगा जब हर आँख खुली होगी और हर दिल धड़क रहा होगा? अल्लाह हमें अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 32-36 — अन-नाज़ियात

32وَالْجِبَالَ أَرْسَاهَا
और पहाड़ों को उसमें गाड़ दिया
33مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
34فَإِذَا جَاءَتِ الطَّامَّةُ الْكُبْرَىٰ
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी
35يَوْمَ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ مَا سَعَىٰ
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा
36وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 34

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Tuesday, August 18, 2026

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