अन-नाज़ियात · 35/46
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नाज़ियात
يَوْمَ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ مَا سَعَىٰ ۝٣٥
Yauma Yata zakkarul insaanu ma sa`aa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يَتَذَكَّرُ: याद करेगा, स्मरण करेगा
  • مَا سَعَى: जो कुछ उसने (दुनिया में) किया, उसकी कोशिशें और कर्म

तफ़सीर:

जिस दिन क़यामत की महान घड़ी आएगी और दूसरा नफ़्ख़ (सूर) फूँका जाएगा, उस दिन हर इंसान को उसके सारे कर्म सामने रख दिए जाएँगे। वह अपने उन सभी कार्यों को याद करेगा जो उसने दुनिया में किए — चाहे वे अच्छे हों या बुरे। उस दिन कोई भी कर्म उससे छिपा नहीं रहेगा, बल्कि उसकी आँखों के सामने उसका पूरा कारनामा प्रस्तुत कर दिया जाएगा।

यह वह दिन होगा जब इंसान अपनी सारी कोशिशों और मेहनतों को स्पष्ट रूप से देख लेगा — जो बीज उसने दुनिया में बोए थे, उनका फल उसे उसी दिन मिलेगा। नेकी करने वाला अपनी नेकियाँ देखकर खुश होगा, और बुराई करने वाला अपनी बुराइयों को देखकर पछताएगा, लेकिन उस दिन पछतावा कोई काम नहीं आएगा।

दावती पहलू:

यह आयत हमें बताती है कि यह दुनिया कोई खेल-तमाशा नहीं है, बल्कि एक खेत है — जो आज बोएगा, वही कल काटेगा। अल्लाह तआला ने हमें यह जीवन इसलिए दिया है ताकि हम अच्छे कर्म करें, दूसरों की मदद करें, और अपने रब की इबादत करें। याद रखिए! आज हम जो भी कर रहे हैं, वह सब लिखा जा रहा है, और एक दिन हमें उसका सामना करना है।

तो आइए, हम अपने जीवन को सार्थक बनाएँ — नेकी के रास्ते पर चलें, अल्लाह की रहमत के हक़दार बनें, और उस दिन की शर्मिंदगी से बचें जब हमें अपने किए पर पछताना पड़े। यही सफलता है, और यही सच्ची भलाई है। अल्लाह हम सबको अमल की तौफ़ीक़ दे। आमीन।



📜 आयत 33-37 — सूरा अन-नाज़ियात

33مَتَاعًا لَّكُمْ وَلِأَنْعَامِكُمْ
(ये सब सामान) तुम्हारे और तुम्हारे चारपायो के फ़ायदे के लिए है
34فَإِذَا جَاءَتِ الطَّامَّةُ الْكُبْرَىٰ
तो जब बड़ी सख्त मुसीबत (क़यामत) आ मौजूद होगी
35يَوْمَ يَتَذَكَّرُ الْإِنسَانُ مَا سَعَىٰ
जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा
36وَبُرِّزَتِ الْجَحِيمُ لِمَن يَرَىٰ
और जहन्नुम देखने वालों के सामने ज़ाहिर कर दी जाएगी
37فَأَمَّا مَن طَغَىٰ
तो जिसने (दुनिया में) सर उठाया था
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अनुवाद — अन-नाज़ियात 35

सूरा अन-नाज़ियात आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन इन्सान अपने कामों को कुछ याद करेगा

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Wednesday, September 30, 2026

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