अल-अनफाल · 9/75
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-अनफाल
إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ ۝٩
Iz tastagheesoona Rabbakum fastajaaba lakum annee mumiddukum bi alfim minal malaaa`ikati murdifeen
📖 हिंदी अर्थ
(ये वह वक्त था) जब तुम अपने परवदिगार से फरियाद कर रहे थे उसने तुम्हारी सुन ली और जवाब दे दिया कि मैं तुम्हारी लगातार हज़ार फ़रिश्तों से मदद करूँगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • تَسْتَغِيثُونَ: तुम मदद माँग रहे थे, सहायता की प्रार्थना कर रहे थे।
  • فَاسْتَجَابَ: तो उसने (अल्लाह ने) पुकार सुन ली और स्वीकार कर ली।
  • مُمِدُّكُم: मैं तुम्हें सहायता पहुँचाने वाला हूँ, तुम्हारी मदद के लिए भेजने वाला हूँ।
  • مُرْدِفِينَ: लगातार एक के बाद एक आने वाले, क्रमिक रूप से पीछे-पीछे आने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत मुसलमानों को अल्लाह की उस महान कृपा की याद दिलाती है जो उन्होंने बद्र के मैदान में देखी। जब मुसलमानों की संख्या कम थी और उनके पास सामान भी कम था, जबकि दुश्मन की फ़ौज बड़ी और पूरी तरह सुसज्जित थी, तो वे घबरा गए और अल्लाह से फ़रियाद करने लगे। उन्होंने अपने रब से मदद की गुहार लगाई, क्योंकि उन्हें यकीन था कि अल्लाह के सिवा कोई मददगार नहीं है। अल्लाह ने उनकी यह पुकार सुनी और उनकी दुआ क़बूल की। अल्लाह ने उन्हें बशारत दी कि वह उनकी मदद के लिए एक हज़ार फ़रिश्ते भेज रहा है जो लगातार, एक के बाद एक, कतारों में आ रहे हैं। यह मदद सिर्फ़ संख्या बढ़ाने के लिए नहीं थी, बल्कि मुसलमानों के दिलों को मज़बूत करने, उनके हौसले बुलंद करने और दुश्मन के दिलों में खौफ़ पैदा करने के लिए थी। यह अल्लाह की तरफ़ से एक स्पष्ट निशानी थी कि वह अपने बंदों की मदद करता है जब वे सच्चे दिल से उसकी ओर रुजू करते हैं।

फ़ायदे (सबक़):

  • अल्लाह अपने बंदों की दुआ सुनता है और ज़रूरत के वक़्त उनकी मदद करता है, भले ही वे कितने ही कमज़ोर क्यों न हों।
  • मुसीबत के समय अल्लाह से फ़रियाद करना और उसी से मदद माँगना सच्चे ईमान की निशानी है।
  • अल्लाह की मदद कभी-कभी ऐसे ज़रियों से आती है जिनका अंदाज़ा इंसान को नहीं होता, जैसे फ़रिश्तों का भेजा जाना।
  • यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि ताकत और संख्या से बड़ा भरोसा अल्लाह पर होना चाहिए, क्योंकि अल्लाह ही असली मददगार है।
  • अल्लाह की मदद का वादा सच्चा है, और जब वह मदद करता है तो कोई ताकत उसके आगे टिक नहीं सकती।


📜 आयत 7-11 — सूरा अल-अनफाल

7وَإِذْ يَعِدُكُمُ اللَّهُ إِحْدَى الطَّائِفَتَيْنِ أَنَّهَا لَكُمْ وَتَوَدُّونَ أَنَّ غَيْرَ ذَاتِ الشَّوْكَةِ تَكُونُ لَكُمْ وَيُرِيدُ اللَّهُ أَن يُحِقَّ الْحَقَّ بِكَلِمَاتِهِ وَيَقْطَعَ دَابِرَ الْكَافِرِينَ
और उसे (अपनी ऑंखों से) देख रहे हैं और (ये वक्त था) जब ख़ुदा तुमसे वायदा कर रहा था कि (कुफ्फार मक्का) दो जमाअतों में से एक तुम्हारे लिए ज़रूरी हैं और तुम ये चाहते थे कि कमज़ोर जमाअत तुम्हारे हाथ लगे (ताकि बग़ैर लड़े भिड़े माले ग़नीमत हाथ आ जाए) और ख़ुदा ये चाहता था कि अपनी बातों से हक़ को साबित (क़दम) करें और काफिरों की जड़ काट डाले
8لِيُحِقَّ الْحَقَّ وَيُبْطِلَ الْبَاطِلَ وَلَوْ كَرِهَ الْمُجْرِمُونَ
ताकि हक़ को (हक़) साबित कर दे और बातिल का मटियामेट कर दे अगर चे गुनाहगार (कुफ्फार उससे) नाखुश ही क्यों न हो
9إِذْ تَسْتَغِيثُونَ رَبَّكُمْ فَاسْتَجَابَ لَكُمْ أَنِّي مُمِدُّكُم بِأَلْفٍ مِّنَ الْمَلَائِكَةِ مُرْدِفِينَ
(ये वह वक्त था) जब तुम अपने परवदिगार से फरियाद कर रहे थे उसने तुम्हारी सुन ली और जवाब दे दिया कि मैं तुम्हारी लगातार हज़ार फ़रिश्तों से मदद करूँगा
10وَمَا جَعَلَهُ اللَّهُ إِلَّا بُشْرَىٰ وَلِتَطْمَئِنَّ بِهِ قُلُوبُكُمْ ۚ وَمَا النَّصْرُ إِلَّا مِنْ عِندِ اللَّهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ عَزِيزٌ حَكِيمٌ
और (ये इमदाद ग़ैबी) ख़ुदा ने सिर्फ तुम्हारी ख़ातिर (खुशी) के लिए की थी और तुम्हारे दिल मुतमइन हो जाएं और (याद रखो) मदद ख़ुदा के सिवा और कहीं से (कभी) नहीं होती बेशक ख़ुदा ग़ालिब हिकमत वाला है
11إِذْ يُغَشِّيكُمُ النُّعَاسَ أَمَنَةً مِّنْهُ وَيُنَزِّلُ عَلَيْكُم مِّنَ السَّمَاءِ مَاءً لِّيُطَهِّرَكُم بِهِ وَيُذْهِبَ عَنكُمْ رِجْزَ الشَّيْطَانِ وَلِيَرْبِطَ عَلَىٰ قُلُوبِكُمْ وَيُثَبِّتَ بِهِ الْأَقْدَامَ
ये वह वक्त था जब अपनी तरफ से इत्मिनान देने के लिए तुम पर नींद को ग़ालिब कर रहा था और तुम पर आसमान से पानी बरस रहा था ताकि उससे तुम्हें पाक (पाकीज़ा कर दे और तुम से शैतान की गन्दगी दूर कर दे और तुम्हारे दिल मज़बूत कर दे और पानी से (बालू जम जाए) और तुम्हारे क़दम ब क़दम (अच्छी तरह) जमाए रहे
अल-अनफालकुरान सूची
75आयत
मदनीअवतरण स्थान
9आयत

अनुवाद — अल-अनफाल 9

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Monday, September 28, 2026

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