Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَعْلَمُونَ (वे जानते हैं) — यहाँ से पिछली आयत में उल्लिखित "किरामन कातिबीन" (प्रतिष्ठित लेखक फ़रिश्ते) की ओर संकेत है।
- مَا تَفْعَلُونَ (जो कुछ तुम करते हो) — इसमें तुम्हारे सभी कार्य, चाहे वे प्रकट हों या छिपे, छोटे हों या बड़े, सभी शामिल हैं।
विस्तृत तफ़सीर:
अल्लाह तआला ने पिछली आयतों में बताया कि हर इंसान पर सम्मानित लेखक फ़रिश्ते नियुक्त हैं जो उसके हर अमल को लिखते हैं। इस आयत में उन फ़रिश्तों के कार्य की पुष्टि करते हुए फ़रमाया कि वे उन सभी चीज़ों को जानते हैं जो तुम करते हो — चाहे वह नेकी हो या गुनाह, छोटा हो या बड़ा, प्रकट हो या छिपा। यहाँ "जानना" से मुराद उनका पूर्ण अवलोकन और लेखन है, क्योंकि वे अल्लाह की ओर से नियुक्त निगरान हैं और उन्हें हर बात का इल्म दिया गया है।
यह आयत मनुष्य को सचेत करती है कि वह अकेला नहीं है; उसके साथ ऐसे फ़रिश्ते हैं जो उसके हर क़दम को देखते और दर्ज करते हैं। यह बात मोमिन के लिए सुकून का कारण है कि उसकी नेकियाँ ज़ाइया नहीं होंगी, और गुनाहगार के लिए डर का कारण है कि उसके गुनाह छिपे नहीं रहेंगे।
इस आयत का एक और पहलू यह है कि यह हमें याद दिलाती है कि हमारे अमल की रिकॉर्डिंग बहुत सटीक और पूर्ण है, ताकि क़ियामत के दिन कोई कह न सके कि मुझे मेरे अमल की जानकारी नहीं थी या मेरा कोई गवाह नहीं था। यह अल्लाह की न्यायपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा है।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि हमारी ज़िंदगी का हर लम्हा अल्लाह की नज़र में है और उसके फ़रिश्ते हमारे हर अमल को दर्ज कर रहे हैं। यह हमारे लिए एक बड़ी ख़ुशख़बरी है — क्योंकि इसका मतलब है कि हमारी छोटी से छोटी नेकी भी ज़ाइया नहीं होती। जब आप किसी को खुशी देते हैं, जब आप किसी की मदद करते हैं, जब आप अल्लाह की राह में एक क़दम बढ़ाते हैं — यह सब लिखा जा रहा है और क़ियामत के दिन आपको इसका पूरा इनाम मिलेगा।
साथ ही, यह हमें गुनाहों से बचने की ताक़त देती है। जब हमें यक़ीन हो कि हमारे साथ ऐसे फ़रिश्ते हैं जो हमें देख रहे हैं, तो हम उन कामों से बचेंगे जो अल्लाह को नापसंद हैं। यह हमारे ईमान की मज़बूती और अमल की सुधार का ज़रिया है। अल्लाह तआला हम सबको अपने अमल को सुधारने और उसकी रज़ा के मुताबिक़ ज़िंदगी गुज़ारने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 10-14 — सूरा अल-इन्फितार
अनुवाद — अल-इन्फितार 12
सूरा अल-इन्फितार आयत 12 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जो कुछ तुम करते हो वह सब जानते हैंसूरा आयत 12/19 — सूरा अल-इन्फितार الإنفطار (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इन्फितार सुनें, सूरा अल-इन्फितार अनुवाद, सूरा अल-इन्फितार mp3, सूरा अल-इन्फितार pdf. आयत 10–14. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-इन्फितार
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


