अल-फज्र · 8/30
अनुवाद उच्चारण — अल-फज्र
الَّتِي لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِي الْبِلَادِ ۝٨
Allatee lam yukhlaq misluhaa fil bilaad
📖 हिंदी अर्थ
जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الَّتِي (जो) — यहाँ यह सर्वनाम 'इरम' शहर या 'आद' क़ौम की ओर इशारा करता है।
  • لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا (उसके समान पैदा नहीं किया गया) — यानी उसके बराबर की कोई चीज़ नहीं बनाई गई।
  • فِي الْبِلَادِ (देशों में) — यानी पूरी दुनिया में, सारी बस्तियों में।

व्याख्या:

अल्लाह तआला इस आयत में 'आद' क़ौम के उस शहर 'इरम' का ज़िक्र कर रहे हैं, जो अपनी बुलंद इमारतों, मज़बूत स्तंभों और शानदार महलों के लिए मशहूर था। यह वह क़ौम थी जिसे अल्लाह ने ज़बरदस्त ताकत और लंबे-कद वाले शरीर अता किए थे, और उन्होंने ज़मीन पर ऐसी इमारतें खड़ी कीं जिनकी मिसाल पूरी दुनिया में कहीं नहीं थी।

यहाँ अल्लाह तआला उनकी ताकत और शानो-शौकत का ज़िक्र करके यह सबक सिखा रहे हैं कि ये लोग अपनी ताकत और तामीरात पर इतने मगरूर हो गए कि उन्होंने अल्लाह के हुक्म को मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने सोचा कि उनकी ताकत के आगे कोई नहीं ठहर सकता, लेकिन अल्लाह की पकड़ इतनी सख्त थी कि उसने उन्हें ऐसी सज़ा दी जिससे उनकी सारी ताकत और शानो-शौकत मिट्टी में मिल गई।

यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ताकत, दौलत और तामीरात — ये सब चीज़ें अल्लाह की दी हुई हैं और ये कोई इंसान को अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकतीं। इंसान को चाहिए कि वह अपनी ताकत और नेमतों को अल्लाह की इबादत और उसके हुक्मों की पैरवी में खर्च करे, न कि उन पर घमंड करके अल्लाह की नाफ़रमानी करे।

अल्लाह तआला की यह याद दिलाना हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है कि आज हम जो कुछ भी रखते हैं — चाहे वह ताकत हो, दौलत हो, या तामीरात — वह सब फ़ानी है। अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए हमें उसकी रहमत और मग़फिरत का सहारा लेना चाहिए, और अपनी ज़िंदगी को उसके बताए हुए रास्ते पर चलाना चाहिए। यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में कामयाबी दिलाएगा।


📜 आयत 6-10 — अल-फज्र

6أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِعَادٍ
क्या तुमने देखा नहीं कि तुम्हारे आद के साथ क्या किया
7إِرَمَ ذَاتِ الْعِمَادِ
यानि इरम वाले दराज़ क़द
8الَّتِي لَمْ يُخْلَقْ مِثْلُهَا فِي الْبِلَادِ
जिनका मिसल तमाम (दुनिया के) शहरों में कोई पैदा ही नहीं किया गया
9وَثَمُودَ الَّذِينَ جَابُوا الصَّخْرَ بِالْوَادِ
और समूद के साथ (क्या किया) जो वादी (क़रा) में पत्थर तराश कर घर बनाते थे
10وَفِرْعَوْنَ ذِي الْأَوْتَادِ
और फिरऔन के साथ (क्या किया) जो (सज़ा के लिए) मेख़े रखता था
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अनुवाद — अल-फज्र 8

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Tuesday, August 18, 2026

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