Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُرْجَوْنَ (मुर्जौन): टाल दिए गए, स्थगित किए गए, जिनके मामले को अल्लाह के फैसले पर छोड़ दिया गया हो।
- لِأَمْرِ اللَّهِ (लि-अम्रिल्लाह): अल्लाह के आदेश और फैसले के लिए।
- إِمَّا (इम्मा): या तो... या फिर (दो विकल्पों में से एक)।
- يَتُوبُ عَلَيْهِمْ (यतूबु अलैहिम): उन पर दया करके उनकी तौबा क़बूल करे।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे ईमानवालों! उन लोगों में से जो (ग़ज़वा-ए-तबूक में) पीछे रह गए थे, कुछ और लोग भी हैं जिनका मामला अल्लाह के हुक्म पर टाल दिया गया है। ये वे लोग हैं जिन्होंने अपनी ग़लती पर पछतावा तो किया, लेकिन उनकी तौबा का फ़ैसला अभी अल्लाह ने सुनाया नहीं था। अल्लाह ने उनके मामले को अपनी मर्ज़ी पर छोड़ दिया है—या तो वह उन्हें उनके कुसूर (कसूर) की सज़ा में अज़ाब देगा, या फिर उनकी तौबा क़बूल करके उन्हें माफ़ कर देगा। ये तीन सहाबी थे: मुरारा इब्न रबीअ, कअब इब्न मालिक और हिलाल इब्न उमय्या। उन्होंने ग़ज़वा-ए-तबूक में जाने से पीछे रहने पर सच्ची तौबा की थी, लेकिन अल्लाह ने उनकी परीक्षा के लिए उनका फ़ैसला पचास दिनों तक टाल दिया। इस दौरान वे बड़ी मुश्किल और बेचैनी में रहे। अल्लाह उनके दिलों की हालत को भली-भाँति जानता है कि कौन सच्चे दिल से तौबा कर रहा है और कौन नहीं। वह अपने फ़ैसले में पूरा हकीम (तत्वदर्शी) है—हर काम बुद्धिमानी और न्याय के साथ करता है। आख़िरकार अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल की और उन्हें माफ़ कर दिया।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह का फैसला टल सकता है, लेकिन उसकी रहमत कभी बंद नहीं होती: जब इंसान सच्चे दिल से तौबा करता है, तो अल्लाह चाहे तो उसे तुरंत माफ़ कर दे, चाहे तो उसकी परीक्षा के लिए देर करे—लेकिन अंत में उसकी रहमत ही जीतती है। इससे हमें उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
- सच्ची तौबा की ताक़त: कअब इब्न मालिक और उनके साथियों ने पचास दिनों तक मुश्किलें झेलीं, लेकिन उन्होंने झूठा बहाना नहीं बनाया। सच्चाई और ईमानदारी पर डटे रहे। यह हमें सिखाता है कि ग़लती के बाद सच्चाई से पलटना और अल्लाह के सामने झुकना सबसे बड़ी जीत है।
- अल्लाह का इल्म और हिकमत: अल्लाह हर दिल का हाल जानता है। वह जानता है कि कौन सच्चा है और कौन दिखावा कर रहा है। इसलिए हमें उस पर भरोसा रखना चाहिए—वह कभी ज़ुल्म नहीं करता, और उसका हर फैसला हिकमत से भरा होता है।
- गुनाह के बाद निराशा नहीं: यह आयत उन लोगों के लिए बहुत बड़ी ख़ुशख़बरी है जिनसे गुनाह हो जाता है। अल्लाह का दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है। चाहे गुनाह कितना भी बड़ा हो, अल्लाह की रहमत उससे कहीं बड़ी है। बस शर्त है—दिल से तौबा करो और अल्लाह की तरफ़ लौट आओ।
- समाज में इज़्ज़त अल्लाह के फैसले से है: इन सहाबियों को समाज से अलग कर दिया गया था, लेकिन जब अल्लाह ने उन्हें माफ़ किया, तो उनकी इज़्ज़त और भी बढ़ गई। यह सिखाता है कि असली इज़्ज़त अल्लाह के पास है—वही उठाता है और वही गिराता है।
📜 आयत 104-108 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 106
सूरा अत-तौबा आयत 106 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कुछ लोग हैं जो हुक्मे ख़ुदा के उम्मीदवार किए…सूरा आयत 106/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 104–108. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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