Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- اعْمَلُوا: कर्म करो, अर्थात जो चाहो करो (अच्छा या बुरा)।
- فَسَيَرَى اللهُ عَمَلَكُمْ: तो अल्लाह तुम्हारे कर्म को देखेगा।
- عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ: छिपे और प्रकट (गुप्त और खुले) का जानने वाला।
- فَيُنَبِّئُكُمْ: तो वह तुम्हें सूचित करेगा / बता देगा।
तफ़सीर (व्याख्या):
हे नबी! उन लोगों से कह दो जो जिहाद से पीछे रह गए और अपने कर्मों पर पछता रहे हैं — "तुम अब जो चाहो करो, अपने कर्मों को सुधारो, अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और उसके द्वारा निर्धारित फ़र्ज़ों को अदा करो। निश्चय ही अल्लाह तुम्हारे कर्मों को देखेगा, और उसका रसूल तथा ईमानवाले भी तुम्हारे कर्मों को देखेंगे। तुम्हारा अच्छा या बुरा कर्म किसी से छिपा नहीं रहेगा। फिर एक दिन तुम सबको उस परम ज्ञानी की ओर लौटना है जो छिपे और खुले, गुप्त और प्रकट — सब कुछ जानता है। वह तुम्हें बता देगा कि तुम दुनिया में क्या-क्या करते रहे हो, और उसी के अनुसार तुम्हें बदला देगा।"
यह एक कठोर चेतावनी और धमकी है उनके लिए जो अपनी बुराइयों और ज़ुल्म पर डटे रहेंगे। साथ ही यह उन तौबा करने वालों के लिए प्रोत्साहन भी है कि अपने अतीत के नुक़सान की भरपाई करें और सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौट आएँ, क्योंकि अल्लाह और उसके रसूल तथा ईमानवालों की निगाहें उनके कर्मों पर हैं।
फ़ायदे (लाभ एवं शिक्षाएँ):
- कर्मों की निगरानी का एहसास: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि उसका हर कर्म — चाहे वह छोटा हो या बड़ा, गुप्त हो या प्रकट — अल्लाह, उसके रसूल और ईमानवालों के सामने है। यह एहसास इंसान को नेक काम करने और बुराई से बचने की प्रेरणा देता है।
- अल्लाह की ओर लौटने की सच्ची तैयारी: यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, जो हर छिपी और खुली चीज़ का ज्ञाता है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलने की ताक़त देता है।
- तौबा का दरवाज़ा खुला है: जो लोग पहले ग़लती कर चुके हैं, उनके लिए यह आयत निराशा नहीं, बल्कि उम्मीद का पैग़ाम है — वे अपने कर्म सुधारें, अल्लाह की ओर लौटें, तो अल्लाह उनके कर्मों को देखकर उन्हें क्षमा और इनाम देगा।
- ईमानवालों की एकता और पारदर्शिता: यह आयत मुस्लिम समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का माहौल बनाती है — हर व्यक्ति जानता है कि उसके कर्मों पर दूसरे ईमानवाले भी नज़र रखते हैं, जिससे समाज में अच्छाई को बढ़ावा मिलता है और बुराई को रोका जाता है।
- आख़िरत पर विश्वास की मज़बूती: यह आयत आख़िरत के दिन पर विश्वास को पुख़्ता करती है — जब हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। यह विश्वास इंसान को दुनिया की अस्थायी खुशियों के पीछे भागने के बजाय अल्लाह की रज़ा की तलाश में लगा देता है।
📜 आयत 103-107 — सूरा अत-तौबा
अनुवाद — अत-तौबा 105
सूरा अत-तौबा आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग अपने…सूरा आयत 105/129 — सूरा अत-तौबा التوبة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अत-तौबा सुनें, सूरा अत-तौबा अनुवाद, सूरा अत-तौबा mp3, सूरा अत-तौबा pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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