अत-तौबा · 105/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
وَقُلِ اعْمَلُوا فَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ وَالْمُؤْمِنُونَ ۖ وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ ۝١٠٥
Wa quli`maloo fasayaral laahu `amalakum wa Rasooluhoo walmu`minoona wa saturaddoona ilaa `Aalimil Ghaibi washshahaadati fa yunabbi`ukum bimaa kuntum ta`maloon
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग अपने अपने काम किए जाओ अभी तो ख़ुदा और उसका रसूल और मोमिनीन तुम्हारे कामों को देखेगें और बहुत जल्द (क़यामत में) ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ लौटाए जाऎंगे तब वह जो कुछ भी तुम करते थे तुम्हें बता देगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اعْمَلُوا: कर्म करो, अर्थात जो चाहो करो (अच्छा या बुरा)।
  • فَسَيَرَى اللهُ عَمَلَكُمْ: तो अल्लाह तुम्हारे कर्म को देखेगा।
  • عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ: छिपे और प्रकट (गुप्त और खुले) का जानने वाला।
  • فَيُنَبِّئُكُمْ: तो वह तुम्हें सूचित करेगा / बता देगा।

तफ़सीर (व्याख्या):

हे नबी! उन लोगों से कह दो जो जिहाद से पीछे रह गए और अपने कर्मों पर पछता रहे हैं — "तुम अब जो चाहो करो, अपने कर्मों को सुधारो, अल्लाह की आज्ञा का पालन करो और उसके द्वारा निर्धारित फ़र्ज़ों को अदा करो। निश्चय ही अल्लाह तुम्हारे कर्मों को देखेगा, और उसका रसूल तथा ईमानवाले भी तुम्हारे कर्मों को देखेंगे। तुम्हारा अच्छा या बुरा कर्म किसी से छिपा नहीं रहेगा। फिर एक दिन तुम सबको उस परम ज्ञानी की ओर लौटना है जो छिपे और खुले, गुप्त और प्रकट — सब कुछ जानता है। वह तुम्हें बता देगा कि तुम दुनिया में क्या-क्या करते रहे हो, और उसी के अनुसार तुम्हें बदला देगा।"

यह एक कठोर चेतावनी और धमकी है उनके लिए जो अपनी बुराइयों और ज़ुल्म पर डटे रहेंगे। साथ ही यह उन तौबा करने वालों के लिए प्रोत्साहन भी है कि अपने अतीत के नुक़सान की भरपाई करें और सच्चे दिल से अल्लाह की ओर लौट आएँ, क्योंकि अल्लाह और उसके रसूल तथा ईमानवालों की निगाहें उनके कर्मों पर हैं।


फ़ायदे (लाभ एवं शिक्षाएँ):

  1. कर्मों की निगरानी का एहसास: यह आयत मुसलमान को सिखाती है कि उसका हर कर्म — चाहे वह छोटा हो या बड़ा, गुप्त हो या प्रकट — अल्लाह, उसके रसूल और ईमानवालों के सामने है। यह एहसास इंसान को नेक काम करने और बुराई से बचने की प्रेरणा देता है।
  2. अल्लाह की ओर लौटने की सच्ची तैयारी: यह आयत हमें याद दिलाती है कि हमें एक दिन अल्लाह के सामने हाज़िर होना है, जो हर छिपी और खुली चीज़ का ज्ञाता है। यह विश्वास इंसान को ज़िम्मेदार बनाता है और उसे सच्चाई और ईमानदारी की राह पर चलने की ताक़त देता है।
  3. तौबा का दरवाज़ा खुला है: जो लोग पहले ग़लती कर चुके हैं, उनके लिए यह आयत निराशा नहीं, बल्कि उम्मीद का पैग़ाम है — वे अपने कर्म सुधारें, अल्लाह की ओर लौटें, तो अल्लाह उनके कर्मों को देखकर उन्हें क्षमा और इनाम देगा।
  4. ईमानवालों की एकता और पारदर्शिता: यह आयत मुस्लिम समाज में पारदर्शिता और जवाबदेही का माहौल बनाती है — हर व्यक्ति जानता है कि उसके कर्मों पर दूसरे ईमानवाले भी नज़र रखते हैं, जिससे समाज में अच्छाई को बढ़ावा मिलता है और बुराई को रोका जाता है।
  5. आख़िरत पर विश्वास की मज़बूती: यह आयत आख़िरत के दिन पर विश्वास को पुख़्ता करती है — जब हर इंसान को उसके कर्मों का पूरा-पूरा बदला मिलेगा। यह विश्वास इंसान को दुनिया की अस्थायी खुशियों के पीछे भागने के बजाय अल्लाह की रज़ा की तलाश में लगा देता है।


📜 आयत 103-107 — अत-तौबा

103خُذْ مِنْ أَمْوَالِهِمْ صَدَقَةً تُطَهِّرُهُمْ وَتُزَكِّيهِم بِهَا وَصَلِّ عَلَيْهِمْ ۖ إِنَّ صَلَاتَكَ سَكَنٌ لَّهُمْ ۗ وَاللَّهُ سَمِيعٌ عَلِيمٌ
(ऐ रसूल) तुम उनके माल की ज़कात लो (और) इसकी बदौलत उनको (गुनाहो से) पाक साफ करों और उनके वास्ते दुआएं ख़ैर करो क्योंकि तुम्हारी दुआ इन लोगों के हक़ में इत्मेनान (का बाइस है) और ख़ुदा तो (सब कुछ) सुनता (और) जानता है
104أَلَمْ يَعْلَمُوا أَنَّ اللَّهَ هُوَ يَقْبَلُ التَّوْبَةَ عَنْ عِبَادِهِ وَيَأْخُذُ الصَّدَقَاتِ وَأَنَّ اللَّهَ هُوَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ
क्या इन लोगों ने इतने भी नहीं जाना यक़ीनन ख़ुदा बन्दों की तौबा क़ुबूल करता है और वही ख़ैरातें (भी) लेता है और इसमें शक़ नहीं कि वही तौबा का बड़ा कुबूल करने वाला मेहरबान है
105وَقُلِ اعْمَلُوا فَسَيَرَى اللَّهُ عَمَلَكُمْ وَرَسُولُهُ وَالْمُؤْمِنُونَ ۖ وَسَتُرَدُّونَ إِلَىٰ عَالِمِ الْغَيْبِ وَالشَّهَادَةِ فَيُنَبِّئُكُم بِمَا كُنتُمْ تَعْمَلُونَ
और (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तुम लोग अपने अपने काम किए जाओ अभी तो ख़ुदा और उसका रसूल और मोमिनीन तुम्हारे कामों को देखेगें और बहुत जल्द (क़यामत में) ज़ाहिर व बातिन के जानने वाले (ख़ुदा) की तरफ लौटाए जाऎंगे तब वह जो कुछ भी तुम करते थे तुम्हें बता देगा
106وَآخَرُونَ مُرْجَوْنَ لِأَمْرِ اللَّهِ إِمَّا يُعَذِّبُهُمْ وَإِمَّا يَتُوبُ عَلَيْهِمْ ۗ وَاللَّهُ عَلِيمٌ حَكِيمٌ
और कुछ लोग हैं जो हुक्मे ख़ुदा के उम्मीदवार किए गए हैं (उसको अख्तेयार है) ख्वाह उन पर अज़ाब करे या उन पर मेहरबानी करे और ख़ुदा (तो) बड़ा वाकिफकार हिकमत वाला है
107وَالَّذِينَ اتَّخَذُوا مَسْجِدًا ضِرَارًا وَكُفْرًا وَتَفْرِيقًا بَيْنَ الْمُؤْمِنِينَ وَإِرْصَادًا لِّمَنْ حَارَبَ اللَّهَ وَرَسُولَهُ مِن قَبْلُ ۚ وَلَيَحْلِفُنَّ إِنْ أَرَدْنَا إِلَّا الْحُسْنَىٰ ۖ وَاللَّهُ يَشْهَدُ إِنَّهُمْ لَكَاذِبُونَ
और (वह लोग भी मुनाफिक़ हैं) जिन्होने (मुसलमानों के) नुकसान पहुंचाने और कुफ़्र करने वाले और मोमिनीन के दरमियान तफरक़ा (फूट) डालते और उस शख़्स की घात में बैठने के वास्ते मस्जिद बनाकर खड़ी की है जो ख़ुदा और उसके रसूल से पहले लड़ चुका है (और लुत्फ़ तो ये है कि) ज़रूर क़समें खाएगें कि हमने भलाई के सिवा कुछ और इरादा ही नहीं किया और ख़ुदा ख़ुद गवाही देता है
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अनुवाद — अत-तौबा 105

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Tuesday, August 18, 2026

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