अत-तौबा · 89/129
अनुवाद उच्चारण — अत-तौबा
أَعَدَّ اللَّهُ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ ۝٨٩
A`addal laahu lahum Jannaatin tajree min tahtihal anhaaru khaalideena feehaa; zaalikal fawzul `azeem
📖 हिंदी अर्थ
ख़ुदा ने उनके वास्ते (बेहश्त) के वह (हरे भरे) बाग़ तैयार कर रखे हैं जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरे जारी हैं (और ये) इसमें हमेशा रहेंगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَعَدَّ: तैयार किया, तय्यार किया।
  • جَنَّاتٍ: बाग़, स्वर्ग के उद्यान।
  • تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ: जिनके नीचे से नहरें बहती हैं।
  • خَالِدِينَ: हमेशा रहने वाले, सदैव निवास करने वाले।
  • الْفَوْزُ الْعَظِيمُ: बड़ी कामयाबी, महान सफलता।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला ने उन लोगों (जो उसकी राह में जिहाद करते हैं और उसके दीन की मदद करते हैं) के लिए क़यामत के दिन ऐसे बाग़ तैयार किए हैं जिनके नीचे से नहरें बहती हैं। ये बाग़ ऐसे हैं कि उनके महलों के नीचे से पानी की नहरें जारी हैं, और ये लोग इनमें हमेशा हमेशा रहेंगे, कभी उन्हें मौत नहीं आएगी और न ही उन्हें वहाँ से निकाला जाएगा। यही वह बड़ी कामयाबी है जिसके आगे दुनिया की हर कामयाबी बेमानी है — यह वह फ़लाह और सफलता है जिसके बराबर कोई और सफलता नहीं हो सकती। यह अल्लाह की ओर से उनके लिए एक विशेष सम्मान और इनाम है, जो उनके ईमान, अच्छे कर्मों और अल्लाह की राह में किए गए बलिदानों का परिणाम है।

फ़ायदे:

  1. यह आयत मुसलमानों को यह खुशखबरी देती है कि अल्लाह की राह में किए गए छोटे से छोटा काम भी अल्लाह के यहाँ बेकार नहीं जाता — उसका बदला जन्नत है।
  2. जन्नत की नेमतें हमेशा रहने वाली हैं; दुनिया की नेमतें ख़त्म होने वाली हैं, लेकिन जन्नत की नेमतें कभी ख़त्म नहीं होंगी। यह बात इंसान को दुनिया की चीज़ों से बेराग़ब करके आख़िरत की तरफ़ राग़िब करती है।
  3. "फ़ौज़ुल अज़ीम" (बड़ी कामयाबी) का ज़िक्र करके अल्लाह हमें बताता है कि असली कामयाबी दुनिया में धन-दौलत या ओहदा हासिल करना नहीं है, बल्कि असली कामयाबी जन्नत पाना है।
  4. यह आयत मोमिनों के दिलों में अल्लाह की राह में कुर्बानी देने का जज़्बा पैदा करती है, क्योंकि वे जानते हैं कि उनका इंतज़ार करने वाला इनाम बहुत बड़ा है।
  5. अल्लाह का "أَعَدَّ" (तैयार किया) शब्द बताता है कि जन्नत पहले से तैयार है — यह चीज़ मोमिन को यक़ीन दिलाती है कि उसका ठिकाना पक्का है, बशर्ते वह ईमान और अमल पर क़ायम रहे।
🎧 सुनें

📜 आयत 87-91 — अत-तौबा

87رَضُوا بِأَن يَكُونُوا مَعَ الْخَوَالِفِ وَطُبِعَ عَلَىٰ قُلُوبِهِمْ فَهُمْ لَا يَفْقَهُونَ
ये इस बात से ख़ुश हैं कि पीछे रह जाने वालों (औरतों, बच्चों, बीमारो के साथ बैठे) रहें और (गोया) उनके दिल पर मोहर कर दी गई तो ये कुछ नहीं समझतें
88لَٰكِنِ الرَّسُولُ وَالَّذِينَ آمَنُوا مَعَهُ جَاهَدُوا بِأَمْوَالِهِمْ وَأَنفُسِهِمْ ۚ وَأُولَٰئِكَ لَهُمُ الْخَيْرَاتُ ۖ وَأُولَٰئِكَ هُمُ الْمُفْلِحُونَ
मगर रसूल और जो लोग उनके साथ ईमान लाए हैं उन लोगों ने अपने अपने माल और अपनी अपनी जानों से जिहाद किया- यही वह लोग हैं जिनके लिए (हर तरह की) भलाइयाँ हैं और यही लोग कामयाब होने वाले हैं
89أَعَدَّ اللَّهُ لَهُمْ جَنَّاتٍ تَجْرِي مِن تَحْتِهَا الْأَنْهَارُ خَالِدِينَ فِيهَا ۚ ذَٰلِكَ الْفَوْزُ الْعَظِيمُ
ख़ुदा ने उनके वास्ते (बेहश्त) के वह (हरे भरे) बाग़ तैयार कर रखे हैं जिनके (दरख्तों के) नीचे नहरे जारी हैं (और ये) इसमें हमेशा रहेंगें यही तो बड़ी कामयाबी हैं
90وَجَاءَ الْمُعَذِّرُونَ مِنَ الْأَعْرَابِ لِيُؤْذَنَ لَهُمْ وَقَعَدَ الَّذِينَ كَذَبُوا اللَّهَ وَرَسُولَهُ ۚ سَيُصِيبُ الَّذِينَ كَفَرُوا مِنْهُمْ عَذَابٌ أَلِيمٌ
और (तुम्हारे पास) कुछ हीला करने वाले गवार देहाती (भी) आ मौजदू हुए ताकि उनको भी (पीछे रह जाने की) इजाज़त दी जाए और जिन लोगों ने ख़ुदा और उसके रसूल से झूठ कहा था वह (घर में) बैठ रहे (आए तक नहीं) उनमें से जिन लोगों ने कुफ़्र एख्तेयार किया अनक़रीब ही उन पर दर्दनाक अज़ाब आ पहुँचेगा
91لَّيْسَ عَلَى الضُّعَفَاءِ وَلَا عَلَى الْمَرْضَىٰ وَلَا عَلَى الَّذِينَ لَا يَجِدُونَ مَا يُنفِقُونَ حَرَجٌ إِذَا نَصَحُوا لِلَّهِ وَرَسُولِهِ ۚ مَا عَلَى الْمُحْسِنِينَ مِن سَبِيلٍ ۚ وَاللَّهُ غَفُورٌ رَّحِيمٌ
(ऐ रसूल जिहाद में न जाने का) न तो कमज़ोरों पर कुछ गुनाह है न बीमारों पर और न उन लोगों पर जो कुछ नहीं पाते कि ख़र्च करें बशर्ते कि ये लोग ख़ुदा और उसके रसूल की ख़ैर ख्वाही करें नेकी करने वालों पर (इल्ज़ाम की) कोई सबील नहीं और ख़ुदा बड़ा बख़्शने वाला मेहरबान है
अत-तौबाकुरान सूची
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अनुवाद — अत-तौबा 89

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Tuesday, August 18, 2026

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