और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
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اور جب ہم لوگوں کو تکلیف پہنچنے کے بعد (اپنی) رحمت (سے آسائش) کا مزہ چکھاتے ہیں تو وہ ہماری آیتوں میں حیلے کرنے لگتے ہیں۔ کہہ دو کہ خدا بہت جلد حیلہ کرنے والا ہے۔ اور جو حیلے تم کرتے ہو ہمارے فرشتے ان کو لکھتے جاتے ہیں
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
अज़क़्ना (أَذَقْنَا): हमने चखाया, यानी अनुभव कराया।
रहमत (رَحْمَةً): यहाँ इससे अर्थ है सुख-समृद्धि, वर्षा और खुशहाली।
ज़र्रा (ضَرَّاء): कठिनाई, तकलीफ, सूखा और बदहाली।
मक्र (مَكْرٌ): चालाकी, धोखा, उपहास और बुरी तरकीबें।
असरउ (أَسْرَعُ): सबसे तेज़, सबसे शीघ्र।
रुसुलुन (رُسُلُنَا): हमारे भेजे हुए, यहाँ अर्थ है निगरानी करने वाले फ़रिश्ते।
तफ़सीर (व्याख्या):
जब हम लोगों को (विशेषकर मक्का के मुशरिकों को) किसी कठिनाई, तकलीफ़ या सूखे के बाद सुख, राहत और समृद्धि का अनुभव कराते हैं, तो वे हमारी नेमतों को भूल जाते हैं और हमारी आयतों के साथ मज़ाक, उपहास और धोखेबाज़ी करने लगते हैं। वे सच्चाई को दबाने और उसे बदनाम करने की कोशिश करते हैं।
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि अल्लाह की चालाकी और उसकी पकड़ सबसे तेज़ है। वह उन्हें उनके किए की सज़ा देने में देर नहीं लगाता। वह उन्हें धीरे-धीरे पकड़ता है और उनकी सारी तरकीबें उन्हीं पर उलट देता है। उनका यह मक्र उन्हें अल्लाह की पकड़ से नहीं बचा सकता।
याद रखें कि हमारे भेजे हुए फ़रिश्ते (किरामन कातिबीन) उन सभी चालों और बुरी तरकीबों को लिख रहे हैं जो वे हमारी आयतों के खिलाफ़ करते हैं। उनमें से कोई भी बात उनके लेख से छूटती नहीं है, और क़यामत के दिन उन्हें उन सबका हिसाब देना होगा।
फ़ायदे (सबक):
अल्लाह की नेमतों पर शुक्र न करना बड़ी नाइंशुक्री है। जब अल्लाह मुसीबत के बाद राहत देता है, तो उसका शुक्र अदा करना चाहिए, न कि उसकी आयतों का मज़ाक उड़ाना।
अल्लाह की पकड़ बहुत तेज़ है। इंसान चाहे कितनी भी चालाकियाँ करे, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। वह धीरे-धीरे (इस्तिद्राज) पकड़ता है, लेकिन उसकी पकड़ बहुत सख्त होती है।
हर अच्छी और बुरी बात लिखी जा रही है। हमारे साथ हमेशा फ़रिश्ते मौजूद हैं जो हमारे हर अमल को रिकॉर्ड कर रहे हैं। यह हमें सचेत करता है कि हम अपने कामों में सावधानी बरतें।
मुसीबत के बाद राहत अल्लाह की रहमत है। यह हमें सिखाता है कि मुसीबत के वक़्त निराश न हों, क्योंकि अल्लाह की रहमत उसके बाद ज़रूर आती है, बशर्ते हम सब्र करें।
उपहास और मज़ाक अल्लाह की आयतों के साथ बहुत बड़ा गुनाह है। यह दिल की सख्ती और ईमान की कमज़ोरी की निशानी है। मोमिन को चाहिए कि वह क़ुरआन और अल्लाह की निशानियों के साथ अदब (सम्मान) से पेश आए।
उससे वह पाक साफ और बरतर है और सब लोग तो (पहले) एक ही उम्मत थे और (ऐ रसूल) अगर तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से एक बात (क़यामत का वायदा) पहले न हो चुकी होती जिसमें ये लोग एख्तिलाफ कर रहे हैं उसका फैसला उनके दरमियान (कब न कब) कर दिया गया होता
और कहते हैं कि उस पैग़म्बर पर कोई मोजिज़ा (हमारी ख्वाहिश के मुवाफिक़) क्यों नहीं नाज़िल किया गया तो (ऐ रसूल) तुम कह दो कि ग़ैब (दानी) तो सिर्फ ख़ुदा के वास्ते ख़ास है तो तुम भी इन्तज़ार करो और तुम्हारे साथ मै (भी) यक़ीनन इन्तज़ार करने वालों में हूँ
और लोगों को जो तकलीफ पहुँची उसके बाद जब हमने अपनी रहमत का जाएक़ा चखा दिया तो यकायक उन लोगों से हमारी आयतों में हीले बाज़ी शुरू कर दी (ऐ रसूल) तुम कह दो कि तद्बीर में ख़ुदा सब से ज्यादा तेज़ है तुम जो कुछ मक्कारी करते हो वह हमारे भेजे हुए (फरिश्ते) लिखते जाते हैं
वह वही ख़ुदा है जो तुम्हें ख़ुश्की और दरिया में सैर कराता फिरता है यहाँ तक कि जब (कभी) तुम कश्तियों पर सवार होते हो और वह उन लोगों को बाद मुवाफिक़ (हवा के धारे) की मदद से लेकर चली और लोग उस (की रफ्तार) से ख़ुश हुए (यकायक) कश्ती पर हवा का एक झोंका आ पड़ा और (आना था कि) हर तरफ से उस पर लहरें (बढ़ी चली) आ रही हैं और उन लोगों ने समझ लिया कि अब घिर गए (और जान न बचेगी) तब अपने अक़ीदे को उसके वास्ते निरा खरा करके खुदा से दुआएँ मागँने लगते हैं कि (ख़ुदाया) अगर तूने इस (मुसीबत) से हमें नजात दी तो हम ज़रुर बड़े शुक्र गुज़ार होंगे
फिर जब ख़ुदा ने उन्हें नजात दी तो वह लोग ज़मीन पर (कदम रखते ही) फौरन नाहक़ सरकशी करने लगते हैं (ऐ लोगों तुम्हारी सरकशी का वबाल) तो तुम्हारी ही जान पर है - (ये भी) दुनिया की (चन्द रोज़ा) ज़िन्दगी का फायदा है फिर आख़िर हमारी (ही) तरफ तुमको लौटकर आना है तो (उस वक्त) हम तुमको जो कुछ (दुनिया में) करते थे बता देगे
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