Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ظَنًّا (ज़न्नन): अनुमान, अटकल, बिना प्रमाण के धारणा, संदेह और भ्रम।
- لَا يُغْنِي مِنَ الْحَقِّ شَيْئًا (ला युग्नी मिनल हक़्क़ि शै'अ): सत्य के मुकाबले में कुछ भी काम नहीं आता, अर्थात यह सत्य का विकल्प नहीं बन सकता।
- عَلِيمٌ (अलीम): सब कुछ जानने वाला, पूर्ण ज्ञान रखने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उन लोगों की स्थिति को स्पष्ट करती है जो बिना किसी ठोस ज्ञान और प्रमाण के, केवल अपने पूर्वजों की अंधी परंपरा, मनगढ़ंत कल्पनाओं और निराधार अनुमानों के आधार पर झूठे देवी-देवताओं की पूजा करते हैं। उनका यह मानना कि ये मूर्तियाँ उन्हें अल्लाह के करीब लाएँगी या उनकी सिफ़ारिश करेंगी, महज़ एक खोखला अनुमान है, जिसका कोई वास्तविक आधार नहीं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि यह अनुमान और अटकल सत्य के मुकाबले में किसी काम की नहीं है। सत्य तो वही है जो प्रमाण और यक़ीन पर आधारित हो, और यक़ीन केवल अल्लाह की वही और उसके पैग़म्बरों की शिक्षाओं से ही मिल सकता है। जो लोग केवल अनुमानों पर चलते हैं, वे हक़ (सत्य) से वंचित रहते हैं, क्योंकि अनुमान कभी सत्य का स्थान नहीं ले सकता।
अंत में अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह उन सब कामों से पूर्ण रूप से अवगत है जो ये लोग करते हैं। उसके ज्ञान से कोई भी बात छिपी नहीं है — न उनका कुफ़्र, न उनका झूठ, न उनकी बुरी नीयतें। और यही ज्ञान उनके लिए चेतावनी है कि वे अपने कर्मों का फल अवश्य भुगतेंगे।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अनुमान और अटकल से बचना: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि धर्म और आस्था के मामलों में केवल अनुमान, अंधी परंपरा या पूर्वजों की नक़ल पर चलना सरासर गुमराही है। हमें हर बात को ज्ञान और प्रमाण के आधार पर समझना चाहिए।
- सत्य की पहचान: सत्य केवल वही है जो अल्लाह की वही (प्रकाशितवाक्य) और उसके रसूल की शिक्षा से साबित हो। अनुमान और कल्पना कभी भी सत्य का विकल्प नहीं बन सकते। यह हमें सिखाता है कि हम अपने जीवन के हर पहलू में सत्य की तलाश करें, न कि केवल अपनी मनमानी धारणाओं पर चलें।
- अल्लाह की निगरानी का एहसास: यह आयत हमें याद दिलाती है कि अल्लाह हमारे हर काम, हर नीयत और हर विचार से पूर्ण रूप से वाक़िफ़ है। यह एहसास हमें ग़लत कामों से रोकता है और अच्छे कामों की तरफ़ प्रेरित करता है। जब हमें यक़ीन हो कि अल्लाह सब देख रहा है, तो हम अपने आचरण को सुधारने की कोशिश करते हैं।
- ज्ञान की अहमियत: इस आयत में ज्ञान (इल्म) की अहमियत को रेखांकित किया गया है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अपने दीन को समझे, उसका ज्ञान हासिल करे और बिना ज्ञान के किसी भी मामले में फ़ैसला न करे। यही वह रास्ता है जो इंसान को हक़ तक पहुँचाता है।
📜 आयत 34-38 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 36
सूरा यूनुस आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तुम कैसे हुक्म लगाते हो और उनमें के अक्सर तो…सूरा आयत 36/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
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