Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَهْدِي: मार्गदर्शन करना, सीधा रास्ता दिखाना।
- الْحَقّ: सत्य, सच्चाई, सीधा और सही मार्ग।
- لَا يَهِدِّي: स्वयं मार्ग न पाना, हिदायत न प्राप्त करना (यहाँ "يَهْتَدِي" के अर्थ में है)।
- إِلَّا أَن يُهْدَى: जब तक कि उसे कोई और मार्गदर्शन न दे, अर्थात वह दूसरों के सहारे चलता है।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कहिए: "क्या तुम्हारे उन ठहराए गए साझीदारों (जिन्हें तुम अल्लाह का शरीक बनाते हो) में से कोई है जो सत्य की ओर मार्गदर्शन कर सके?" यह प्रश्न उन्हें उत्तर देने पर मजबूर करता है, और वे स्वयं जानते हैं कि उनके बुत, देवी-देवता या अन्य पूज्य न तो किसी को रास्ता दिखा सकते हैं और न ही स्वयं किसी का मार्गदर्शन कर सकते हैं। जब वे इसका उत्तर नहीं दे सकते, तो आप कहिए: "अल्लाह ही सत्य की ओर मार्गदर्शन करता है।" वही है जो अपने बंदों को सीधा रास्ता दिखाता है, उन्हें अंधकार से प्रकाश की ओर लाता है।
फिर उनसे कहिए: "क्या जो सत्य की ओर मार्गदर्शन करता है, वह अनुसरण करने का अधिक हक़दार है, या वह जो स्वयं मार्ग नहीं पाता, बल्कि उसे दूसरों के द्वारा मार्गदर्शन दिए जाने की आवश्यकता है?" यह तर्क अत्यंत स्पष्ट और सरल है — जो स्वयं रास्ता जानता है और दूसरों को दिखाता है, वही पीछे चलने योग्य है; न कि वह जो बेजान है, न कुछ जानता है और न ही किसी की मदद कर सकता है। फिर आप उन्हें उनके हाल पर छोड़ते हुए कहते हैं: "तुम्हें क्या हो गया है? तुम कैसा फैसला करते हो?" अर्थात तुम्हारा यह निर्णय कि अल्लाह के साथ इन निर्जीव चीज़ों को साझीदार बनाया जाए, कितना बेतुका और अकारण है! तुम्हारा यह हुक्म किसी भी तर्क या बुद्धि पर आधारित नहीं है, बल्कि पूर्णतः बातिल और निराधार है।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- तौहीद (एकेश्वरवाद) की स्पष्ट दलील: यह आयत सिखाती है कि अल्लाह ही सच्चा मार्गदर्शक है, और यही उसकी इबादत का सबसे बड़ा कारण है। जो सत्य की ओर बुलाता है, वही अनुसरण के योग्य है।
- बुद्धि और तर्क का उपयोग: इस्लाम अंधी परंपरा या अंधविश्वास पर नहीं, बल्कि स्पष्ट तर्क और बुद्धि पर आधारित है। यह आयत हमें सिखाती है कि अपने विश्वासों को तर्क की कसौटी पर परखना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत: अल्लाह ने हमें अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि अपने नबियों और किताबों के माध्यम से हमें सीधा रास्ता दिखाया — यह उसकी असीम कृपा है।
- सच्चे रास्ते की पहचान: जो व्यक्ति या चीज़ स्वयं बेबस है, वह दूसरों का मार्गदर्शन कैसे कर सकती है? यही सिद्धांत हमें जीवन के हर क्षेत्र में सही नेता और सही रास्ता चुनने में मदद करता है।
- क़ुरआन का अंदाज़-ए-बयान: यह आयत प्रश्नों और तर्कों के माध्यम से लोगों को सोचने पर मजबूर करती है, जो दिखाता है कि इस्लाम एक जीवंत और तर्कसंगत धर्म है — यह हर युग के लोगों के लिए प्रासंगिक है।
📜 आयत 33-37 — सूरा यूनुस
अनुवाद — यूनुस 35
सूरा यूनुस आयत 35 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल उनसे) कहो तो कि तुम्हारे (बनाए हुए) शरीकों…सूरा आयत 35/109 — सूरा यूनुस يونس (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा यूनुस सुनें, सूरा यूनुस अनुवाद, सूरा यूनुस mp3, सूरा यूनुस pdf. आयत 33–37. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


